ओडिशा में BJP को टक्कर देने के लिए नवीन पटनायक ने क्या रणनीति अपनाई?
नवीन पटनायक कृषि प्रधान ओडिशा के ग्रामीण संकट को BJP शासन से जोड़कर अपनी पार्टी BJD को उसके पारंपरिक आधार (किसानों) से फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं

नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजू जनता दल (BJD) के कार्यकर्ताओं ने पार्टी को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख मोर्चों पर तैयारी शुरू कर दी है. आगामी राज्यसभा चुनाव के अलावा अगले साल की शुरुआत में होने वाले पंचायत चुनावों के लिए पार्टी ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है.
साथ ही पार्टी ने ग्रामीण असंतोष और किसानों के मुद्दों पर BJP सरकार को घेरने की कोशिश शुरू कर दी है. BJD ने हाल ही में राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा की है. ये कदम पार्टी की व्यापक रणनीति को दर्शाते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में अपनी प्रासंगिकता वापस हासिल करना, मजबूत नैरेटिव बनाना और सत्तारूढ़ BJP को चुनौती देना है.
पटनायक और BJD ने अपने जन अभियान को कृषि संकट पर केंद्रित किया है. 24 फरवरी को भुवनेश्वर में विधानसभा के पास एक विशाल किसान रैली (चासी सुरक्षा रैली) का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में पटनायक ने महत्वपूर्ण ग्रामीण मुद्दों को हल न करने की BJP की विफलता को उजागर किया.
रैली को संबोधित करते हुए पटनायक ने कहा कि BJP का बहुचर्चित 'जय किसान' नारा किसानों की वास्तविकताओं से पूरी तरह से दूर हो गया है. उन्होंने कहा कि धान की खरीद में देरी, अनियमित भुगतान और इनपुट की कमी के कारण किसान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
पटनायक ने तर्क दिया कि धान के भुगतान में देरी और उर्वरक वितरण में कमी सरकार की नीतिगत उपेक्षा के कारण हो रहे हैं. उन्होंने इसे पंचायत चुनावों में BJP के लिए राजनीतिक असफलता के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि BJP का नया मकसद 'भागो किसान' प्रतीत होता है.
BJD सक्रिय रूप से अपने शासनकाल की नीतियों की तुलना BJP शासन की स्थिति से कर रही है. पटनायक ने BJD के लंबे शासनकाल के दौरान किसानों की आय और आजीविका को सहारा देने के लिए बनाई गई प्रमुख योजनाओं, जैसे कि कृषि के लिए अलग बजट और कृषक सहायता एवं आजीविका संवर्धन योजना (KALIA) का हवाला दिया. उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे BJP का मूल्यांकन उसके सतही नारों के बजाय ग्रामीण मुद्दों पर उसके कार्यों के आधार पर करें.
BJD ने 2026-27 के राज्य बजट की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि इसमें महत्वाकांक्षा तो अधिक है, लेकिन क्रियान्वयन कमजोर है. पार्टी नेताओं ने दावा किया कि बजट में सरकार के जरिए पेश आंकड़ों और कृषि अर्थव्यवस्था को मिलने वाली वास्तविक राहत के बीच एक बड़ी खाई है.
किसान आंदोलन के साथ ही साथ BJD ने राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह राजनीतिक गतिविधियों को संसदीय प्रभाव में बदलने का इरादा रखती है. पटनायक ने घोषणा की है कि डॉ. संतृप्त मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होता ओडिशा की 4 राज्यसभा सीटों में से दो के लिए पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार होंगे.
BJD के वरिष्ठ नेता और प्रमुख रणनीतिकार मिश्रा, पटनायक के राजनीतिक सचिव के रूप में काम कर चुके हैं और 2024 के लोकसभा चुनावों में कटक से पार्टी के उम्मीदवार थे. डॉ. दत्तेश्वर होता के नामांकन से BJD के प्रतिनिधित्व को एक नया आयाम मिलता दिख रहा है.
