ओडिशा का पहला मेट्रो रेल प्रोजेक्ट करोड़ों खर्च करने के बाद क्यों हुआ रद्द?
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 26 किमी का मेट्रो रेल प्रोजेक्ट चल रहा था और इसकी पूरी लागत करीब 6000 हजार करोड़ रुपए थी

ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर मेट्रो प्रोजेक्ट को पूरी तरह रद्द कर दिया है और DMRC के साथ हुआ एग्रीमेंट भी खत्म कर दिया है. सरकार का कहना है कि प्रोजेक्ट न तो फायदे का था और न ही इसमें पर्याप्त यात्री मिलने की उम्मीद थी.
करीब 26 किमी के इस प्रोजेक्ट की लागत 6,000 करोड़ रुपए से ज्यादा थी, जबकि अब तक करीब 273 करोड़ खर्च हो चुके हैं. अब सरकार मेट्रो की जगह सस्ते और ज्यादा उपयोगी ट्रांसपोर्ट विकल्प जैसे BRTS पर फोकस करेगी.
दरअसल बीते 7 अप्रैल को ओडिशा कैबिनेट की अंतर मंत्रालयी समिति की बैठक हुई. बैठक में भुवनेश्वर मेट्रो रेल परियोजना को उसके वर्तमान स्वरूप में स्थगित कर दिया गया. साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक खर्च किए गए 273.51 करोड़ को मंजूरी दे दी गई. मंत्रिमंडलीय समिति ने कहा कि यह परियोजना नेशनल मेट्रो रेल पॉलिसी 2017 के मानकों पर खरी नहीं उतरती है. समिति का मानना है कि यात्रियों की संख्या कम होगी, ऐसे में परियोजना जारी रहने पर भारी परिचालन घाटा हो सकता है.
इसकी जगह पर भुवनेश्वर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) अब राज्य की ‘सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी ट्रांजिशन प्लान’ के तहत एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी और भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक विशेष उद्देश्य वाहन (SPV) की भूमिका भी निभा सकती है.
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की सियासत तेज हो गई है. BJP और BJD के नेता सीएम को पत्र लिख रहे हैं. दोनों का कहना है कि यह फायदे के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी की जरूरत के लिए मेट्रो बनाई जानी चाहिए. BJD के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, "अगर केंद्र सरकार जयपुर मेट्रो को प्राथमिकता देकर फंड दे सकती है, तो ओडिशा को पीछे क्यों छोड़ा जा रहा है? राज्य सरकार को तुरंत केंद्र-राज्य साझेदारी मॉडल के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को संशोधित प्रस्ताव भेजना चाहिए."
उन्होंने कहा, "ओडिशा की जनता ने BJP को अभूतपूर्व जनादेश दिया है. राज्य में ऐतिहासिक पूर्ण बहुमत की सरकार है. लोकसभा की 21 में से 20 सीटें हैं. ओडिशा से अश्विनी वैष्णव को राज्यसभा और फिर केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया. रेल मंत्री अपने गृह राज्य राजस्थान के लिए मेट्रो परियोजनाओं की घोषणा कर रहे हैं, वहीं ओडिशा की आकांक्षाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है. यह सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास के साथ गहरा विश्वासघात है."
जवाब में BJP प्रवक्ता मनोज महापात्रा ने कहा, "अस्तित्व के संकट का सामना कर रही BJD अब आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है और राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा भी उसी स्थिति में हैं. उन्हें नवीन पटनायक ने संसदीय दल के नेता पद से भी हटा दिया है. इसी कारण वे अपनी स्थिति बचाने के लिए यह नाटक कर रहे हैं. जनता इस नाटक को समझ चुकी है."
हालांकि सस्मित की मांग के समर्थन में BJP के नेता जरूर आगे आए. BJP नेता और भुवनेश्वर की सांसद अपराजिता षाडंगी ने भी सीएम को पत्र लिखकर कहा है कि वे इस पर पुनर्विचार करें. उन्होंने कहा, "मेट्रो रेल परियोजना केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और शहरी विकास का एक बड़ा माध्यम है. प्रोजेक्ट की लागत को लेकर उनका कहना है कि राज्य के खजाने से लगभग 274 करोड़ रुपए पहले ही खर्च किए जा चुके हैं. यदि परियोजना को बंद किया जाता है, तो यह राशि व्यर्थ मानी जा सकती है."
षाडंगी ने चेतावनी दी कि मेट्रो रेल परियोजना को लागू करने में देरी से भविष्य में लागत और बढ़ सकती है, क्योंकि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं में खर्च समय के साथ बढ़ना सामान्य है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सरकारी परियोजनाएं तुरंत लाभ के लिए नहीं होतीं, बल्कि दीर्घकालिक फायदे को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं.
BJD नेता और भुवनेश्वर की मेयर सुलचना दास भी मेट्रो के समर्थन में आगे आईं. उन्होंने कहा, "भुवनेश्वर मेट्रो रेल परियोजना केवल शहर की पहचान के लिए नहीं थी. जब हम अपने आर्थिक क्षेत्र की बात करते हैं और कहते हैं कि ओडिशा एक विकसित राज्य है, तो मेट्रो की जरूरत है. यह 25 शहरों में पहले ही शुरू हो चुकी हैं, फिर हमारे शहर में क्यों नहीं? हमारे शहर में क्या दिक्कत है? यह केवल लोगों की भावनाओं का मामला नहीं है, बल्कि शहर के विकास का सवाल है."
सरकार ने कहा, होल्ड हुआ है, रद्द नहीं
इधर 10 अप्रैल को बढ़ती राजनीतिक बहस के बीच, आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्रा ने कहा कि भुवनेश्वर में प्रस्तावित मेट्रो रेल परियोजना को रद्द नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल अस्थाई रूप से रोक दिया गया है.
उन्होंने कहा, "यह परियोजना अभी भी मुख्यमंत्री के विचाराधीन है और अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. भुवनेश्वर मेट्रो कॉर्पोरेशन का कार्यालय अभी भी काम कर रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि परियोजना को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है. सरकार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और कोई भी निर्णय उनके हित में ही लिया जाएगा. पूर्व की BJD सरकार ने जमीनी हकीकत का सही आकलन किए बिना मेट्रो परियोजना की घोषणा कर दी थी."
महापात्रा ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में मेट्रो परियोजना का कोई भी विकास केंद्र सरकार के सहयोग से किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई और यह भी पुष्टि नहीं की कि परियोजना आखिरकार लागू होगी या नहीं. इन सबके बीच स्पष्ट बयान की कमी के कारण भुवनेश्वर में मेट्रो रेल परियोजना के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.