झारखंड में राज्यसभा की दोनों सीटों पर JMM के दावे से कांग्रेस क्यों हुई परेशान?
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए इस साल जून में चुनाव होने हैं लेकिन इसको लेकर JMM की अगुवाई वाले सत्ताधारी गठबंधन में अभी से खींचतान शुरू हो गई है

झारखंड में राज्यसभा की कुल छह सीटों में से 2 सीटों पर इसी साल जून में चुनाव होना है. लेकिन सीटों पर दावेदारी अभी से शुरू हो चुकी है. नए घटनाक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने दोनों सीटों पर दावा कर दिया है. इसमें एक सीट शिबू सोरेन के निधन (4 अगस्त 2025) के कारण पहले से खाली है, जो एक 'कैजुअल वैकेंसी' है. दूसरी सीट BJP के दीपक प्रकाश की है, जिनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है. इन दोनों सीटों पर चुनाव मई-जून 2026 के आसपास होने की संभावना है.
संख्या बल के लिहाज से यह तय है कि दोनों सीटें सत्तारूढ़ दलों को ही मिलेंगी. लेकिन दूसरी सीट पर कांग्रेस दावा करने का सोच ही रही थी कि JMM के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कह दिया कि वे चाहते हैं कि दोनों सीटों पर JMM अपना दावा करे और उसकी अपनी हिस्सेदारी हो. 5 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, "दोनों सीटों पर सहयोगी घटक दलों को विश्वास में लेकर प्रत्याशी पर निर्णय लिया जाएगा. हमारे नेता हेमंत सोरेन के राजनीतिक कौशल पर पार्टी को विश्वास है. गठबंधन धर्म का पालन करते हुए इस मुद्दे पर कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाना चाहिए."
कुल 81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट के लिए 28 मतों की आवश्यकता होती है. यहां सत्तारूढ़ महागठबंधन (JMM-कांग्रेस-RJD-CPI) के पास मजबूत बहुमत है. गठबंधन के पास JMM के 34, कांग्रेस के 16, RJD के 4 और CPI (ML) के 2 विधायकों सहित कुल 56 विधायक हैं. इस संख्या बल के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन दोनों सीटें जीतने में सफल दिख रहा है. हालांकि, 34 विधायकों वाले JMM ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया है, जबकि 16 सदस्यों वाली कांग्रेस को उम्मीद है कि गठबंधन का सम्मान करते हुए एक सीट उसके खाते में जानी चाहिए.
इधर JMM के दावों के बाद कांग्रेस ने तेजी दिखाई. पार्टी के नेता तत्काल सीएम हेमंत सोरेन के पास पहुंचे. विधानसभा में कांग्रेस के उप-सचेतक और विधायक राजेश कच्छप कहते हैं, "सीएम हेमंत सोरेन से इस मुद्दे पर बात हुई है और आगे भी होनी है. जिस माहौल में अभी बातचीत हुई है, उससे यही लगता है कि कांग्रेस का जो पारंपरिक रूप से दावा बनता है, वह दूसरी सीट कांग्रेस को ही मिलेगी." वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर कहते हैं, "सभी दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं का मन होता है कि उनके ही दल के लोग उच्च सदन में जाएं. अगर JMM के नेता ऐसा कह रहे हैं तो उनकी बात का सम्मान है, लेकिन इन सब चीजों का निर्णय दलों के सुप्रीम लीडर ही करते हैं. आपसी बातचीत और सहमति से ही सब तय होगा, किसी के बयान मात्र से नहीं."
सवाल ये भी है कि आखिर कौन हो सकते हैं उम्मीदवार?
JMM की तरफ से पहली सीट के लिए हेमंत सोरेन की बहन अंजलि सोरेन के नाम की चर्चा लगातार हो रही है. वहीं दूसरा प्रत्याशी कौन होगा, इसकी चर्चा अभी बाकी है. जहां तक बात कांग्रेस की है, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के पिता और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी भी अपना दावा ठोक रहे हैं.
इसके अलावा जमशेदपुर के पूर्व सांसद और ओडिशा प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी डॉ. अजय कुमार भी इस रेस में शामिल हैं. अगर किसी आदिवासी चेहरे को प्राथमिकता दी गई, तो सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेसी नेता दयामनी बारला का नाम ऊपर हो सकता है. हालांकि, कांग्रेसी सूत्रों का मानना है कि गठबंधन के तहत बात बनी तो कांग्रेस अपने किसी समर्पित और विश्वसनीय कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजेगी और यह भी देखेगी कि प्रत्याशी वैसा हो जिस पर JMM भी सहमत हो.
कांग्रेस, JMM ने पहले भी की है डील
साल 2023 के दिसंबर में खबरें आईं कि BJP कथित 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए झारखंड में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रही है. इसको देखते हुए हेमंत सोरेन ने कल्पना सोरेन को चुनावी राजनीति में उतारने का फैसला किया था. उस वक्त JMM विधायक रहे सरफराज अहमद ने गांडेय विधानसभा सीट से 31 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया था. बाद में सरफराज अहमद बतौर JMM प्रत्याशी राज्यसभा भेजे गए और कल्पना सोरेन गांडेय सीट से उप-चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बनीं. यहां कांग्रेस ने JMM को पूरा समर्थन दिया था.
राजनीतिक विश्लेषक आनंद कुमार कहते हैं, "2024 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी पारंपरिक दावेदारी छोड़कर JMM के सरफराज अहमद को समर्थन दिया था, जो राजनीतिक मजबूरियों का नतीजा था. अब दो सीटों के अवसर पर कांग्रेस एक सीट की मांग कर रही है, जो गठबंधन धर्म के तहत जायज लगती है. अगर JMM दोनों सीटें अपने पास रखने का प्रयास करता है, तो यह कांग्रेस में असंतोष पैदा कर सकता है और वर्तमान गठबंधन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है."
इस वक्त राज्यसभा में झारखंड से पांच सांसद हैं, जिनमें BJP से प्रदीप वर्मा, आदित्य साहू और आदित्य प्रकाश शामिल हैं. वहीं JMM से महुआ माजी और डॉ. सरफराज अहमद हैं. आगामी चुनाव के बाद BJP के दो ही सांसद रह पाएंगे और बाकी चार सीटें इंडिया गठबंधन के पास चली जाएंगी.
बहरहाल, वर्तमान समीकरण इंडिया गठबंधन के पक्ष में हैं, जो दोनों सीटें जीत सकता है. लेकिन सीट बंटवारे का मुद्दा निर्णायक है. अगर कांग्रेस को एक सीट मिली, तो चुनाव निर्विवाद रह सकता है, नहीं तो अंदरूनी कलह या क्रॉस-वोटिंग से परिस्थितियां बदल सकती हैं.