चांद-सितारे निहारने के शौकीनों के लिए महाराष्ट्र में बनेंगे खास टूरिस्ट स्पॉट!

महाराष्ट्र सरकार राज्य भर में अंतरराष्ट्रीय डार्क स्काई पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना बना रही है

सांकेतिक फोटो

एस्ट्रो-पर्यटक और खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोग जल्द ही चांद-सितारों को देखने के शौक को पूरा कर सकेंगे क्योंकि महाराष्ट्र राज्यभर में अंतरराष्ट्रीय डार्क स्काई पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना बना रहा है. नीतिगत ढांचा अनुभव-आधारित पर्यटन- जैसे तारों को देखना और एस्ट्रो-फोटोग्राफी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देगा साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करेगा.

महाराष्ट्र में पहले से ही कई डार्क स्काई क्षेत्र हैं जहां प्रकाश प्रदूषण कम या बिल्कुल नहीं है, लेकिन इन्हें अभी तक डार्क-स्काई इंटरनेशनल द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया है. यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए रात के आसमान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध एक गैर-लाभकारी संस्था है. राज्य सरकार महाराष्ट्र पर्यटन नीति, 2024 के तहत एक एस्ट्रो टूरिज्म और डार्क स्काई संरक्षण उप-नीति पर काम कर रही है. 

इसके तहत इन स्थानों को डार्क-स्काई इंटरनेशनल की तरफ से प्रमाणित किया जाएगा और अधिसूचित किया जाएगा. महाराष्ट्र के पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव संजय खंदारे बताते हैं, “रात में प्रकाश प्रदूषण को रोकने के लिए इन स्थानों और आस-पास के क्षेत्रों में बाहरी रोशनी के उपयोग पर नियम लागू होंगे.”

सरकार ने लगभग 11 स्थलों की पहचान की है, और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम चल रहा है. इनमें चंद्रपुर जिले में ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व, बुलढाणा में लोनार झील जो उल्कापिंड के प्रभाव से बनी भारत की एकमात्र क्रेटर झील है, नासिक जिले में एक आदिवासी बहुल गांव उदमाल और अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले में भंडारदरा बांध शामिल हैं. विचाराधीन अन्य स्थल रायगढ़ में हरिहरेश्वर, नंदुरबार जिले का हिल स्टेशन तोरणमाल, जलगांव में यावल पूर्व रेंज, अमरावती में मेलघाट और पुणे जिले में भीमाशंकर हैं.

खंदारे ने जानकारी दी है कि नोटिफाइड और प्रमाणित क्षेत्रों में तारों को देखने के लिए बुनियादी ढांचा और अन्य भौतिक बुनियादी ढांचे, जैसे पहुंच सड़कें देखी जाएंगी. यह राज्य के फंड या सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मार्ग के माध्यम से किया जाएगा. इन क्षेत्रों और आस-पास के परिसरों में लाइटिंग प्रबंधन और रात में कृत्रिम प्रकाश शमन (ALAN) की योजनाएं देखी जाएंगी. डार्क स्काई स्थल कम लागत वाले मॉडल के इर्द-गिर्द टिकाऊ पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेंगे. जंगलों और वनस्पतियों और जीवों के परिदृश्य के रात्रिकालीन स्वास्थ्य में सुधार करेंगे. और रात्रिकालीन जैव विविधता को बढ़ावा देंगे.

महाराष्ट्र डार्क स्काई नीति की नीति रणनीतिकार और डार्क-स्काई इंटरनेशनल की एक साझेदार एजेंसी एस्ट्रोनएरा प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक और निदेशक श्वेता कुलकर्णी ने बताया कि डार्क स्काई स्थल पर्यटकों को महाराष्ट्र में रात भर रुकने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा, “एस्ट्रो-पर्यटन में रात के आसमान के रहस्यों को जानना शामिल है और इसलिए पर्यटक लोनार जैसे स्थानों पर रात भर रुकेंगे. यूनाइटेड किंगडम में शोध से पता चलता है कि डार्क स्काई स्थलों में सरकार द्वारा निवेश से एस्ट्रो-पर्यटन के माध्यम से दोगुना रिटर्न मिलता है.”

यह परियोजना मनुष्यों, जानवरों और बड़े पैमाने पर जैव विविधता पर अत्यधिक या गलत दिशा में निर्देशित कृत्रिम प्रकाश के कारण होने वाले प्रकाश प्रदूषण के दुष्प्रभावों को भी नियंत्रित करेगी. कुलकर्णी ने कहा कि बुलढाणा जिला कलेक्टर ने एक डार्क स्काई टास्क फोर्स का भी गठन किया है और सतारा और नंदुरबार जिलों के स्थानों पर शुरुआती काम चल रहा है.

Read more!