गुजरात में उद्योगों के लिए आधी हुई गैस सप्लाई; हजारों नौकरियां जाने का खतरा!

गुजरात के सिरेमिक टाइल्स उद्योग से लेकर ऑटो पार्ट्स निर्माण से जुड़ी यूनिटों तक, गैस की कमी का बड़ा असर दिख रहा है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

गुजरात सरकार ने राज्य में गैस आपूर्ति में कमी के कारण एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. घरेलू LPG (रसोई गैस) की उपलब्धता को प्राथमिकता देने के लिए उद्योगों को मिलने वाली गैस आपूर्ति में 50 फीसद कटौती की गई है.

इससे राज्य के कई मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टरों में समस्या पैदा हो गई है. अगर ये हालात लंबे समय तक बने रहे तो उत्पादन में नुकसान के कारण नौकरियों पर खतरा और बढ़ सकता है.

यह संकट इसलिए आया है क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से क्रूड ऑयल और गैस का आयात रुक गया है. इस रास्ते से होकर भारत की 40-50 फीसद तक तेल आपूर्ति होती है.

भू-राजनीतिक तनावों के कारण भारत की LNG (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) आपूर्ति प्रभावित हुई है. गुजरात सरकार ने कहा है कि वह केंद्र के साथ समन्वय कर रही है और घरेलू LPG की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों में गैस सप्लाई 50 फीसद कम की गई है. उन्होंने स्थिति जल्द सुधरने की उम्मीद जताई है. सरकार ने घरेलू खपत को प्राथमिकता दी है, लेकिन इससे PNG (पाइपलाइन प्राकृतिक गैस) पर निर्भर सिरेमिक, उर्वरक, कपड़ा और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई है.

गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा, “हमने उद्योगों को गैस आपूर्ति में 50 फीसद की कटौती की है. उर्वरक और दूध प्रसंस्करण से जुड़ी कंपनियों के लिए भी लगभग 40 फीसद गैस की कटौती की गई है. ताजा फैसला यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि घरेलू गैस इस्तेमाल करने वाले लोगों को कोई असुविधा न हो." उन्होंने आगे कहा कि घबराहट को रोकने और घरों के लिए LPG की रेगुलर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार के जरिए समय-समय पर दिशानिर्देशों जारी किए जा रहे हैं.

राज्य सरकार की कंपनी गुजरात गैस ने 4 मार्च को आधिकारिक रूप से फोर्स मेज्योर (अप्रत्याशित परिस्थिति) का हवाला दिया. इसके दो दिन बाद 6 मार्च से आपूर्ति पर पाबंदियां लागू कर दी गई हैं. कंपनी LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का आयात करती है और राज्य भर में हजारों घरेलू ग्राहकों, औद्योगिक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को रोजाना लगभग 9.5 mmscmd (मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर) PNG, CNG की आपूर्ति करती है. साथ ही ये कंपनी राज्य में 800 से अधिक CNG स्टेशनों को भी गैस उपलब्ध कराती हैं.
 
इसका असर गुजरात के सिरेमिक उत्पादन केंद्र और विश्व के दूसरे सबसे बड़े टाइल क्लस्टर मोरबी में पहले से ही दिखाई दे रहा है. भारत के सिरेमिक टाइल उत्पादन का लगभग 90 फीसद हिस्सा, यहीं तैयार होता है. यहां 1,200 से अधिक छोटी -बड़ी कंपनियां हैं. यह उद्योग भट्टों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में प्रोपेन और प्राकृतिक गैस का उपयोग करता है. यही कारण है कि गैस की कमी का बड़ा असर यहां देखने को मिल रहा है.  

मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वॉल टाइल्स डिवीजन के अध्यक्ष हरीश बोपलिया के मुताबिक, गैस आपूर्ति आधी कम होने के कारण मोरबी में लगभग 170 इकाइयां अस्थाई रूप से बंद हो गई हैं. कई अन्य कारखाने मौजूदा ऑर्डर पूरे करते हुए ईंधन की बचत करने के प्रयास में अपनी क्षमता से कम समय तक चल रहे हैं.  

इस मंदी का रोजगार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. मोरबी सिरेमिक क्लस्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 600,000-700,000 श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनमें विनिर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और सहायक गतिविधियों में लगे प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ी संख्या शामिल है. यहां तक ​​कि इन कंपनियों का कुछ दिनों के लिए बंद होना भी हजारों दिहाड़ी और संविदा श्रमिकों की आय को प्रभावित कर सकता है.

