कभी इंदिरा गांधी के सुरक्षा प्रमुख रहे लालदुहोमा, अब बन सकते हैं मिजोरम के मुख्यमंत्री
MNF के सबसे बड़े नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री जोरामथांगा भी आईजोल ईस्ट- I सीट से चुनाव हार गए हैं

मिजोरम के विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो गए हैं. इस 'चुनावी रण' में केवल पांच साल पुरानी पार्टी जोराम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी (ZPM) ने लगभग 64 साल पुरानी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को राज्य की सत्ता से बाहर कर दिया है. ZPM ने राज्य की 40 सीटों में से 27 पर जीत हासिल की है.
वहीं मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के लिए यह नतीजे बेहद निराशा भरे साबित हुए. पार्टी को केवल 10 सीटें ही मिल पाई. इसके अलावा बीजेपी ने भी दो सीटों पर कब्जा जमाया है. कांग्रेस ने भी यहां पर एक सीट पर जीत हासिल की है. ZPM ने यह चुनाव प्रसाशनिक अधिकारी से नेता बने लालदुहोमा के नेतृत्व में लड़ा और जीता भी.
अब मिजोरम की कमान भी इन्हीं के हाथों में जा सकती है. मिजोरम के शुरुआती चुनावी रुझानों को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि राज्य की जनता ने मिजो नेशनल फ्रंट को लगभग पूरी तरह से नकार सा दिया. यहां तक कि पार्टी के सबसे बड़े नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री जोरामथांगा भी आईजोल ईस्ट- I सीट से चुनाव हार गए हैं. वहीं राज्य के स्वास्थ मंत्री डॉ. लालथंगलियाना अपनी साउथ तुईपुई सीट से हार गए हैं.
केवल पांच साल पुरानी पार्टी है ZPM
मिजोरम के विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को बड़े अंतर से हराने वाली जोराम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी (ZPM) का उदय केवल पांच साल पहले ही हुआ था. चुनाव आयोग ने साल 2019 में ही इस पार्टी को मान्यता दी थी. यहां तक कि कई सारे एग्जिट पोल में भी इस पार्टी की चर्चा थी. इंडिया टुडे माई एक्सिस पोल के मुताबिक विधानसभा चुनावों में इस पार्टी को बहुमत मिलता हुआ दिख रहा था. इस पार्टी को लालदुहोमा ने स्थापित किया था. लालदुहोमा 1977 बैच के IPS अधिकारी भी रह चुके हैं. इसके अलावा वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सिक्योरिटी इंचार्ज भी रह चुके हैं. साल 1984 मे इन्होंने पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और सांसद बने थे. साल 2018 के चुनाव में इन्होंने निर्दलीय लड़ते हुए ही तत्कालीन सीएम लालथनहलवा को हराया था.
क्या रही MNF के हार की वजह
मिजोरम के चुनावों में MNF के हार की सबसे बड़ी वजह खुद सीएम जोरामथांगा को ही माना जा रहा है. मिजोरम में पिछले कई दिनों से सत्ता विरोधी भावनाएं देखी जा रही थीं. इसके अलावा पार्टी पर लगातार भ्रष्टाचार का आरोप भी लगता रहा. हालांकि सीएम जोरामथांगा इस पर ध्यान देने के बजाय अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे थे. खुद जोरामथांगा पर भी आय से अधिक संपत्ति और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा था जिसके लिए उनको कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा. मिजोरम के दो नागरिक संगठनों पीपुल्स राइट टू इंफॉर्मेशन एंड डेवलपमेंट इंप्लीमेंटिंग सोसाइटी ऑफ मिजोरम (PRISM) और मिजोरम उप पावल ने सीएम पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था.
MNF भाजपा के नेतृत्व वाली NDA का भी हिस्सा है. हालांकि इन दोनों के बीच का विवाद काफी खुल कर सामने आता रहा है. नवंबर 2023 में, एमएनएफ के अध्यक्ष जोरमथांगा ने कहा था कि राज्य सरकार और उनकी पार्टी केंद्र में एनडीए सरकार के दबाव के आगे नहीं झुकेगी. पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एमएनएफ एनडीए गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि बड़े गठबंधन की नीतियों और उद्देश्यों के साथ तालमेल बने ही. साथ ही जोरामथांगा म्यांमार शरणार्थियों के मुद्दे पर भी केंद्र से असमहत नजर आए थे. उन्होंने विकास के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया लेकिन यह साफ करते हुए कि वे मिजो और धार्मिक मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेंगे. अक्टूबर 2023 में उन्होंने पीएम मोदी की मिजोरम यात्रा के दौरान मंच साझा करने से भी मना कर दिया था.