मोहन माझी सरकार कैसे आ गई RSS के मजदूर संगठन के निशाने पर!
ओडिशा की बिजली वितरण कंपनियों में एक साथ हजारों लोगों की छंटनी के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आनुषंगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने आंदोलन छेड़ने की धमकी दी है

ओडिशा की चार बिजली वितरण कंपनियों में लगभग 15,000 ठेका और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई है. ये चार कंपनियां टाटा पावर सेंट्रल ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, टाटा पावर वेस्टर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, टाटा पावर सदर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और टाटा पावर नॉर्दर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड हैं.
BJP शासित ओडिशा में इस छंटनी के खिलाफ पार्टी के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ (BMS) सड़क पर उतर आया है. BMS ने मुख्यमंत्री मोहन माझी को चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन कर्मचारियों को वापस काम पर नहीं बुलाया तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा.
इस संबंध में सरकार और BMS के बीच 24 मई को बातचीत भी हुई, जिसमें सरकार की तरफ से राज्य उप-मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री कनकवर्धन सिंह देव शामिल हुए थे. बातचीत विफल होने के बाद BMS के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र कुमार पांडेय ने सीएम मोहन माझी को एक लंबा पत्र लिखा. इसमें उन्होंने कहा कि संगठन राज्य के स्थानीय श्रमिकों के खुलेआम शोषण और बेदखली का मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता. अगर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो राज्यभर में अनिश्चितकालीन आंदोलन को और तेज किया जाएगा. पत्र में कहा गया, “नियोक्ताओं की पूरी उदासीनता और 24 मई को हुई आधिकारिक बातचीत की विफलता ने श्रमिक वर्ग में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है.”
पत्र में यह भी कहा गया है कि 18 मई 2026 से ओडिशा विधानसभा के सामने शुरू हुआ सत्याग्रह आंदोलन तेजी से उग्र होता जा रहा है. अगर इसका समाधान नहीं निकाला गया तो इससे पूरे राज्य में व्यापक और अस्थिर औद्योगिक एवं सामाजिक अशांति फैल सकती है, जो ओडिशा के विकास के लिए जरूरी शांतिपूर्ण औद्योगिक माहौल को खतरे में डाल देगी. संगठन अब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय त्रिपक्षीय बैठक बुलाने और कथित अवैध छंटनी रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी करने की मांग कर रहा है.
संगठन ने यह भी मांग की है कि सरकार सभी कर्मचारियों के लिए अलग 'ओडिशा आउटसोर्सिंग मॉडल' तैयार करे, जो कानूनी रूप से नौकरी की सुरक्षा और मानक सेवा शर्तों की गारंटी दे तथा निजी ठेकेदारों या प्रबंधन को मनमानी छंटनी से रोके. BMS ने तर्क दिया, “बड़े पैमाने पर इस छटनी ने ओडिशा के हजारों परिवारों की सामाजिक-आर्थिक संरचना को पूरी तरह तोड़ दिया है. वर्षों तक लगातार सेवा देने वाले श्रमिक अचानक जीविका के किसी भी साधन से वंचित हो गए हैं. यह स्थिति हजारों स्थानीय परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट, अत्यधिक गरीबी और मानसिक आघात की ओर धकेल रही है, जिससे राज्य में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ और टिकाऊ स्थानीय रोजगार की परिकल्पना पूरी तरह विफल हो रही है.”
छंटनी के लिए सरकार और टाटा पावर जिम्मेदार
छंटनी के खिलाफ BMS 18 मई से ही अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहा है. संगठन के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष बादल महाराणा ने कहा है, “सरकार बदलने के बाद भी ओडिशा के लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है और गैर-ओडिया लोगों को भर्ती किया जा रहा है. पिछले दो वर्षों में ओडिशा में 15,000 से अधिक श्रमिकों ने अपनी नौकरी खो दी है. जिसने भी अन्याय के खिलाफ मजदूर हित में आवाज उठाई, उसे नौकरी से निकाल दिया गया है.”
BMS के महामंत्री पृथ्वीराज पांडा ने बताया, “हर बिजली सेक्शन में 600 से 1,000 छोटे-बड़े ट्रांसफार्मर हैं जबकि पेट्रोलिंग गाड़ियां एक-दो ही काम कर रही हैं. कुछ सेक्शन में तो अगर एक बार लाइन कट जाती है तो उसे ठीक होने में एक-दो दिन लग जाते हैं क्योंकि लोग बिजली की समस्या के बारे में बिजली विभाग से शिकायत नहीं कर पा रहे हैं. असलियत यह है कि घनी आबादी वाले सेक्शन में जरूरत के हिसाब से तकनीकी और पढ़े-लिखे कर्मचारियों को रखने के बजाय टाटा पावर कर्मचारियों की छंटनी करके परिवार उजाड़ रही है.”
सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “ठेकेदारों और राजनेताओं को अमीर बनाने की साजिश की जा रही है. बिजली मंत्री का टाटा पावर पर कोई नियंत्रण नहीं है. ओडिशा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन पिछली सरकार के एक भ्रष्ट अधिकारी हैं जो हजारों करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार में शामिल हैं. उनकी वजह से हजारों बिजली आउटसोर्सिंग कर्मचारी आज सड़कों पर हैं.”
BMS का यह भी कहना है कि खदानों से लेकर स्पंज, आयरन, सीमेंट, अस्पताल और बंदरगाहों जैसे क्षेत्रों में वर्षों से ओडिशा के लोग कॉन्ट्रैक्चुअल और आउटसोर्सिंग पर काम करते आ रहे थे. दस साल से अधिक समय तक काम करने वाले मजदूरों को स्थायी नियुक्ति देने के बजाय सरकार छंटनी कर रही है. लोग इस उम्र में क्या करेंगे, कहां जाएंगे. नागरिकों की रक्षा के लिए सरकार बनी है. आधुनिकरण के नाम पर केवल श्रमिक शोषण करना, उन्हें राजनीतिक उद्देश्य के नाम पर निकाल देना, केंद्रीय संगठनों से वार्ता नहीं करना, यह सरकार के अहंकार को दिखाता है.