ओडिशा में BJD-कांग्रेस का उम्मीदवार राज्यसभा की ‘जीती’ हुई सीट कैसे हारा?

ओडिशा से राज्यसभा की चौथी सीट जीतने के लिए BJD-कांग्रेस के पास कागजों पर तो पर्याप्त समर्थन था लेकिन वोटिंग के समय बाजी पलट गई

Odisha Chief Minister Naveen Patnaik
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (फाइल फोटो)

ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में दो सीटें BJP के खाते में गई हैं, जिसके मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को जीत मिली है. वहीं बीजू जनता दल (BJD) से पूर्व सीएम नवीन पटनायक के राजनीतिक सचिव संतृप्त मिश्रा की जीत हुई है. 

चौथी सीट पर बहुमत होने के बावजूद विपक्ष के साझा उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता को हार मिली है. मिली जानकारी के मुताबिक, BJP के दोनों उम्मीदवारों को प्रथम वरीयता वाले 35-35 वोट मिले, जबकि BJD के उम्मीदवार को 31 वोट मिले. वहीं दिलीप राय को प्रथम वरीयता वाले 34 वोट मिले हैं. जाहिर है, BJD और कांग्रेस, दोनों दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है.

अभी तक मिली खबरों के मुताबिक BJD के चक्रमणी कन्हार, सौभिक बिस्वाल, देवी रंजन त्रिपाठी और सुभाषिनी जेना ने पार्टी लाइन से इतर जाकर विपक्षी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोट किया. वहीं कांग्रेस के पोलिंग एजेंट और प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास के मुताबिक, कांग्रेस से सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथी गमांग ने क्रॉस वोट किया है.

ओडिशा में असली लड़ाई चौथी सीट की थी, जिसके लिए किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था. इस सीट पर पहले तो BJD ने राज्य के प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया, जिसे कांग्रेस ने समर्थन दिया. उनकी घोषणा के तत्काल बाद BJP नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और होटल व्यवसायी दिलीप राय ने बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी, जिसे BJP ने समर्थन दे दिया था.

ओडिशा विधानसभा के 147 सदस्यों में BJP के पास 79 विधायक थे और तीन निर्दलीयों का उन्हें समर्थन प्राप्त था. उसके पास कुल 82 विधायकों का वोट था. जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 30 प्रथम वरीयता के वोट चाहिए थे. ऐसे में दो सीटें जीतना BJP के लिए तय माना जा रहा था. हालांकि, इसके बाद भी उसके पास 22 वोट शेष थे, जो तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए बहुमत से आठ कम थे. यहीं पर BJP ने दांव खेला और दिलीप राय को समर्थन देकर खेल को रोमांचक मोड़ पर ला खड़ा किया.

दूसरी ओर, BJD के पास विधानसभा में 50 विधायक थे, लेकिन दो विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किए जाने के बाद प्रभावी संख्या घटकर 48 रह गई थी. यानी उसकी भी एक सीट पक्की थी. दूसरी सीट पर उम्मीदवार जिताने के लिए उसके पास 18 वोट थे. तभी 14 सदस्यों वाली कांग्रेस और एक सदस्य वाली सीपीआई (एम) ने BJD समर्थित उम्मीदवार को अपना समर्थन दे दिया. अब BJD समर्थित प्रत्याशी के पास कुल 33 वोट थे, यानी जरूरत से तीन ज्यादा.

इस बीच दिलीप राय की राजनीतिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यह भी तय माना जा रहा था कि BJD के निलंबित दोनों विधायकों का समर्थन उन्हें ही मिलेगा. ऐसे में BJD और कांग्रेस में सेंधमारी कर मात्र छह वोटों का इंतजाम करना था. 
दावा किया जा रहा है कि दिलीप राय के कंधे पर बंदूक रखकर BJP ने दोनों विपक्षी दलों के नाराज विधायकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया. यह अभियान सफल रहा, जिसने BJD पर नवीन पटनायक की ढीली होती पकड़ की कलई खोलकर रख दी. कांग्रेस के साथ भी कुछ ऐसा ही रहा. हालांकि, दोनों दलों को इस बात का अंदाजा मतदान से एक दिन पहले ही लग गया था. यही वजह थी कि बीते रविवार यानी 15 मार्च को BJD ने अपने चार और कांग्रेस ने अपने एक विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

किसने क्या कहा

एक सीट पर मिली हार ने BJD में बंद दरवाजे के अंदर चल रहे संघर्ष को उजागर कर दिया है. हर दिन कुछ ऐसा हो रहा है जिससे साबित होता है कि पार्टी पर नवीन पटनायक की पकड़ ढीली होती जा रही है. परिणाम आने के बाद पूर्व सीएम काफी गुस्से में नजर आए. उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने क्रॉस वोट किया है, उनका आपराधिक इतिहास रहा है. ऐसा करने वालों के माता-पिता अतीत में जेल जा चुके हैं."