सिरेमिक उद्योग के अलावा, गैस कटौती का असर अहमदाबाद और सानंद के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है. वटवा में PNG पर निर्भर लगभग 250 रासायनिक इकाइयों ने आपूर्ति प्रतिबंधों के बाद महज 40 फीसद काम-काज करने की सूचना दी है. उत्पादन में कमी के कारण इस क्षेत्र से जुड़े कई लोग पहले से ही प्रभावित हैं.

सानंद के औद्योगिक क्षेत्र में भी असर साफ दिख रहा है. यहां ऑटोमोबाइल और ऑटो-कंपोनेंट आपूर्तिकर्ता कंपनियां हैं. सानंद GIDC (गुजरात औद्योगिक विकास निगम) के सूत्रों का मानना ​​है कि गैस की निरंतर कमी से कंपोनेंट उत्पादन धीमा हो सकता है और ऑटोमोबाइल से जुड़े कल-पूर्जों की डिलीवरी में देरी हो सकती है. इस तरह की दिक्कत कई उद्योगों को प्रभावित कर सकते हैं जो यहां बनने वाले चीजों पर निर्भर हैं.

उद्योग जगत के संगठनों का अनुमान है कि सानंद-हंसलपुर क्षेत्र में लगभग 600 ऑटो-कंपोनेंट आपूर्तिकर्ता छोटी-बड़ी कंपनियां हैं. ये कंपनियां सानंद स्थित टाटा मोटर्स और मेहसाणा स्थित मारुति सुजुकी कंपनी को अपने यहां बने सामानों का बड़ा हिस्सा सप्लाई करते हैं. इस पूरे इंडस्ट्री से करीब 80,000 से 100,000 लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं.  

ऐसे क्षेत्रों में रोजगार संबंधी चिंताएं काफी गंभीर हैं. यहां विनिर्माण इकाइयां अक्सर अन्य राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों को काम पर रखती हैं. उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि अस्थाई बंद या लंबे समय तक उत्पादन में कटौती से कोविड महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है. अगर यही स्थिति बनी रहती है तो छंटनी या बिना वेतन के जबरन काम बंद करना पड़ सकता है. गुजरात देश के उन राज्यों में से है जिनमें सबसे व्यापक गैस वितरण नेटवर्क है और भारत के औद्योगिक PNG कनेक्शनों का लगभग 28.5 फीसद हिस्सा यहीं से आता है.

अन्य शहरों की तरह, गुजरात के अहमदाबाद, सूरत और राजकोट के रेस्तरां और होटलों ने भी अपने मेनू में कटौती कर दी है. सबसे पहले प्रभावित होने वाले स्ट्रीट वेंडर और फूड ट्रक हैं, क्योंकि उनका मुनाफा बहुत कम होता है. उसके बाद छोटे रेस्टोरेंट प्रभावित होते हैं.

सरकार ने व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की रिफिलिंग पर फिलहाल रोक लगा दी है. इसलिए कुछ स्ट्रीट वेंडरों ने इंडक्शन गैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, लेकिन उनमें से काफी दुकानें बंद हो चुकी हैं. इसी तरह, छोटे रेस्टोरेंट ने भी अपने मेनू में भारी कटौती की है या अस्थाई रूप से बंद कर दिए हैं. सिलेंडरों की कालाबाजारी शुरू हो गई है, जिसमें 3,000 रुपए तक की अधिक कीमत वसूली जा रही है.

फूड एंटरप्रेन्योर्स अलायंस के संस्थापक दिलीप ठक्कर कहते हैं, "सैकड़ों श्रमिकों, जिनमें कई प्रवासी श्रमिक हैं, को अस्थाई रूप से काम से हटा दिया गया है. हमें एक महामारी जैसा संकट उभरता हुआ दिखाई दे रहा है."  

फिलहाल, सरकार का कहना है कि ये प्रतिबंध घरेलू LPG आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए एहतियाती कदम हैं, लेकिन अगर भू-राजनीतिक अस्थिरता जारी रहती है तो गैस की कमी और आपूर्ति प्रभावित होने के कारण मंदी की स्थिति बन सकती है.  

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