दक्षिण भारत के ‘नियाग्रा फाल्स’ को रोशन करने की योजना पर क्यों उठ रहे सवाल?

केरल सरकार दक्षिण भारत के ‘नियाग्रा’ कहे जाने वाले अथिरापिल्ली झरने के आसपास लाइट लगाना चाहती है ताकि रात में भी पर्यटक यहां आ सकें

त्रिशूर जिले का अथिरापिल्ली झरना

केरल में पर्यावरण कार्यकर्ता वी.डी. सतीशन सरकार के एक फैसले का तीखा विरोध कर रहे है. सरकार ने त्रिशूर जिले के अथिरापिल्ली झरने को रोशन करने के लिए बजट में 5 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला पर्यावरणीय आपदा जैसा है.

सरकार जिस परियोजना को 'इको-फ्रेंडली डायनेमिक लाइटिंग प्रोजेक्ट' कह रही है, वह वाझाचल वन प्रभाग में प्रस्तावित है. यह एक जैव विविधता क्षेत्र है, जो दुर्लभ पक्षियों के लिए जाना जाता है. यहीं 81.5 फुट ऊंचा और 330 फुट चौड़ा अथिरापिल्ली झरना बहता है, जिसे 'दक्षिण भारत का नियाग्रा' भी कहा जाता है.

चलाकुडी नदी पर स्थित इस झरने को देखने के लिए हर साल लगभग 15 लाख पर्यटक आते हैं. यह इलाका पहले से ही केरल में मानव-वन्यजीव संघर्ष, खासकर हाथियों के साथ टकराव के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है. वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट पेश करते हुए सतीशन ने रात के समय भी पर्यटकों को यहां आकर्षित करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है. अभी तक यहां पर्यटकों के प्रवेश का समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ही सीमित रहा है.

केयर अर्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष और चार दशकों से वन्यजीवन का अध्ययन कर रहे डॉ. पी.एस. ईसा कहते हैं, "यह परियोजना इस क्षेत्र की जैव विविधता को अस्थिर करने का खतरा पैदा करती है. आप इसे कोई भी नाम दें लेकिन यहां रोशनी करने से बड़े पैमाने पर प्रकाश प्रदूषण होगा और वन्यजीवों को स्थाई नुकसान पहुंचेगा."

ईसा त्रिशूर में रहते हैं और इस क्षेत्र के पर्यावरणीय मुद्दों से अच्छी तरह परिचित हैं. उन्होंने इस परियोजना को ‘जिम्मेदार पर्यटन और ईको-टूरिज्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ’ बताया.

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि विभाग ने कभी सरकार को ऐसा प्रस्ताव नहीं दिया था. अधिकारी ने कहा, "हमने न तो इस परियोजना का सुझाव दिया और न ही अथिरापिल्ली झरने पर डायनेमिक लाइटिंग के बजट प्रस्ताव को लेकर कोई अध्ययन किया है. इसका इस क्षेत्र की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं पर गंभीर असर पड़ेगा."

यह संवेदनशील क्षेत्र कई पशु और पक्षी प्रजातियों का घर है. इनमें लायन-टेल्ड मकाक (बंदर की एक प्रजाति), एशियाई हाथी, नीलगिरि मार्टेन, मालाबार पाइड हॉर्नबिल, ग्रेट हॉर्नबिल, नीलगिरि वुड पिजन और कोचीन फॉरेस्ट केन टर्टल शामिल हैं.

चलाकुडी रिवर बेसिन प्रोटेक्शन काउंसिल के महासचिव एस.पी. रवि ने कहा, "इस क्षेत्र को रोशन करके इसकी जैविक घड़ी बदलने से इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में संरक्षण के प्रयासों पर खतरा पैदा होगा. सिर्फ स्तनधारी ही नहीं बल्कि तितलियां और कीट भी नष्ट हो जाएंगे. किसी जैव विविधता क्षेत्र को बनने में हजारों साल लगते हैं और सरकार की यह परियोजना उसे नष्ट करने पर तुली है."

केरल के प्रमुख पर्यावरणविदों में शामिल रवि ने चलाकुडी नदी पर प्रस्तावित अथिरापिल्ली जलविद्युत परियोजना के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था. इसके चलते 2011 से 2016 के बीच की ओमन चांडी सरकार को यह परियोजना वापस लेनी पड़ी थी. रवि कहते हैं, "हम लोगों के समर्थन से अथिरापिल्ली लाइटिंग परियोजना का भी विरोध करेंगे. मुझे इस बजट प्रस्ताव के पीछे कोई छिपा हुआ एजेंडा नजर आता है."

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