बीजू पटनायक पर निशिकांत दुबे के बयान ने क्या BJP को फंसा दिया है?

BJP सांसद निशिकांत दुब ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक को जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के बीच की कड़ी बताया था

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संजय राउत पर साधा निशाना.
निशिकांत दुबे (फाइल फोटो)

बीते पांच मार्च को ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक की 110वीं जयंती मनाई गई. मौके पर उनको याद करते हुए राज्य के सीएम मोहन माझी ने कहा था, "बीजू पटनायक एक महान स्वतंत्रता सेनानी, उद्योगपति, दक्ष पायलट और राजनेता थे. उन्होंने ओडिशा के गौरव और देश की गरिमा के लिए लड़ाई लड़ी है. उनके सपनों को हमारी सरकार साकार करेगी. इसके लिए विजन 2036 रखा है. हमने और राज्य की जनता ने उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर रखा है. हम उनके गौरव, सम्मान और प्रतिष्ठा को महसूस करते हैं."

ठीक 22 दिन बाद नेहरू-गांधी परिवार के रास्ते BJP सांसद निशिकांत दुबे ने अब बीजू पटनायक को अगला निशाना बनाया है. दुबे का आरोप है कि बीजू पटनायक तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के बीच एक महत्वपूर्ण लिंक के रूप में काम कर रहे थे. उन्होंने यहां तक कह दिया कि 1962 का भारत-चीन युद्ध अमेरिका के इशारे और उनके पैसों से लड़ा गया था.

गोड्डा सांसद बीते कुछ दिनों से अपने X हैंडल पर कांग्रेस का 'काला अध्याय' लिख रहे हैं. बीते 27 मार्च को उन्होंने लिखा, "अमेरिका का दलाल नेहरू-गांधी परिवार, आज ही के दिन यानी 27 मार्च 1963 को ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक जी अमेरिका पहुंचे थे. सन 1962 का चीन के साथ युद्ध हमने अमेरिका के कहने पर और अमेरिका के पैसे से लड़ा था. दलाई लामा के भाई अमेरिका के साथ संपर्क में थे, 1959 में दलाई लामा अमेरिकी मदद से भारत पहुंचे थे."

वे आगे लिखते हैं, "बीजू पटनायक जी नेहरू जी, अमेरिका/CIA के बीच कड़ी थे. सन 1963-64 में भारत ने अमेरिकी सेना को नंदा देवी में परमाणु परीक्षण हथियार तथा U2 प्लेन के लिए अपना चरबटिया हवाई अड्डा गिरवी रखा. 1955 से लेकर 1962 के सभी चुनावों में अमेरिका/CIA ने कांग्रेस पार्टी को पैसा दिया था. तत्कालीन अमेरिकी राजदूत मोनिहान ने अपनी किताब में तो केरल के चुनाव में श्रीमती इंदिरा गांधी जी को सीधे चुनाव में पैसे देने की बात कही, जिस पर संसद तक में बहस हुई, कमिटी बनी."

उनकी इस टिप्पणी के बाद बीजू जनता दल (BJD) में उबाल है. पार्टी के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने कड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा, "बीजू बाबू के बारे में कही गई इन आपत्तिजनक बातों को सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ. मुझे नहीं लगता कि उन्हें यह पता है कि प्रधानमंत्री नेहरू ने उन्हें, जब वे ओडिशा के मुख्यमंत्री थे, चीनी संघर्ष के दौरान रणनीति बनाने में मदद के लिए दिल्ली में अपने कार्यालय के पास एक अलग ऑफिस दिया था."

नवीन पटनायक आगे जोड़ते हैं, "उस समय मैं लगभग 13 वर्ष का था, लेकिन मुझे याद है कि चीनी हमले को लेकर बीजू बाबू कितने गुस्से में थे और उसे विफल करने के लिए उन्होंने कितना कुछ किया था. मुझे लगता है कि ऐसे आपत्तिजनक बयान देने वाले सांसद (निशिकांत दुबे) को किसी मानसिक डॉक्टर की जरूरत है."

वहीं पार्टी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी की संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा, "बीजू पटनायक जी के खिलाफ लगाए गए घोर आपत्तिजनक, झूठे और गैर-जिम्मेदाराना आरोपों से मैं स्तब्ध और आहत हूं. वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी नेता और इस मिट्टी के सच्चे सपूत थे, जिनका राष्ट्र के प्रति योगदान निर्विवाद है. इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और एक सम्मानित नेता की छवि को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धूमिल करने के ऐसे प्रयास अस्वीकार्य और निंदनीय हैं." BJD के अन्य सांसदों ने भी इसे ओडिशा की अस्मिता पर हमला बताया है. बता दें, आगामी 17 अप्रैल को बीजू पटनायक की 29वीं पुण्यतिथि मनाई जानी है.

