NCP में किसकी चलेगी? दिग्गज नेताओं के बीच बढ़ी खींचतान
एक बैठक में दिग्गज नेताओं सुनील तटकरे और छगन भुजबल के बीच हुई नोकझोंक ने अटकलों को और तेज कर दिया है. वहीं पवार परिवार पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता दिख रहा है

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर मतभेद अब चरम पर पहुंचते दिख रहे हैं. 26 मई को मुंबई में हुई पार्टी की एक बैठक में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में दो वरिष्ठ नेताओं के बीच टकराव हो गया.
वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल इस बैठक में मौजूद नहीं थे. इससे पार्टी के भीतर चल रहे टकराव की अटकलें और गहरा गई हैं. माना जा रहा है कि जनवरी में विमान दुर्घटना में अजित पवार की मौत के बाद पवार परिवार पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
इससे पहले मार्च में सुनेत्रा के चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र ने भी हलचल मचा दी थी. इसमें उन्होंने कहा था कि 28 जनवरी से 26 फरवरी के बीच NCP की ओर से चुनाव आयोग को भेजे गए किसी भी पत्राचार को मान्य नहीं माना जाए. यह अवधि उस समय की थी जब उन्होंने पार्टी की कमान संभाली थी. इसे NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और रायगढ़ से लोकसभा सांसद सुनील तटकरे के लिए झटका माना गया. तटकरे महाराष्ट्र में NCP के अध्यक्ष और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं.
कहा जाता है कि पटेल और तटकरे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बताया था कि NCP के संविधान में संशोधन किया गया है और सभी अधिकार अब कार्यकारी अध्यक्ष को सौंप दिए गए हैं. इसे पार्टी संगठन पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश के रूप में देखा गया. अजित पवार के समय पटेल और तटकरे को पार्टी संगठन का प्रभारी माना जाता था.
26 मई की बैठक में पार्टी के मंत्री, विधायक और पदाधिकारी शामिल हुए थे. इसी दौरान तटकरे और महाराष्ट्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के बीच बहस हो गई. बताया जाता है कि तटकरे इस बात से नाराज थे कि जब नेतृत्व की ओर से उन्हें और पटेल को निशाना बनाया जा रहा था तब कोई वरिष्ठ नेता उनके बचाव में सामने नहीं आया.
बैठक में मौजूद दो वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि भुजबल ने तटकरे से कहा कि वे 'सीधे मुद्दे पर आएं' और एक ही बात को बार-बार दोहराना बंद करें. इससे तटकरे नाराज हो गए. इसके बाद सुनेत्रा ने माहौल शांत करने की कोशिश की. उन्होंने पार्टी नेताओं और प्रवक्ताओं से कहा कि वे मीडिया में NCP और उसके नेतृत्व का बचाव करते समय आक्रामक रुख अपनाएं. हालांकि बाद में दोनों नेता एक अन्य पार्टी बैठक में साथ मौजूद रहे.
बताया जाता है कि सुनेत्रा ने इस बात पर नाराजगी जताई कि वित्त विभाग BJP के पास चला गया है. अजित पवार की मृत्यु के समय वे उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री थे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त विभाग अपने पास रखा हुआ है और उन्होंने ही 2026-27 का बजट पेश किया.
भुजबल ने कथित तौर पर जोर दिया कि NCP को 2029 के विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि BJP भी इसी तरह की तैयारी कर रही है.
सूत्रों का कहना है कि सुनेत्रा की अपने बड़े बेटे पार्थ पर बढ़ती निर्भरता ने पार्टी के स्थापित नेतृत्व के एक वर्ग में असहजता पैदा कर दी है. पार्थ राज्यसभा सांसद हैं और NCP में तेजी से उभरते शक्ति केंद्र माने जा रहे हैं. कहा जाता है कि वे अपनी नई टीम बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध मोहिते के बढ़ते प्रभाव ने भी पुराने नेताओं की चिंता बढ़ा दी है. पुणे के बिल्डर और पूर्व BJP राज्यसभा सांसद संजय काकड़े के बेटे विक्रम काकड़े को पुणे स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद में भेजे जाने के फैसले में भी पार्थ की भूमिका मानी जाती है.
मोहिते, वरिष्ठ BJP नेता महादेवराव शिवणकर के निजी सहायक रहे हैं. शिवणकर, मनोहर जोशी के नेतृत्व वाली शिवसेना-BJP सरकार में वित्त मंत्री थे. मोहिते ने शिवसेना के जरिए राजनीति में प्रवेश किया. वे 1999 और 2004 में रामटेक लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे. बाद में वे पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के साथ कांग्रेस में चले गए लेकिन 2007 के उपचुनाव में शिवसेना के प्रकाश जाधव से हार गए.
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री रहे मोहिते 2009 का विधानसभा चुनाव भी रामटेक से हार गए. इसके बाद वे लंबे समय तक राजनीतिक हाशिए पर रहे. बाद में वे मराठा नेता विनायक मेटे की संस्था शिवसंग्राम के राजनीतिक संगठन भारतीय संग्राम परिषद से जुड़े. अजित पवार की मृत्यु से कुछ समय पहले उन्होंने NCP जॉइन की थी. अब कहा जाता है कि वे दिल्ली में पार्टी के कामकाज की जिम्मेदारी तेजी से संभाल रहे हैं और पटेल व तटकरे को पीछे छोड़ रहे हैं.
मोहिते और NCP के महासचिव अविनाश आदिक, जो पूर्व मंत्री गोविंदराव आदिक के बेटे हैं, दोनों को राज्यसभा उपचुनाव के संभावित दावेदारों में माना जा रहा है. सुनेत्रा ने संसद के उच्च सदन में अपनी सीट खाली कर दी थी.
NCP के वरिष्ठ नेतृत्व में दरार की अटकलों को और बल उन खबरों से मिला है, जिनमें एक कथित ऑडियो क्लिप का जिक्र है. इसमें NCP का एक वरिष्ठ नेता कथित तौर पर अजित पवार (जब वे जीवित थे) के साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बारे में आपत्तिजनक बातें करता सुनाई दे रहा है. इसके अलावा पटेल और तटकरे की मुंबई में NCP (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की खबरों ने भी इन अटकलों को और तेज कर दिया है.