कोलकाता गोदाम हादसा : यूनियन की शिकायतों के बाद भी क्यों नहीं रुका काम?
कोलकाता गोदाम हादसे के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में बन रही सभी व्यावसायिक परियोजनाओं को सुरक्षा ऑडिट पूरा होने तक रोक दिया है

कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन एक गोदाम की छत गिरने से अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 से अधिक मजदूर घायल हुए हैं. इस हादसे के बाद कई हफ्ते पहले की गई शिकायतें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. इन शिकायतों में निर्माण की अनुमति, पोर्ट की जमीन के रिकॉर्ड और मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े आरोप शामिल हैं.
घटना के बाद पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. साथ ही मृतकों के परिवारों को पश्चिम बंगाल सरकार ने 10 लाख रुपये और केंद्र सरकार ने 2 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है. दरअसल, 24 जून को दोपहर करीब 12:07 बजे कोलकाता पोर्ट क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक गिर गई.
इसके बाद भारतीय सेना, नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF), दमकल विभाग और कोलकाता पुलिस ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया. अधिकारियों के मुताबिक, देर रात तक कई मजदूर स्टील की मुड़ी हुई बीमों और कंक्रीट के मलबे के नीचे फंसे हुए थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के समय वहां 50-60 मजदूर काम कर रहे थे.
यह गोदाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट की जमीन पर बनाया जा रहा था. कोलकाता नगर निगम (KMC) के सूत्रों के मुताबिक, अगस्त 2024 में यह जमीन 30 साल की लीज पर चाय के भंडारण और पैकेजिंग का काम करने वाली कंपनी बेहरा ब्रदर्स को दी गई थी. निर्माण कार्य कंपनी के मालिक शंभूनाथ बेहरा करा रहे थे.
बचाव अभियान के दौरान हाइड्रोलिक क्रेन से भारी स्टील गर्डर हटाए गए. गैस कटर से लोहे के ढांचे काटकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई. राज्य सरकार के अनुरोध पर सेना की ईस्टर्न कमांड की चार टुकड़ियां भी मौके पर भेजी गईं.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा, "सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. हमने 21 लोगों को बाहर निकाला, लेकिन उनमें से तीन की मौत हो गई." हालांकि, बाद में मृतकों की संख्या बढ़ गई. अधिकारियों ने बताया कि 20 मजदूरों का कोलकाता के SSKM अस्पताल में इलाज चल रहा है. इनमें से कम-से-कम दो की हालत गंभीर बताई गई.
बचाव अभियान के साथ ही इमारत की मजबूती और निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे. घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जांच में ऐसा कहीं से भी नहीं लग रहा है कि यह हादसा बारिश के कारण जमीन धंसने से हुआ है.
उन्होंने कहा, "मैं इंजीनियर नहीं हूं, लेकिन जो मैंने देखा और इंजीनियरों से चर्चा की, उससे यह मामला बारिश के कारण जमीन धंसने का नहीं लगता. अगर ऐसा होता तो स्टील की बीम इस तरह नहीं मुड़तीं. ऐसा लगता है कि स्टील फ्रेमवर्क के बोल्ट निकल गए."
मुख्यमंत्री ने कहा कि KMC इंजीनियरों की शुरुआती रिपोर्ट में डिजाइन की खामी सामने आई है. उन्होंने दावा किया, "गोदाम के भवन का नक्शा ही गलत था." इन खुलासों के बाद निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं. KMC ने इस गोदाम के नक्शे को इसी साल 17 जनवरी को मंजूरी दी थी. बताया जा रहा है कि पोर्ट प्राधिकरण ने भी निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी.
हालांकि, वामपंथी ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) से संबद्ध कलकत्ता डॉक लेबर बोर्ड वर्कमेन यूनियन (CDLBWU) के दस्तावेज बताते हैं कि इस निर्माण को लेकर एक महीने से भी पहले पोर्ट अधिकारियों को चेतावनी दी गई थी.
