कोलकाता एयरपोर्ट के आधुनिकरण से कैसे जुड़ गया मस्जिद विवाद?
पश्चिम बंगाल की BJP सरकार कोलकाता एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय विमानन केंद्र में बदलने और उसके आसपास दिल्ली की तर्ज पर एयरोसिटी विकसित करने की योजना बना रही है

"विकास पर कोई समझौता नहीं होगा. एयरपोर्ट के विस्तार के लिए गौरीपुर जामे मस्जिद और एक मंदिर, दोनों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा." यह कहना है BJP के उत्तर दमदम विधायक सौरव सिकदर का.
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार के लिए उसके आसपास मौजूद दो धार्मिक ढांचों- एक मस्जिद और एक मंदिर- को दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा. अधिकारी एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय विमानन केंद्र में बदलने और उसके आसपास दिल्ली की तर्ज पर एयरोसिटी विकसित करने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं.
अब तक लोगों का ध्यान मुख्य रूप से गौरीपुर जामे मस्जिद, जिसे आमतौर पर बांकरा मस्जिद कहा जाता है, को स्थानांतरित करने के लंबे समय से लंबित मुद्दे पर रहा है. लेकिन इंडिया टुडे को पता चला है कि प्रस्तावित टर्मिनल विस्तार के तहत एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के पास स्थित एक मंदिर को भी दूसरी जगह ले जाया जाएगा.
21 मई को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजारापु से मुलाकात के बाद उत्तर दमदम से BJP विधायक सौरव सिकदर ने कहा, "मामला सिर्फ मस्जिद का नहीं है. एयरपोर्ट के पास स्थित एक मंदिर को भी स्थानांतरित किया जाएगा. विकास के मामले में कोई समझौता नहीं होगा." एयरपोर्ट का अधिकांश हिस्सा सिकदर के विधानसभा क्षेत्र में आता है.
सिकदर ने कहा कि कोलकाता एयरपोर्ट का पुनर्विकास राज्य की नई BJP सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने कहा, "कोलकाता एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधा में बदलना, ताकि उसकी पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके, माननीय मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है. हम इसे साकार करने की दिशा में काम कर रहे हैं."
इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक अधिकारियों और विधायकों के साथ पहली बैठक में मस्जिद को स्थानांतरित करने का मुद्दा उठाया गया था. बताया जाता है कि अधिकारी ने कहा था कि एयरपोर्ट के विस्तार और विमानन सुरक्षा के हित में मस्जिद को हटाने के लिए संबंधित पक्षों को राजी करने के आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
इसके बाद 20 मई को उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी कार्यालय में प्रशासन और स्थानीय विधायकों की बैठक हुई. इस बैठक में पूर्व तृणमूल कांग्रेस मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी भी शामिल हुए. वे (जमीयत उलेमा-ए-हिंद) की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष और मस्जिद के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद थे.
सिकदर के अनुसार बातचीत सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ सकी. उन्होंने कहा, "सरकार मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने के लिए उससे बड़ा भूखंड देने को तैयार है. लेकिन सिद्दीकुल्लाह चौधरी इस विचार के प्रति बहुत खुले नहीं थे. हम अभी भी इस पर काम कर रहे हैं."
चौधरी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया.
136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद एयरपोर्ट की सीमा दीवार के भीतर लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित है और सेकंडरी रनवे के उत्तर में करीब 165 मीटर दूर है. अधिकारियों का लंबे समय से कहना है कि इसकी स्थिति परिचालन और सुरक्षा संबंधी बाधाएं पैदा करती है. खासकर इसलिए क्योंकि एयरपोर्ट के दो रनवे में से फिलहाल केवल एक का ही पूरी तरह इस्तेमाल हो पाता है.
सिकदर ने मस्जिद के पास स्थित एक तालाब का भी जिक्र किया. उनका दावा है कि इससे विमानों की आवाजाही में अतिरिक्त दिक्कतें आती हैं. उन्होंने कहा, "मस्जिद के बगल का तालाब अक्सर बड़े विमानों की लैंडिंग को मुश्किल बना देता है."
सिकदर ने जोर देकर कहा कि एयरपोर्ट पुनर्विकास योजना किसी धार्मिक समुदाय को निशाना बनाकर नहीं बनाई गई है. उन्होंने कहा कि व्यापक बुनियादी ढांचा परियोजना के तहत मंदिर को भी दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है. हालांकि उन्होंने मंदिर के बारे में और जानकारी देने से इनकार कर दिया.
एयरपोर्ट के विस्तार से आसपास के क्षेत्र, खासकर उत्तर दमदम नगर पालिका को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. सिकदर ने कहा कि एयरपोर्ट से जुड़ी गतिविधियों पर लगने वाले करों से नगर पालिका को सालाना लगभग 86 लाख रुपए की आय होती है. उनका मानना है कि विस्तार के बाद यह राशि 2 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है.
मस्जिद को स्थानांतरित करने और एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण की मांग नई नहीं है. सिकदर ने कहा कि यह मुद्दा पहली बार 1998 में उनके चाचा और पूर्व केंद्रीय मंत्री तपन सिकदर ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान संसद में उठाया था.
अब पश्चिम बंगाल में पहली बार BJP की सरकार बनने के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय, दोनों एयरपोर्ट के कायाकल्प की प्रक्रिया को तेज करने के इच्छुक दिख रहे हैं. रनवे और टर्मिनल विस्तार के साथ-साथ केंद्र सरकार एयरपोर्ट के आसपास दिल्ली जैसी एयरोसिटी विकसित करने पर भी विचार कर रही है. यह एक सुनियोजित प्रीमियम क्षेत्र होगा, जिसमें होटल, व्यावसायिक परिसर, मनोरंजन क्षेत्र और कारोबारी ढांचा शामिल होगा. इसकी तर्ज पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एयरोसिटी विकसित की गई है.
अधिकारियों का मानना है कि उन्नत एयरपोर्ट और प्रस्तावित एयरोसिटी पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं, निवेश आकर्षित कर सकते हैं और पूर्वी भारत के विमानन तथा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती दे सकते हैं. साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी इनका रणनीतिक महत्व होगा.