न किसान, न जमीन, फिर भी पा गए पीएम किसान सम्मान निधि!
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राजस्थान में एक हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने करीब छह लाख लोगों की किस्त रोकी

26 अक्टूबर 2025 को राजस्थान की झालावाड़ पुलिस ने 'ऑपरेशन शटर डाउन पार्ट द्वितीय' के जरिए खुलासा किया कि 3 लाख से ज्यादा संदिग्ध खातों से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है.
ऑपरेशन में पकड़े गए साइबर अपराधियों के डिजिटल उपकरणों की जांच से सामने आया कि राजस्थान, गुजरात, असम, दिल्ली, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में करीब तीन लाख लोग ऐसे हैं, जिनके पास न जमीन है और न ही वे किसान हैं, फिर भी उन्हें निधि का पैसा मिल रहा है.
झालावाड़ पुलिस के खुलासे के बाद पूरे राज्य में सर्वे कराया गया, जिसमें करीब 6 लाख खाते संदिग्ध मिले. इनमें 2 लाख 15 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन एक ही मोबाइल नंबर से हुआ था. जांच में इनमें से 95 फीसदी फर्जी मिले, फिर भी उनके खातों में करीब 200 करोड़ रुपए की राशि जारी कर दी गई. सर्वे में अन्य चार लाख संदिग्ध खातों की जांच हुई, तो उनमें भी 2.10 लाख से ज्यादा फर्जी निकले. इन्हें भी 400 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है. इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बाद अब केंद्र सरकार ने इन छह लाख लोगों की किस्त रोक दी है.
अब संदिग्ध खाताधारकों का फिजिकल वेरिफिकेशन होने के बाद ही पैसा जारी किया जाएगा. केंद्र सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर किसानों के लिए 'किसान आईडी कार्ड' अनिवार्य किए हैं. ये कार्ड उन्हीं के बनेंगे जिनके नाम पर जमीन है. अब इन कार्डों का मिलान लाभार्थियों से किया जाएगा और पात्र पाए जाने पर ही लाभ मिलेगा.
पीएम किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी का यह मामला नया नहीं है. पिछले चार साल से राजस्थान में फर्जीवाड़े की शिकायतें आ रही हैं. राज्य के 15 जिलों में अनियमितताएं मिल चुकी हैं. जयपुर, पाली, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, अलवर, जालोर, जोधपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बाड़मेर और दौसा में अपात्रों को पैसा जारी करने के मामले सामने आए हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनकम टैक्स भरने वालों और मृत लोगों के नाम पर भी पैसा निकाल लिया गया. विधानसभा के बजट सत्र में भी इस भ्रष्टाचार की गूंज सुनाई दी.
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह घोटाला एक हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है. पिछले पांच साल से योजना में सेंधमारी का खेल चल रहा था, लेकिन सिस्टम सोया रहा.
मसलन, अलवर जिले की थानागाजी तहसील में किसानों की कुल आबादी 30 हजार है, लेकिन पिछले चार साल में यहां 76 हजार फर्जी लाभार्थियों को जोड़ दिया गया. जून 2022 में 43 हजार फर्जी लोगों को 29 करोड़ रुपए जारी किए गए. वहीं 2025 में फिर 33 हजार फर्जी किसान बना दिए गए. इनमें से कई लोग राजस्थान के हैं भी नहीं. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और यूपी के लोगों को थानागाजी का किसान बताकर लाभ दिया गया.
इसी तरह पाली जिले की देसूरी और रानी तहसील में 65 हजार फर्जी किसानों को पैसा बांटा गया. मार्च 2025 में दर्ज मामलों के अनुसार, करीब 13 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ऐसे खातों में डाली गई जो न इस क्षेत्र के थे और न ही किसान थे. जालोर जिले में 33,638 अपात्रों को 14 करोड़ रुपए दिए गए. जांच में पता चला कि इनमें से 33,175 लोग दूसरे राज्यों के थे. यानी जालोर के सिर्फ 463 असली किसान ही लाभ पा सके.
केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के तहत हर लाभार्थी को साल में 6 हजार रुपए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए देती है. इसमें दो-दो हजार की तीन किस्तें मिलती हैं. राजस्थान सरकार इसमें 3 हजार रुपए अलग से जोड़ती है, जिससे पात्र किसानों को सालाना 9 हजार रुपए मिलते हैं. नियमतः आवेदन का सत्यापन पटवारी, तहसीलदार या उपखंड अधिकारी कार्यालय द्वारा किया जाता है, जिसके बाद ही राशि खाते में आती है.
फर्जीवाड़े की तह तक जाने वाले पुलिस अधिकारी अमित कुमार कहते हैं, "सरकारी कर्मचारियों की आईडी और पासवर्ड चुराकर अपात्रों को पात्र बनाया जाता है. साइबर अपराधी खुद ही पटवारी या तहसीलदार की आईडी से सत्यापन करते हैं और फिर डेटा कोषागार भेजकर भुगतान करा लेते हैं."
इस पूरे मामले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. यह स्पष्ट है कि तकनीक के दुरुपयोग से कल्याणकारी योजनाओं को बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है. सख्त सत्यापन और जवाबदेही के बिना ऐसे फर्जीवाड़ों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा. अब देखना यह है कि सरकार इस बड़े घोटाले से क्या सबक लेती है और सिस्टम को कितना सुरक्षित बनाती है.