केरल चुनाव के नतीजे से पहले ही कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर मचा घमासान

मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही यह बहस कांग्रेस में फिर से गुटबाजी उभरने का इशारा करती है

लोकसभा में राहुल गांधी के साथ बैठे केसी वेणुगोपाल

केरल को यह जानने में अभी लगभग दो हफ्ते का समय बाकी है कि अगली सरकार किस राजनीतिक गठबंधन की होगी. लेकिन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस में अलग-अलग गुटों ने अपने नेताओं को मुख्यमंत्री पद के पसंदीदा चेहरे के रूप में पेश करने का अभियान अभी से शुरू कर दिया है.

वैसे इसकी शुरुआत चुनाव अभियान के दौरान ही हो गई थी. तिरुवल्ला में कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति पी.जे. कुरियन ने घोषणा थी: "अगर यूडीएफ जीतती है, तो रमेश चेन्नीथला मुख्यमंत्री होंगे." यह टिप्पणी चेन्नीथला की मौजूदगी में की गई थी.

इसके बाद 10 अप्रैल को एर्णाकुलम जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और कोच्चि सीट से पार्टी उम्मीदवार मोहम्मद शियास ने वी.डी. सतीशन का समर्थन किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगला मुख्यमंत्री एर्णाकुलम जिले से होना चाहिए. पार्टी के राज्य नेतृत्व की फटकार के बाद शियास को अपनी पोस्ट हटानी पड़ी.

सतीशन निवर्तमान केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे. माना जाता है कि उनके दखल की वजह से ही शियास को कोच्चि से चुनावी टिकट मिला था. सतीशन के समर्थकों का मानना है कि यूडीएफ चुनाव जीत रही है और वे इस जीत के सूत्रधार हैं.

15 अप्रैल को सोशल मीडिया पर फिर हलचल हुई जब केरल में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के. सुधाकरन ने एआईसीसी (AICC) महासचिव के.सी. वेणुगोपाल का मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन किया. उन्होंने वेणुगोपाल के नेतृत्व की तुलना कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के. करुणाकरण, वायलर रवि, ए.के. एंटनी और ओमान चांडी से की. विडंबना यह है कि चुनाव अभियान के दौरान सुधाकरन ने चेन्नीथला का समर्थन किया था.

वोटों की गिनती से पहले ही अगले मुख्यमंत्री पर हो रही यह बहस कांग्रेस में गुटों के बीच लड़ाई उभरने का संकेत है. जब गुट इस काम में लगे हैं, तब चेन्नीथला ने इस प्रचार को तवज्जो नहीं दी है.

चेन्नीथला ने 16 अप्रैल को नई दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी को केरल के चुनावों और चुनाव बाद की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी. इंडिया टुडे के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "अगर यूडीएफ को बहुमत मिलता है, तो आलाकमान अगले मुख्यमंत्री का फैसला करेगा. यह नए विधायकों सहित विभिन्न स्तरों पर परामर्श के आधार पर होगा. अगले मुख्यमंत्री पर यह बहस बेवक्त ही चल रही है. मैंने कभी अपना नाम आगे नहीं बढ़ाया और न ही खुद को प्रमोट करने के लिए किसी टीम को लगाया."

UDF के सहयोगी दल इस घटनाक्रम को कैसे देख रहे हैं? इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) निश्चित रूप से नाराज है. आईयूएमएल (IUML) के राज्य महासचिव पी.एम.ए. सलाम ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से राज्य के नेताओं पर लगाम लगाने का आग्रह करते हुए कहा है, "कांग्रेस नेता एक निराशाजनक और बेवक्त की गतिविधि में लगे हुए हैं. पहले वोटों की गिनती होने दें और फिर कांग्रेस अपने नेता का फैसला कर सकती है. मुख्यमंत्री पद पर सार्वजनिक बहस उन लोगों को चोट पहुंचाएगी जिन्होंने UDF को वोट दिया है."

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