राज्य में व्यापक रूप से सम्मानित चिकित्सा पेशेवर डॉ. दत्तेश्वर होता कटक के SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल रह चुके हैं. वह ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के पहले कुलपति भी थे. पटनायक ने डॉ. दत्तेश्वर होता को एक आम उम्मीदवार बताया. साथ ही राज्यसभा चुनाव में अन्य पार्टियों से चुनाव में उनका समर्थन करने की अपील की. इसके जरिए BJD की जीत के लिए उन्होंने क्रॉस-पार्टी सहमति बनाने की कोशिश की है.
इन दोहरे कदमों के पीछे की रणनीति जटिल है. ओडिशा विधानसभा के 147 सदस्यों में से BJD के पास दोनों राज्यसभा सीटों पर अकेले जीत हासिल करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, यहां तक कि एक भी सीट पर निश्चित जीत के लिए भी उसके पास पर्याप्त सीटें नहीं हैं, हालांकि, डॉ. दत्तेश्वर होता को सर्वसम्मति से उम्मीदवार के रूप में पेश करके, वह गणितीय समीकरणों साधने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा होता है तो BJD का राजनीतिक गठबंधन व्यापक होगा.
कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर होता की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. इस तरह ओडिशा में BJP को राज्यसभा चुनाव में चुनौती देने के लिए दोनों पार्टियों के बीच एक असामान्य सहयोग और साथ को दिखाता है. जहां BJD कांग्रेस और वामपंथी दलों को डॉ. दत्तेश्वर होता का समर्थन करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही थी, वहीं झारखंड के कोयला खनन घोटाले में दोषी ठहराए गए पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री दिलीप राय की निर्दलीय उम्मीदवारी ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
राय को BJP का समर्थन प्राप्त है. BJP के पास उन्हें चुनाव जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है, लेकिन अगर राय BJD और कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर जीत सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो यह पटनायक के लिए शर्मनाक होगा.
राज्यसभा के लिए नामांकन ऐसे समय में हुए हैं, जब BJD के भीतर तनाव साफ दिखाई दे रहा है. वरिष्ठ पार्टी सदस्यों के जरिए नामांकन में नजरअंदाज किए जाने पर निराशा व्यक्त करने की खबरें आ रही हैं. हाल ही में एक पूर्व BJD विधायक को उम्मीदवारों के चयन को लेकर नेतृत्व की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.
यह इस बात को दिखाता है कि पटनायक को संगठनात्मक एकता और चुनावी रणनीति के बीच संतुलन बनाए रखने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कुल मिलाकर, BJD का किसान अभियान और राज्यसभा चुनाव रणनीति विपक्ष की नियमित गतिविधियों से परे राजनीतिक प्रासंगिकता स्थापित करने के लिए एक सुनियोजित प्रयास का संकेत देती है.
ग्रामीण आक्रोश को प्रमुखता देकर और इसे सीधे शासन से जोड़कर, पार्टी अपने पारंपरिक आधार से फिर से जुड़ने का प्रयास कर रही है, जो ओडिशा की मुख्य रूप से ग्रामीण राजनीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है. साथ ही, राज्यसभा के लिए किए गए BJD उम्मीदवार के नामांकन से इस बात का संकेत मिलता है कि पटनायक का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत रूप से प्रतिस्पर्धा करना भी है.
पंचायत चुनावों के लिए, किसानों की आवाज की गूंज और राज्यसभा चुनाव के परिणाम ओडिशा में BJP सरकार के लिए मुश्किल खड़े कर सकते हैं. अगर पार्टी जमीनी स्तर पर लामबंदी को संसदीय प्रभाव में बदलने में सफल होती है, तो वह इस दावे को मजबूत कर सकती है कि BJD राजनीतिक तौर पर लोगों के बीच अब भी प्रासंगिक बनी हुई है.