पटनायक ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, पिछले कुछ दिनों में मैंने BJP और उसके सहयोगियों के बारे में बात की थी. मेरा मतलब उस ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ से था जो वे करेंगे. उन्होंने कई ऐसे लोगों को इकट्ठा किया जिन्होंने उन्हें वोट दिया. मुझे यह कहते हुए शर्म आती है कि उनमें से अधिकांश का आपराधिक अतीत रहा है. आप खुद देख सकते हैं कि उनके माता-पिता में से कितने लोग जेल गए या कितनों को जेल का डर दिखाया गया."

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास भी निराश नजर आए. उन्होंने कहा, "तीन विधायकों ने BJP समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला. इनके नाम रमेश जेना, दशरथी गमांग और सोफिया फिरदौस हैं. मैं सोच रहा था कि सोफिया बहुत विद्वान हैं और अपने भविष्य को देखेंगी. इस बीच उन्होंने बहुत से बयान दिए, जिन्हें मैंने नजरअंदाज कर दिया था ताकि उनके भविष्य पर आंच न आए. वे सेक्युलर पॉलिटिक्स करती आई हैं. माइनॉरिटी कम्युनिटी में उनकी तरह का व्यक्तित्व दुर्लभ है. दल के लिए और उनके खुद के लिए एक अच्छा भविष्य है. हम उनके पिता पर कार्रवाई करने के बाद भी उन पर भरोसा कर रहे थे."

वह आगे कहते हैं, "जहाँ तक बात रमेश जेना की है, तो उन्होंने भी पार्टी लाइन पर ही वोट देने की बात कही थी. वे मेरे घर आए, खाना खाया और मीडिया के सामने भी इसी बात को दोहराया. जितने लोगों ने मुझसे कहा था कि रमेश जेना ऐसा कर सकते हैं, मैंने उन पर विश्वास नहीं किया था. उन्होंने कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा को पूरी तरह खत्म कर दिया."

इधर, कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को वोट नहीं देंगी, इसका अंदाजा पहले से था. क्योंकि बीते साल दिसंबर माह में पूर्व कांग्रेस नेता और उनके पिता मोहम्मद मुकीम को पार्टी ने निकाल दिया था. 14 मार्च को यह बात और पुख्ता हो गई थी. उन्होंने कहा, "राज्यसभा कैंडिडेट के बारे में हमसे कोई परामर्श नहीं लिया गया था, जबकि वोट हमें ही करना था. जो कैंडिडेट हैं, वे BJD के कैंडिडेट हैं. पहले उन्होंने घोषणा की, तब कांग्रेस ने सपोर्ट किया."

वे आगे कहती हैं, "हमें पता है कि आज अगर कांग्रेस इस स्थिति में है, तो उसकी वजह केवल BJD है. उसने हमेशा लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक BJP को ही समर्थन दिया है. BJD ने कांग्रेस के लोगों को राज्यभर में अपमानित किया है. ऐसे में उनसे जुड़ने का कोई मतलब नहीं था. स्वतंत्र उम्मीदवार वैसा होता जिसकी घोषणा दोनों दलों ने मिलकर एक साथ की होती, तो उसमें हमारा सम्मान रहता."

चुनाव नियमों के अनुसार, विधायकों को वोट डालने के बाद अपने चिह्नित बैलेट पेपर को अपनी पार्टी के एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है, अन्यथा उनका वोट अमान्य हो सकता है. BJP की ओर से उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव और कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन को एजेंट बनाया गया था. वहीं BJD के एजेंट प्रताप केशरी देव थे, जबकि कांग्रेस के एजेंट की जिम्मेदारी खुद भक्त चरण दास संभाल रहे थे.

वहीं BJD के निलंबित विधायक सनातन महाकुड़ ने मतदान के बाद पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, "मैंने उसी उम्मीदवार को वोट दिया है जिसके बारे में मुझे लगता है कि वह राज्य के हित में काम करेगा. मुझसे मतदान को लेकर पार्टी की ओर से किसी ने संपर्क नहीं किया था."

उन्होंने आगे कहा, "मुझे BJD की तरफ से कोई पत्र नहीं मिला है. ऐसा कोई नियम नहीं है कि निलंबित सदस्य को व्हिप जारी किया जा सके. पार्टी की ओर से किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया और न ही किसी खास तरीके से वोट देने के लिए कहा. अब मैं पार्टी नेतृत्व से किसी तरह की कृपा पाने की कोशिश भी नहीं करूंगा. मैं BJD के पीछे नहीं भागूंगा."

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