बिहार में IAS अधिकारियों के खिलाफ एक्शन का चेहरा बने IPS पंकज दराद

इन दिनों बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ED के ज्यादा चर्चा स्टेट विजिलेंस यूनिट (SVU) को लेकर हो रही है. इस चर्चा के केंद्र में IPS पंकज कुमार दराद हैं

IPS पंकज कुमार दराद (फाइल फोटो)
IPS पंकज कुमार दराद (फाइल फोटो)

मार्च 2025 की बात है. बिहार के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई थीं. होली के दिन दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी. यह मामला विधानसभा में पहुंचा और विपक्ष ने लाचार पुलिस तथा कानून-व्यवस्था को लेकर जमकर विरोध किया.

बिहार पुलिस पर उठ रहे इन सवालों का जवाब देने के लिए जो IPS अधिकारी आगे आए, उनका नाम था- पंकज कुमार दराद. उस समय वे बिहार पुलिस में ADG लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उन्होंने 17 मार्च 2025 को शाम 4 बजे पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्वीकार किया कि बीते कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस पर हमलों की 10 घटनाएं हुई हैं. ये हमले अररिया, मुंगेर, पटना, समस्तीपुर और जहानाबाद में हुए. साथ ही उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा, “कोई अपराधी हमला करता है तो हवाई फायरिंग करो. अगर जानलेवा हमला हो तो गोली चलाओ. यह बात हर पुलिसकर्मी के दिमाग में साफ होनी चाहिए.”

गोली का जवाब गोली से देने वाला उनका बयान उस समय मीडिया में खूब चर्चा में रहा था. अब लगभग एक साल बाद पंकज कुमार दराद एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार चर्चा की वजह अपराधियों के खिलाफ उनकी ताबड़तोड़ कार्रवाई नहीं, बल्कि भ्रष्ट IAS अधिकारियों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई है.

कौन हैं IPS अधिकारी पंकज कुमार दराद?

1995 बैच के IPS अधिकारी पंकज कुमार दराद मूल रूप से बिहार के ही रहने वाले हैं. 21 नवंबर 1969 को जन्मे दराद की पहचान एक ईमानदार और कड़क पुलिस अधिकारी के रूप में होती है. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास कर सीधी भर्ती (RR) के रूप में पुलिस सेवा में प्रवेश किया था.

मूल रूप से बिहार के रहने वाले पंकज कुमार दराद ने एम.फिल. तक शिक्षा प्राप्त की है. वे 5 सितंबर 1995 को आधिकारिक तौर पर IPS अधिकारी बने थे. 2025 में ब्यूरोक्राफ्ट इंडिया (Bureaucrats India) के जरिए उन्हें टॉप 25 ब्यूरोक्रेट्स में शामिल किया गया था.

2023 में सशस्त्र सीमा बल (SSB) में महानिरीक्षक (IG) के रूप में उनकी प्रतिनियुक्ति हुई थी. अगले साल 2024 में वे SSB में IG बने. बिहार पुलिस में ADG लॉ एंड ऑर्डर पद पर रहते हुए उनके काम की काफी सराहना हुई.

इसके बाद उनका आखिरी बड़ा ट्रांसफर 22 अप्रैल 2025 को हुआ. इस बार बिहार सरकार ने उन्हें आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) का अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) नियुक्त किया और साथ ही विशेष निगरानी इकाई (Special Vigilance Unit - SVU) का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. इस समय पंकज कुमार दराद इन्हीं दो प्रमुख जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं.

ब्रोकर रिशु श्री के मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई की

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने 30 अप्रैल 2025 को ठेकेदार रिशु श्री के खिलाफ FIR दर्ज की. भले ही यह मामला पहले ED के पास पहुंचा था लेकिन ED ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद कार्रवाई करने से परहेज किया.

इस FIR में दर्ज जानकारियां काफी गंभीर थीं. इसके मुताबिक, रिशु श्री राज्य के विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर टेंडर की शर्तें इस तरह प्रभावित करवाता था कि उसके क्लाइंट्स को फायदा पहुंचे. जब यह मामला SVU के ADG पंकज कुमार दराद के पास पहुंचा तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जांच आगे बढ़ाने का फैसला लिया.

पंकज के नेतृत्व में SVU ने राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक निडरता का परिचय दिया. सरकार बदलते ही शुरू हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने ये साफ कर दिया है कि राज्य में अब भ्रष्टाचारियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है.

इसके बाद फिर क्या था राज्य की जांच एजेंसी ने IAS अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इस बड़ी कार्रवाई के तहत SVU ने दो सीनियर IAS अधिकारी अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर के खिलाफ आरोप तय किए. इतना ही नहीं खबर है कि इस मामले में जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है करीब दर्जन भर अन्य नौकरशाह भी जांच एजेंसी के निशाने पर हैं. इस समय सूबे के पांच बड़े विभागों में फाइलों को खंगाला जा रहा है, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों में खौफ का माहौल है.

कैसे सीनियर IAS अधिकारियों के गले के फांस बने पंकज कुमार दराद?

SVU की जांच के आधार पर बिहार सरकार ने दो सीनियर IAS अधिकारियों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा को निलंबित करने का फैसला किया है. इन दोनों के खिलाफ जांच चल रही है. खबर है कि SVU के रडार पर सिर्फ ये दो IAS अधिकारी नहीं, बल्कि बिहार के करीब आधा दर्जन IAS अधिकारी और हैं.

ED की जांच में पता चला था कि ठेकेदार रिशु श्री ने IAS योगेश कुमार सागर और उनके परिवार के 6-8 सदस्यों को विदेश यात्राएं करवाई थीं. जून 2024 में ऑस्ट्रिया (वियना, साल्ज़बर्ग आदि) की लग्जरी यात्रा इन लोगों को करवाई गई थी, जिसका खर्च करीब ₹22 लाख रिशु श्री ने उठाया था. हालांकि, इन सबूतों के मिलने के बावजूद लंबे समय तक इन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी.

वहीं, जांच में पता चला कि IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और उनके परिवार की यात्राओं पर रिशु श्री ने करीब 19 लाख रुपए खर्च किए थे. दोनों अधिकारियों के व्हाट्सएप चैट से यह भी खुलासा हुआ कि बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) के तत्कालीन MD धर्मेंद्र कुमार ने भी विदेश यात्राएं की थीं, जिसके बाद रिशु श्री की कंपनियों को BMSICL से ठेके मिले. हालांकि, ED की रिपोर्ट में शामिल अन्य IAS अधिकारियों पर अभी तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है.

ED की रिपोर्ट में कई IAS और अन्य अधिकारियों के नाम हैं. योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा के अलावा संजीव हंस, धर्मेंद्र कुमार, आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, सुनील कुमार यादव, अमरेंद्र कुमार आदि के नाम शामिल हैं. इसके अलावा सहरसा के तत्कालीन नगर आयुक्त मुमुक्षु चौधरी, चीफ इंजीनियर तारणी दास समेत कई अन्य नाम भी रिपोर्ट में हैं.

यही कारण है कि सीनियर IAS अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई शुरू होने के बाद पंकज कुमार दराद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. इस बार वे शासन-प्रशासन चलाने वाले सीनियर अधिकारियों के गले के फांस बन गए हैं. 

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