मध्य प्रदेश में 2026 'कृषि वर्ष' फिर इस साल गेहूं खरीद पर सबसे कम बोनस क्यों?

गेहूं खरीद पर कम बोनस देकर मोहन यादव सरकार एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश कर रही है- पहला: खर्चों पर लगाम लगाना और दूसरा: गेहूं की खेती को हतोत्साहित करना

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी रबी सीजन में गेहूं की खरीद पर 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देने का फैसला किया है. मोहन यादव सरकार के इस फैसले पर मंजूरी मिलते ही तीखा राजनीतिक विवाद शुरू हो गया.

इसकी बड़ी वजह यह है कि यह बोनस किसी भी राज्य सरकार के जरिए न्यूमतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दिए गए बोनस के फीसद के रूप में अब तक का सबसे कम है. इसी सरकार ने पिछले सीजन में 175 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया था.  

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मोहन सरकार 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का दावा कर रही है, तब किसानों के लिए इतना कम बोनस की घोषणा क्यों की? राज्य सरकार के लिए गेहूं की खरीद मूल्य एक महत्वपूर्ण निर्णय है जो राज्य की राजनीति को प्रभावित करता है.

पिछले दो दशकों में मध्य प्रदेश एक प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य बन गया है और राज्य सरकार ने कुछ वर्षों में गेहूं की उच्चतम खरीद दर्ज की है. चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपए घोषित किया है, जो 2025-26 की तुलना में 160 रुपए प्रति क्विंटल अधिक है. 2024-25 में गेहूं का MSP 2,275 रुपए था.

2024-25 में मध्य प्रदेश सरकार ने 125 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस घोषित किया, जिससे प्रभावी खरीद मूल्य बढ़कर 2,400 रुपए प्रति क्विंटल हो गया. 2025-26 में बोनस 175 रुपए प्रति क्विंटल था, जिससे कुल खरीद मूल्य 2,600 रुपए प्रति क्विंटल हो गया था. हालांकि, 2026-27 में 40 रुपए प्रति क्विंटल के बोनस के साथ प्रभावी खरीद मूल्य बढ़कर 2,625 रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष के प्रभावी खरीद मूल्य से केवल 25 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि है.

किसान संगठनों और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया है. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को 2023 के चुनाव वादे की याद दिलाई है, जब BJP ने 2,700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदने का वादा किया था.

नर्मदा नदी के किनारे स्थित गेहूं उत्पादक प्रमुख जिले हरदा के प्रगतिशील किसान केदार सिरोही ने नाराजगी जताते हुए कहा, “गेहूं की कीमत को 2,700 रुपए तक पहुंचाने में राज्य BJP का क्या योगदान है? वैसे भी, अगले साल तक केंद्र सरकार के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी के साथ, गेहूं की प्रभावी खरीद कीमत 2,700 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक हो जाएगी. इसके लिए राज्य सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया है."

राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि बोनस में मामूली बढ़ोतरी के दो कारण हैं: पहला- 2023 से जारी लाडली बहना जैसी कई मुफ्त योजनाओं के कारण राज्य के वित्त स्थिति पर बड़ा दबाव पड़ा है. दूसरा- कम बोनस देकर किसानों को मध्य प्रदेश में गेहूं की खेती करने से हतोत्साहित करना है. यही कारण है कि एक ओर सरकार ने गेहूं पर काफी कम बोनस दिया है. दूसरी तरफ उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा महत्वपूर्ण है.

हालांकि, किसानों का कहना है कि उड़द को प्रोत्साहन देने से गेहूं की खेती कम नहीं होगी, क्योंकि उड़द खरीफ की फसल है जबकि गेहूं रबी की फसल है. उन्होंने कहा कि गेहूं का विकल्प रबी की फसल ही होनी चाहिए.

2025-26 के विपणन सत्र में सरकार ने लगभग 77 लाख टन गेहूं की खरीद की, जो 2024-25 में 47.8 लाख टन थी. हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार गेहूं की खरीद को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है, क्योंकि नौकरशाही इसे एक फिजूलखर्ची मानती है.

2025 में, मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राज्य में गेहूं की केंद्रीकृत खरीद की मांग की, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. केंद्रीकृत प्रणाली के तहत, भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India) राज्य को शामिल किए बिना सीधे किसानों से गेहूं खरीदता है. मध्य प्रदेश ने इस वर्ष 78 लाख टन गेहूं की खरीद की तैयारी कर ली है. राज्य में इस वर्ष गेहूं का उत्पादन लगभग 350 लाख टन होने का अनुमान है.

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