BJP की दुविधा

इस पूरे मामले पर प्रदेश BJP ने चुप्पी साध रखी है. नाम न छापने की शर्त पर BJP के दो सांसद और प्रदेश स्तर के चार नेताओं ने साफ माना कि निशिकांत दुबे का बयान घोर आपत्तिजनक है. एक ने कहा, "उस वक्त जो बीजू पटनायक ने किया, वह उस परिस्थिति के अनुसार सही था. इस चर्चा को उठाकर उन्होंने हमें मुश्किल में डाल दिया है."

एक का कहना था इस मामले में BJD को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया गया है. हालांकि इनमें से एक ने यह भी कहा कि फिलहाल तो वे इस मामले पर चुप्पी रखेंगे, अगर आम जनता की तरफ से कुछ प्रतिक्रिया आई, तो फिर प्रदेश संगठन सोचेगा कि क्या बोलना है. 

BJP के एक प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पहले भी कुछ बड़बोले नेताओं को पीएम मोदी ने किनारे किया है. अब निशिकांत दुबे की बारी है. पीएम उनके बारे में सोचेंगे जरूर. BJP नेताओं को यह भी आशंका है कि तत्काल प्रतिक्रिया न देना और चुप्पी साधे रहना, कहीं इसे दुबे के बयान से सहमत मान लेना न समझ लिया जाए. वे एक दुविधा की स्थिति में खुद को पा रहे हैं.

हाल ही में BJP, BJD और कांग्रेस के समर्थन से राज्यसभा के लिए चुने गए दिलीप रे ने जरूर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, "ओडिशा के लोगों के लिए बीजू बाबू गर्व, विरासत, पहचान और सम्मान के प्रतीक हैं. इतिहास, सरकारों या कठिन परिस्थितियों में लिए गए निर्णयों पर बहस हो सकती है, लेकिन किसी को भी बीजू बाबू की राष्ट्रभक्ति, उनकी ईमानदारी या भारत के प्रति उनके अडिग समर्पण पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है. भारत और ओडिशा के लिए उनके असाधारण योगदान को हल्के और सनसनीखेज राजनीतिक बयानों तक सीमित कर देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि भारी अपमानजनक भी है."

निशिकांत दुबे के दावे के इतर, एक दूसरा पक्ष भी है. मई 2025 में रूसी सरकार ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बैटल ऑफ स्टालिनग्राद में बीजू पटनायक को उनकी भूमिका के लिए श्रद्धांजलि दी थी. भारत में रूस के राजदूत डेनिस एलिपोव ने बीजू पटनायक को एक महान व्यक्तित्व, भारत का गौरवशाली सपूत और इंडियन नेशनल एयरवेज का एक साहसी पायलट बताया था, जिन्होंने 1943 में स्टालिनग्राद अभियान में भाग लिया और घिरी हुई रेड आर्मी को हथियारों की आपूर्ति की.

इससे कई दशक पहले इंडोनेशिया ने अपने स्वतंत्रता संग्राम में बीजू पटनायक के साहसिक योगदान के लिए उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था. सन 1947 में उन्होंने एक साहसिक मिशन को अंजाम देते हुए इंडोनेशिया के पहले प्रधानमंत्री सुल्तान साहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हता को डच औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान सुरक्षित रूप से भारत पहुंचाया. इस असाधारण साहस के सम्मान में, 1950 में इंडोनेशिया ने उन्हें 'भूमि पुत्र' की दुर्लभ उपाधि प्रदान की थी. ये दो घटनाएं उन दावों का खंडन करती हैं, जिनमें सांसद निशिकांत दुबे ने CIA के साथ उन्हें जोड़ा था.

इधर बीते 30 मार्च को संसद में BJD के सांसदों ने सत्र का बहिष्कार किया. बाद में संसद परिसर में निशिकांत दुबे ने कहा कि बीजू पटनायक महान स्वतंत्रता सेनानी थे. मैंने तो बस नेहरू परिवार की कारगुजारियों के बारे में बताया था. अगर किसी को दुख पहुंचा है तो मैं बस उन्हें समझाने का काम कर सकता हूं. 

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