केरल को चौतरफा भारी पड़ रही ईरान की जंग!
LPG सिलेंडरों की किल्लत से लेकर अनाथालयों की मुश्किलों तक, खाड़ी क्षेत्र में हो रही जंग का केरल की अर्थव्यवस्था (खासकर टूरिज्म सेक्टर) पर बहुत भारी असर

तेहरान से 3,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर, ईरान और उसके पड़ोस में चल रही जंग का दर्द केरल में महसूस किया जा रहा है और राज्य की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ा है. पूरे राज्य में LPG की किल्लत से जहां रेस्टोरेंट, कैंटीन और हॉस्टल बंद हो गए हैं, वहीं इस युद्ध का सबसे बड़ा शिकार टूरिज्म बना है.
तिरुवनंतपुरम की 'इंडियामेट एक्सपीरियंसेज प्राइवेट लिमिटेड' के मैनेजिंग डायरेक्टर के.सी. हरि का कहना है, "केरल में हाई-एंड टूरिज्म सेक्टर पर सबसे बुरी मार पड़ी है." वे बताते हैं, "ऐसे समय में जब राज्य में टूरिज्म का सीजन शुरू होता है, करीब एक चौथाई विदेशी पर्यटकों ने आयुर्वेदिक सेंटर्स और रिसॉर्ट्स में अपनी बुकिंग कैंसिल या टाल दी है. इनमें से ज्यादातर बुकिंग खाड़ी देशों से थीं. अगर वेस्ट एशिया का यह तनाव और बढ़ता है, तो और भी विदेशी पर्यटक अपनी बुकिंग कैंसिल कर देंगे."
हरि के मुताबिक, कोविड महामारी से बर्बाद होने के बाद राज्य का टूरिज्म सेक्टर अब ग्रोथ मोड में आ गया था. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2025 में 8,21,999 विदेशी पर्यटकों ने केरल का दौरा किया था, जो 2024 के मुकाबले 11.3 प्रतिशत ज्यादा था.
लेकिन इस युद्ध के चलते केरल टूरिज्म को विदेशी पर्यटकों को लुभाने के अपने ग्लोबल कैंपेन, खासकर खाड़ी देशों में होने वाले इवेंट्स को टालना पड़ा है. मार्च के आखिर में होने वाला 'सऊदी अरेबियन ट्रैवल मार्ट' और अप्रैल में होने वाला 'कुवैत ट्रैवल एंड टूरिज्म एग्जिबिशन' दोनों फिलहाल टाल दिए गए हैं.
फ्लाइट्स डिस्टर्ब होने की वजह से जो विदेशी पर्यटक केरल में फंस गए हैं और जिनकी वापसी टल गई है, वे टूरिज्म की इस कमाई के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते. 'रेविज़ होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' के वाइस-प्रेसिडेंट आशीष नायर समझाते हैं, "इनके ज्यादा दिन रुकने से रेवेन्यू बढ़ने में कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि इनमें से ज्यादातर हाई-एंड विदेशी पर्यटक नहीं हैं, बल्कि वे लोग हैं जो होमस्टे या बजट होटलों में रुकते हैं." उन्होंने बताया, "खाड़ी देशों और यूरोप से बड़ी संख्या में हाई-एंड विदेशी पर्यटक मानसून के सीजन में आयुर्वेदिक इलाज के लिए केरल आते हैं. इन्हीं पर्यटकों ने अपनी ट्रिप कैंसिल की है."
इससे पहले, ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण कैंसिलेशन और लॉजिस्टिक्स के भारी खर्च की वजह से केरल से मछली, फल और सब्जियों का एक्सपोर्ट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था. इस युद्ध के चलते मालभाड़ा और इंश्योरेंस की लागत तीन गुना हो गई है. वहीं राज्य के भीतर, LPG सिलेंडरों की भारी किल्लत का सामना कर रहे करीब 70 प्रतिशत रेस्टोरेंट्स के शटर गिर गए हैं. पूरे राज्य में होटल, कैंटीन और चाय की दुकानें बंद पड़ी हैं. प्रोफेशनल कॉलेजों के ज्यादातर हॉस्टल बंद कर दिए गए हैं, और ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) व अनाथालयों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
तिरुवनंतपुरम के एक होटल मालिक मोहम्मद इस्माइल ने इंडिया टुडे को बताया, "गैस सिलेंडरों की कमी के कारण हमें अपना काम बंद करने पर मजबूर होना पड़ा. हमारे होटल में लंच के लिए करीब 200 और डिनर के लिए 150 मेहमान आते थे. LPG सिलेंडरों के बिना, हम अपनी रसोई नहीं चला सकते."