कंधे पर कंकाल और साइकिल पर लाश : ओडिशा में न्याय की यह कैसी गुहार?

बीते महीने ओडिशा के क्योंझर जिले में एक व्यक्ति अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा था तो इसी हफ्ते बालासोर में एक व्यक्ति अपनी बहन की लाश लेकर थाने पहुंचा

Odisha a man carrying dead body of his sister
बालासोर में एक व्यक्ति अपनी बहन की लाश लेकर पुलिस थाने पहुंचा

ओडिशा में बीते दस दिनों में दो ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिससे राज्य में न्याय और उसकी आम लोगों तक पहुंच पर सवाल खड़े हो रहे हैं. बीते 10 मई को बालासोर के 47 वर्षीय एक व्यक्ति अपनी बहन के शव को साइकिल पर रखकर करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए खैरा थाना पहुंच गया.

वहां उसने पुलिस पर अपनी बहन की हत्या के तीन दिन बाद भी मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने का आरोप लगाया. सुरेंद्र सेठी ने अपनी बहन कमला सेठी (45) के शव के साथ थाने के सामने करीब छह से सात घंटे तक प्रदर्शन किया (सबसे ऊपर फोटो).

स्थानीय लोगों के मुताबिक 10 मई को कमला और उनकी भाभी शकुंतला पर घर की सीमा विवाद को लेकर पड़ोसियों ने हमला किया था.

सुरेंद्र ने अगले दिन FIR दर्ज कराते हुए पड़ोसी भारत जेना, उसकी पत्नी भारती और बेटे मानस का नाम शिकायत में शामिल किया था. रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और भारती को हिरासत में लिया. हालांकि सुरेंद्र का आरोप है कि हत्या में कथित संलिप्तता के बावजूद मुख्य आरोपी मानस और भारत को गिरफ्तार नहीं किया गया. पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल ने कमला का शव सुरेंद्र को सौंप दिया. हालांकि वे 11 मई को अंतिम संस्कार के लिए शव को घर ले गए लेकिन बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी तक उन्होंने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया.

पुलिस की निष्क्रियता के विरोध में सुरेंद्र 12 मई को सुबह अपनी बहन के शव को साइकिल पर बांधकर खैरा थाने पहुंच गए और भारत व मानस की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे. सुरेंद्र ने आरोप लगाया, "मुझे मजबूर होकर अपनी बहन का शव थाने लाना पड़ा क्योंकि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया. पुलिस और आरोपियों के बीच सांठगांठ है. यहां तक कि मामला भी देर से दर्ज किया गया. न्याय पाने के लिए मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था."

जीतू मुंडा अपनी बहन के कंकाल के साथ

इससे पहले बीते 27 अप्रैल को क्योंझर जिले के जीतू मुंडा अपनी बहन के कंकाल को लेकर बैंक पहुंच गए. वहां वे अपनी बहन की मृत्यु के पश्चात, बहन के बैंक खाते में जमा पैसे निकालने का प्रयास बीते तीन महीने से कर रहे थे. लेकिन बैंक उनसे उनकी बहन की मृत्यु से संबंधित सबूत मांग रहा था. 

मृत्यु प्रमाण पत्र और बैंकिंग नियमों की जानकारी न होने की वजह से उन्होंने अपनी बहन की कब्र से शव को खोदकर कंकाल निकाला और फिर उसे कंधे पर लादकर कुल 3.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर सीधे बैंक पहुंच गए. इस मामले ने देशभर का ध्यान खींचा था.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है कि लोग न्याय पाने के लिए ऐसे कदम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं. ओडिशा हाईकोर्ट की वकील शर्मिष्ठा नाथ कहती हैं, "ओडिशा ही नहीं, देशभर का यही हाल है. सरकार की इस बात में रुचि नहीं है कि लोगों को न्याय मिले. अभी नीट पेपर लीक हो गया, क्या सरकार की रुचि इस बात में है कि बच्चों को न्याय मिले? जीतू मुंडा डेड बॉडी लेकर पहुंच गए, इसलिए लोगों का ध्यान गया. पूर्व की सरकार को मैं क्लीन चिट नहीं दे रही, लेकिन वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली बेहद खराब है. जीतू मुंडा जैसे लाखों केस हैं. लोगों को सरकारी व्यवस्था में हर दिन शोषण का सामना करना पड़ता है."

ऐसी घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री की यह सलाह कि अधिकारी ‘अधिक संवेदनशील’ बनें, शासन की उसी पुरानी प्रवृत्ति को दिखाती है जिसमें संस्थागत सुधार की जगह नैतिक उपदेश दिए जाते हैं. संवेदनशीलता आवश्यक जरूर है, लेकिन वह कोई नीतिगत औजार नहीं है. व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि एक उदासीन अधिकारी भी किसी जरूरतमंद को सेवा देने से इनकार न कर सके. शासन व्यक्तियों की दया पर नहीं बल्कि भरोसेमंद और सुलभ प्रक्रियाओं पर आधारित होना चाहिए.

कानून-प्रशासन की बदतर हालत

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा ने 2024 में देश में हिंसक अपराधों की दर में शीर्ष स्थान हासिल किया है और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा में प्रति लाख आबादी पर 161.6 लोग हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे हिंसक अपराधों के शिकार हुए जो देश में सबसे अधिक है. साल 2024 में राज्य में कुल 75,403 हिंसक अपराध दर्ज किए गए, जिससे ओडिशा इस श्रेणी में बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद चौथे स्थान पर रहा.

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई. साल 2023 में 25,914 मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या बढ़कर 27,449 हो गई. महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 118.3 प्रति लाख महिला आबादी रही जो तेलंगाना के बाद देश में दूसरी सबसे अधिक है. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में महिलाओं को निर्वस्त्र करने की नीयत से हमले के 1,978 मामले दर्ज कर ओडिशा देश में पहले स्थान पर रहा.

महिलाओं की मर्यादा भंग करने के मामलों में भी राज्य दूसरे स्थान पर रहा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2022 से 2024 के बीच ओडिशा में हिंसक अपराधों में तेज वृद्धि हुई है जिसे लेकर कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

इससे पहले बीते 25 मार्च को मोहन माझी सरकार ने विधानसभा के भीतर राज्य में हो रही आपराधिक घटनाओं को लेकर एक श्वेत पत्र जारी किया था. इसके मुताबिक ओडिशा में वर्ष 2025 के दौरान कुल 2,29,881 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए. इनमें प्रतिदिन औसतन आठ से अधिक रेप और चार हत्याएं हुईं. रिपोर्ट के अनुसार, पूरे वर्ष में 1,304 हत्या, 353 डकैती, 1,802 लूट और 6,282 सेंधमारी के मामले दर्ज हुए. इसके अलावा 6,053 धोखाधड़ी और 1,095 दंगे के मामले भी सामने आए. इस दौरान बलात्कार के 2,994 मामले सामने आए.

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