मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र में चूक थी या नियमों का मनमाना इस्तेमाल हुआ?
कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को 'लोकतंत्र की हत्या' बताया है और इसे कानूनी चुनौती देने की बात कही है

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तारीख 18 जून तय की गई है. लेकिन इससे पहले भोपाल में एक विवादास्पद राजनीतिक घटनाक्रम के तहत 9 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र रद्द कर दिया. इसके बाद BJP के एक उम्मीदवार का निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित हो गया.
कांग्रेस ने कहा है कि वह नामांकन रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील करेगी. वहीं BJP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे कांग्रेस की अंदरूनी कलह का परिणाम बताया. नामांकन रद्द होने से पहले के तीन दिनों में राजनीतिक हलचल तेज रही. मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना था. विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से इनमें से दो सीटें BJP और एक सीट कांग्रेस के खाते में जानी थीं.
BJP ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया था. वहीं कांग्रेस ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था.
8 जून को BJP ने घोषणा की कि वह तीसरे उम्मीदवार के रूप में मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केशव केवट को भी चुनाव मैदान में उतारेगी. जबकि पार्टी के पास यह सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी. माना जा रहा था कि रणनीति संभावित क्रॉस वोटिंग की थी.
इससे चिंतित कांग्रेस ने अपने विधायकों को पार्टी शासित कर्नाटक के बेंगलुरु भेजने का फैसला किया. भोपाल में एक चार्टर्ड विमान पहुंचा और विधायक उसमें सवार होकर बेंगलुरु के लिए रवाना हुए. लेकिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की खबर मिलने के बाद वे जल्द ही लौट आए.
लेकिन नामांकन खारिज होने के पीछे क्या कारण बताए जा रहे हैं? दरअसल 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच के दिन विधानसभा के प्रमुख सचिव और राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने नटराजन को एक नोटिस जारी किया. नोटिस में हैदराबाद में चल रहे एक अदालती मामले का उल्लेख था जिसका जिक्र कथित तौर पर उनके नामांकन पत्र में नहीं किया गया था. BJP ने अपनी शिकायत में इसी मामले को उठाया था.
रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन से 9 जून की शाम तक नोटिस का जवाब देने को कहा. कांग्रेस की ओर से पेश वकीलों ने अधिकारी से कहा कि यह मामला अभी FIR के स्तर तक नहीं पहुंचा है. इसलिए इसका उल्लेख नामांकन पत्र में करना आवश्यक नहीं था.
अक्टूबर 2025 में हैदराबाद की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक निजी शिकायत (नंबर 4472/2025) दायर की गई थी, जिसमें मुआवजे का दावा किया गया था. नटराजन ने अदालत के नोटिस का जवाब भी दिया था. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 (मानहानि) समेत अन्य धाराएं शामिल हैं.
रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि उक्त धारा में दो साल तक की सजा का प्रावधान है. नामांकन रद्द करते हुए अधिकारी ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने हलफनामे में इस मामले की जानकारी छिपाई जबकि उन्हें इस मामले में नोटिस जारी किया जा चुका था.
रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले BJP के तीनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच की और उसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार के कागजात देखे. BJP उम्मीदवारों के नामांकन की जांच के दौरान कांग्रेस समेत किसी ने कोई आपत्ति नहीं उठाई. लेकिन जैसे ही नटराजन के नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई, BJP नेताओं ने अदालत के मामले का उल्लेख न किए जाने पर आपत्ति दर्ज करा दी.
कांग्रेस ने नामांकन रद्द किए जाने को ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताया और कहा कि वह इसे कानूनी चुनौती देगी. कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने कहा कि उन्होंने नटराजन के दस्तावेज देखे हैं और उनके लिए उस अदालत के मामले का उल्लेख करना जरूरी नहीं था.
तन्खा ने कहा, "कोई FIR नहीं है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत नोटिस दिया गया था, जिसका उम्मीदवार ने अदालत में जवाब दे दिया है. पहले वोट चोरी हुई और अब सीट चोरी हो रही है." उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील की अनुमति देने का आग्रह किया है.
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आम तौर पर उम्मीदवारों को नामांकन पत्रों में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाता है. लेकिन नटराजन के मामले में ऐसा अवसर कथित तौर पर नहीं दिया गया.
9 जून को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, के.सी. वेणुगोपाल, सचिन पायलट और भूपेश बघेल नई दिल्ली में चुनाव आयोग (EC) के कार्यालय पहुंचे. लेकिन उन्हें कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने की अनुमति नहीं मिली. इसके बाद नेताओं ने कार्यालय के बाहर धरना दिया. बाद में चुनाव आयोग ने उनसे प्रतिनिधिमंडल के रूप में मिलने का समय मांगने को कहा.
इसके अलावा मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने भोपाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय के बाहर पूरी रात धरना दिया.