मिटेगी 'बीजू' की छाप; माझी सरकार खत्म करेगी नवीन पटनायक की विरासत!
ओडिशा की मोहन चरण माझी सरकार पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल की 20 योजनाओं को बंद करने जा रही है

साल 2025 में माझी सरकार ने पहले सरकारी बसों से हरे रंग को हटाकर केसरिया रंग में रंग डाला. इसके बाद स्कूली बच्चों के हरे रंग के आईकार्ड को भगवा रंग में तब्दील कर दिया गया. सरकार ने कई योजनाओं के नाम भी बदले. अब मोहन माझी सरकार ने फैसला लिया है कि नवीन पटनायक सरकार की वे योजनाएं बंद कर दी जाएंगी, जो सुस्त गति से चल रही हैं.
सरकार का कहना है कि कई विभागों में ऐसी योजनाएं जारी हैं, जिनका लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा. केवल वही योजनाएं जारी रहेंगी जिनकी पहुंच व्यापक है और जिनका अधिकतम प्रभाव है.
यह कदम बीते 16 से 18 अप्रैल के बीच आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद उठाया गया है. इस दौरान 23 विभागों की योजनाओं का उनके प्रदर्शन, उपयोग और लाभार्थियों तक पहुंच के आधार पर मूल्यांकन किया गया था.
सरकार की योजना है कि पहले आयुष्मान भारत, मिड-डे मील और पीडीएस जैसी केंद्रीय योजनाओं के तहत 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जाए.
योजनाएं, जिन्हें किया जा सकता है बंद
सूत्रों के अनुसार, करीब 20 से ज्यादा योजनाएं सरकार की समीक्षा सूची में हैं. इनमें से कई योजनाएं पूरी तरह से फंड के अभाव में रुकी हुई हैं. फिलहाल बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना (BSKY) के तहत राज्य के कमजोर परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जाता है. महिला सदस्यों के लिए यह कवरेज 10 लाख रुपए तक है. अब इसे केंद्र की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ लागू करने की तैयारी है, जिसकी शुरुआत साल 2025 के प्रारंभ में हो चुकी है.
'अमा ओडिशा, नवीन ओडिशा' योजना का नाम बदलकर 'विकसित गांव, विकसित ओडिशा' कर दिया गया है. कालिया योजना (KALIA - Krushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation) में काफी संशोधन किया जा चुका है. कुछ मामलों में इसे केंद्र की पीएम-किसान योजना के साथ जोड़ा जा रहा है या उसी के तहत रि-ब्रांड किया जा रहा है.
'मो स्कूल अभियान' (Mo School Abhiyan) का नाम बदलकर 'पंचसखा शिक्षा सेतु' कर दिया गया है, ताकि स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा सुधार पर अधिक ध्यान दिया जा सके. बीजू पक्का घर योजना को केंद्रीय आवास योजनाओं के साथ जोड़कर या उसमें समाहित कर दिया गया है, ताकि "बीजू" ब्रांडिंग को हटाया जा सके.
इसके अलावा बीजू सेतु योजना, बीजू युवा सशक्तिकरण योजना और बीजू शिशु सुरक्षा योजना समेत "बीजू" नाम वाली कई योजनाओं को बंद कर दिया गया है. इन्हें अब तटस्थ नामों या "मुख्यमंत्री" शीर्षक के साथ चलाया जा रहा है. साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल ब्याज-मुक्त अग्रिम योजना को 1 अप्रैल 2026 से बंद कर दिया गया है. इस योजना के तहत कर्मचारियों को ईवी खरीदने के लिए बिना ब्याज अग्रिम राशि दी जा रही थी.
उद्योग, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री संपद सवाईं का कहना है, "सरकार के स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि जिन योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड नहीं है, उन्हें जारी रखना संभव नहीं है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी सभी योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें और यह बताएं कि कौन-सी योजनाएं वास्तव में जमीन पर काम कर रही हैं और कौन-सी केवल कागजों तक सीमित हैं. रिपोर्ट के आधार पर सरकार अंतिम निर्णय लेगी और जो योजनाएं बेअसर साबित हो रही हैं, उन्हें बंद कर दिया जाएगा."
हालांकि, इस पूरे मामले पर बीजू जनता दल (BJD) के किसी नेता की अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. इस बीच सभी विभागों के सचिव अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं. सभी को अब उस सरकारी सूची का इंतजार है, जिससे पता चलेगा कि किन-किन योजनाओं को बंद किया जाएगा.