11 मई को यूनियन ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के चेयरमैन, एस्टेट मैनेजर और केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर ट्रांसपोर्ट डिपो रोड स्थित प्लॉट नंबर D-247/3 पर चल रहे निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड मांगे थे. यही वह जगह है, जहां हादसा हुआ.
यूनियन का आरोप है कि पोर्ट के एस्टेट विभाग ने 10 अप्रैल को रिकॉर्ड जांचने के बाद बताया था कि इस परिसर के लिए किसी भी तरह की नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) या निर्माण अनुमति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. यूनियन के मुताबिक, 18 अप्रैल को उसने लीज से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज जमा किए. इसके बाद 24 अप्रैल को एस्टेट विभाग ने माना कि एम/एस बेहरा ब्रदर्स को निर्माण के लिए NOC दी गई थी.
यूनियन ने अपने पत्र में कहा कि रिकॉर्ड होने की बात स्वीकार करने के बावजूद अधिकारियों ने NOC, स्वीकृत भवन योजना और अन्य मंजूरी संबंधी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां देने से इनकार कर दिया. यूनियन ने मांग की कि NOC, निर्माण अनुमति, स्वीकृत भवन योजना और अन्य सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां दी जाएं. साथ ही एम/एस बेहरा ब्रदर्स को दी गई अनुमति से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच कराई जाए.
पत्र में असगर हुसैन नाम के व्यक्ति की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए. यूनियन का आरोप है कि हुसैन को पहले पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर अतिक्रमणकारी बताया गया था और वह वहां अवैध पार्किंग चलाता था. यूनियन ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की पोर्ट की जमीन पर चल रहे निर्माण में भागीदारी गंभीर चिंता का विषय है और इसकी तत्काल सतर्कता जांच होनी चाहिए.
इतना ही नहीं, CDLBWU ने निर्माण की वैधता और मंजूरी की जांच पूरी होने तक काम रोकने की भी मांग की थी. 24 जून को राजनीतिक विवाद और बढ़ गया, जब माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने दावा किया कि CITU ने भी इस परियोजना में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी.
सलीम ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के शासन में नाजिराबाद के एक गोदाम में आग लगने से मजदूरों की मौत हुई थी. इस (BJP) सरकार को भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई." सलीम के मुताबिक, CITU ने 11 जून को कोलकाता पोर्ट प्राधिकरण को पत्र लिखकर ठेकेदार असगर हुसैन से जुड़े निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की चेतावनी दी थी. अब इस परियोजना में हुसैन की भूमिका की भी जांच हो रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि 24 जून की सुबह से ही गोदाम की छत हिल रही थी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ मजदूर स्टील के ढांचे की जांच करने गए थे, लेकिन थोड़ी ही देर बाद पूरी छत गिर गई. सूत्रों का कहना है कि कुछ मजदूर, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, गोदाम परिसर में ही रह रहे थे. इससे मृतकों की संख्या अधिक हो सकती है.
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि KMC क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान मंजूर हुई सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं का काम रोक दिया जाए. उन्होंने कहा, "मैंने KMC आयुक्त और शहरी विकास एवं नगर मामलों के विभाग को निर्देश दिया है कि पिछली सरकार के दौरान मंजूर हुए सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक भवनों का काम रोका जाए. इसमें वे परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिन्हें जलाशय भरकर बनाने की अनुमति दी गई थी. इन सभी का ऑडिट होगा."
यह रोक 31 जुलाई तक लागू रहेगी. लोक निर्माण विभाग, नागरिक सुरक्षा, दमकल विभाग, कोलकाता पुलिस और KMC के अधिकारियों की एक विशेष टीम स्वीकृत भवन योजनाओं और चल रही परियोजनाओं का ऑडिट करेगी. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. हालांकि, घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी रहने के बीच यह हादसा अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं रह गया है. यह भवन डिजाइन, रेगुलेटरी मॉनिटरिंग, मजदूरों की सुरक्षा और सार्वजनिक पोर्ट भूमि के प्रबंधन से जुड़े बड़े सवालों की जांच का विषय बन गया है.