एमपी में गेहूं खरीद टली; क्या ईरान युद्ध के बहाने पल्ला झाड़ रही सरकार?

ईरान युद्ध के कारण 'बारदाने की कमी' ने सरकारी खरीद को 10 अप्रैल तक टाल दिया है, जिससे कई गेहूं किसान अपनी फसल MSP से नीचे बेचने को मजबूर हैं

प्रतीकात्मक फोटो

मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले हफ्ते घोषणा की कि राज्य के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों के प्रमुख उत्पादक इलाकों से गेहूं की खरीद 10 अप्रैल से शुरू होगी. हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद शुरू होने की यह सबसे देरी वाली तारीख है.

आमतौर पर, पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर और मालवा संभागों में गेहूं की खरीद मार्च के मध्य में शुरू हो जाती है. मध्य और पूर्वी मध्य प्रदेश के साथ-साथ नर्मदा बेल्ट में यह मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में की जाती है.

मोहन यादव सरकार ने गेहूं की खरीद शुरू करने के लिए 1 पहले अप्रैल की तारीख घोषित की थी. 30 मार्च को इसे भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभागों के लिए बढ़ाकर 10 अप्रैल और बाकी मध्य प्रदेश के लिए 15 अप्रैल कर दिया गया.

राज्य सरकार ने इस देरी का कारण ईरान युद्ध की वजह से बारदाने (बोरा) की कमी को बताया है (हाई-डेंसिटी पॉलीथीन या HDPE बैग पेट्रोकेमिकल उद्योग पर निर्भर हैं). हालांकि, कुछ जानकार इससे असहमत हैं, उनका सुझाव है कि सरकार पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) की आवश्यकताओं से अधिक गेहूं खरीदने की इच्छुक नहीं है क्योंकि इसमें उसे नुकसान होता है. उनका मानना है कि देरी और अन्य तरीकों से सरकार चाहती है कि उसे गेहूं की कम बिक्री की जाए. मध्य प्रदेश में अभी गेहूं खरीद का विकेंद्रीकृत मॉडल काम करता है. जानकार हवाला देते हैं कि प्रशासन केंद्र सरकार को इस बात के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है कि प्रदेश में भी केंद्रीकृत खरीद का मॉडल शुरू हो जाए ताकि खरीद की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सिर पर डाली जा सके. 

खरीद में देरी का किसानों के लिए क्या मतलब है? उज्जैन जिले के लालगढ़ गांव के एक किसान हनुवंत सिंह बताते हैं, “किसान क्रेडिट चक्र का पालन करते हैं. डीजल, बिजली, मजदूरी और हार्वेस्टर के बिलों को चुकाना होता है, इसलिए किसानों को उस पैसे की जरूरत होती है जो फसल बेचने से आएगा. देरी के कारण, किसान अपना गेहूं MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से कम दरों पर बेच रहे हैं और उन्हें नुकसान हो रहा है.”

केंद्र ने इस साल के लिए गेहूं का MSP 2,585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है. मध्य प्रदेश सरकार ने इसमें 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस जोड़ा है, जिससे प्रभावी खरीद दर 2,625 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है. हालांकि, दिसंबर 2023 में मोहन यादव सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से गेहूं पर दिया गया 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस सबसे कम है.

पश्चिमी मध्य प्रदेश में गेहूं वर्तमान में उज्जैन संभाग में 2,000 से 2,400 रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रहा है, जिससे MSP दर की तुलना में किसानों को नुकसान हो रहा है. आगर जिले के पिपलोन गांव के एक अनाज व्यापारी राहुल जैन कहते हैं, “मालवराज, मालवा शक्ति, तेजस और तेजस मंगल जैसी गेहूं की किस्में, जिनका उपयोग ब्रेड के लिए किया जाता है, खुले बाजार में 2,000 से 2,400 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रही हैं.”

जाहिर है, खरीद में देरी के साथ किसानों के लिए सुरक्षा जाल खत्म होता दिख रहा है. भोपाल संभाग में खुले बाजार में गेहूं की कीमतें थोड़ी बेहतर हैं. रायसेन मंडी के एक अनाज व्यापारी मुन्ने बताते हैं, “अच्छी गुणवत्ता वाली मालवा शक्ति 2,500 से 2,550 रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रहा है.”

बारदाने की स्थिति कितनी गंभीर है? पिछले हफ्ते तक, मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पास जूट के बैगों का लगभग 120,000 गांठों का स्टॉक था, जो इस साल 78 लाख टन गेहूं की खरीद के लिए आवश्यक कुल 360,000 गांठों का लगभग एक तिहाई है. मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अनुराग वर्मा कहते हैं, “हम जूट और हाई-डेंसिटी पॉलीथीन (HDPE) दोनों से बने अधिक बैग प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं. हमने नए और पुराने बैगों के लिए निविदाएं जारी की हैं. जूट आयुक्त के कार्यालय ने हमें और आपूर्ति का आश्वासन दिया है.”

इस बीच, दावे किए जा रहे हैं कि भोपाल जिले के बैरसिया से BJP विधायक विष्णु खत्री ने बारदाने हासिल कर लिए हैं और आधिकारिक खरीद शुरू होने से पहले ही किसानों की गेहूं की उपज को तौल दिया है. राज्य में एक गोदाम में कथित तौर पर पिछले साल का सड़ा हुआ गेहूं जमा पाया गया, जबकि इस साल की उपज रखने के लिए गोदामों की कमी बताई जा रही है. ये आरोप संकट के समय राज्य सरकार की स्थिति को कमजोर करने का खतरा पैदा करते हैं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने BJP सरकार की आलोचना की है और घोषणा की है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता खरीद में देरी और किसानों को होने वाले नुकसान को लेकर राज्य भर में कलेक्टरों के कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

5 अप्रैल को, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक समीक्षा बैठक के बाद कहा कि सरकार गेहूं किसानों की हालत को लेकर संवेदनशील है. उन्होंने कहा कि अधिक बारदाने सुरक्षित करने के लिए जूट आयुक्त के कार्यालय से बातचीत चल रही है और आश्वासन दिया कि खरीद घोषित तारीख पर शुरू होगी. लेकिन जैसे-जैसे 10 अप्रैल का लक्ष्य करीब आ रहा है, गेहूं की बिक्री के लिए स्लॉट-बुकिंग 5 अप्रैल तक नहीं खुली थी.

Read more!