ओडिशा में क्यों पीटे जा रहे हैं जनगणना करने वाले कर्मचारी?
जनगणना कर्मियों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आने के बाद ओडिशा सरकार ने एक SOP जारी की है

ओडिशा में जनगणना 2027 का पहला चरण 16 अप्रैल से शुरू हुआ है और 15 मई तक चलेगा. जनगणना कर्मी और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और संपत्तियों से संबंधित जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं. भीषण गर्मी में इस मुश्किल काम को करते हुए उन्हें एक और बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. लोग उन्हें शक की निगाह से देख रहे हैं और कहीं-कहीं तो आक्रामक भी हो जा रहे हैं.
इसी कड़ी में बीते 22 अप्रैल को खुर्दा जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई. यहां ड्यूटी के दौरान एक महिला जनगणना कर्मी को धमकी और गाली-गलौज का सामना करना पड़ा. यह घटना टांगी इलाके की है, जहां एक युवक ने खुद को सरकारी अधिकारी बताने के बावजूद महिला गणनाकर्ता पर कथित रूप से डंडे से हमला करने की कोशिश की.
पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद टांगी बीडीओ रूमाना जाफिरिन और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. प्रशासन और स्थानीय अधिकारी आरोपी के घर पहुंचे. बाद में संबंधित युवक ने माफी मांग ली.
खुर्दा के बाद 22 अप्रैल को ही ढेंकनाल जिले के कामाख्यानगर में कम से कम चार अधिकारियों, जिनमें दो महिलाएं शामिल थीं, उन पर उस समय शारीरिक हमला किया गया जब वे एक व्यक्ति के घर जनगणना करने पहुंचे. उनके वाहन में तोड़फोड़ की गई. अधिकारियों पर हमले के आरोप में तीन लोगों, एक पिता और उसके दो बेटों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
हमला कर रहे लोगों को डर है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा. ऐसे में वे जनगणना में सहयोग तो नहीं ही कर रहे हैं, उल्टे कर्मियों पर हमला कर रहे हैं. इन लगातार हो रही घटनाओं ने चल रही जनगणना प्रक्रिया में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर गणनाकर्ताओं पर इतनी आक्रामकता क्यों दिखाई जा रही है, जबकि वे केवल सरकारी ड्यूटी निभा रहे हैं. यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि लोगों में व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को लेकर हिचकिचाहट या डर ऐसी झड़पों की वजह हो सकती है.
यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएं भी जनगणना कार्य में लगी हुई हैं. कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने अब फील्ड विजिट के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है.
मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी हुई
ऐसी घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने SOP लागू की है. अब पुलिस सुरक्षा के घेरे में ये जनगणनाकर्मी लोगों के घर जाएंगे और डेटा कलेक्ट करेंगे. अब उन्हें टीम बनाकर घरों में जाने के लिए कहा गया है. साथ ही किसी गांव जाने पर स्थानीय प्रतिनिधियों या राजनीतिक लोगों से पहले संपर्क स्थापित करने और फिर उनसे सहयोग लेने के लिए भी कहा गया है.
सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों (SP) और नगर निगम आयुक्तों को लिखे पत्र में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद पाढ़ी ने कहा, "पिछले कुछ दिनों में कुछ अप्रिय घटनाएं सामने आई हैं, जिससे जनगणना कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है और जनगणना कार्य प्रभावित हुआ है."
SOP में कहा गया है कि गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक हर समय अपना आधिकारिक पहचान पत्र पहनें और फील्ड ड्यूटी के दौरान नियुक्ति पत्र साथ रखें. उन्हें दोपहर की तेज गर्मी के समय काम करने से बचना चाहिए और डिहाइड्रेशन व लू से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. जहां संभव हो, ओआरएस उपलब्ध कराया जाए या साथ रखा जाए. जिला प्रशासन भी ओआरएस उपलब्ध करा सकता है.
SOP में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि सुनसान या संवेदनशील इलाकों में गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक टीम या जोड़ी में काम करें, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. पर्यवेक्षकों को हर घंटे गणनाकर्ताओं की स्थिति की जानकारी लेनी होगी, ताकि जनगणना कार्य की प्रगति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर नजर रखी जा सके.
पुलिस निगरानी में होगी जनगणना
कठिन परिस्थितियों से निपटने के संबंध में SOP में कहा गया है, "अगर किसी प्रकार की हिंसा या खतरे की आशंका हो, तो गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक तुरंत वहां से हट जाएं और किसी भी तरह के टकराव से बचें. वे उस घर या इलाके को छोड़ सकते हैं और बाद में सुरक्षा के साथ दोबारा जा सकते हैं. ऐसी घटनाओं की तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाए."
उन्हें पुलिस अधिकारियों के साथ भी लगातार संपर्क में रहना होगा. गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के नाम और संपर्क विवरण संबंधित थाने को दिए जाएंगे. सभी को नजदीकी पुलिस स्टेशन के संपर्क नंबर उपलब्ध कराए जाएंगे. जिला प्रशासन संबंधित थानों को गणनाकर्ताओं की आवाजाही का कार्यक्रम भी साझा करेगा, ताकि निगरानी रखी जा सके.
SOP के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों में एक पुलिसकर्मी गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के साथ तैनात किया जा सकता है. संबंधित अधिकारी ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे. साथ ही, स्थानीय समुदाय के नेताओं से संपर्क कर उनका सहयोग और उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है.
इसके अलावा जो कोई भी जनगणना कर्मियों को उनके सरकारी काम में बाधा पहुंचाएगा या रोड़े अटकाएगा, उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम 1948 (संशोधित) के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके मुताबिक ऐसे अपराधों में जुर्माना या तीन साल तक की जेल हो सकती है.