झाड़फूंक विवाद से लेकर गबन के आरोप तक, बिहार के शिक्षा मंत्री से बातचीत
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी से पुष्यमित्र की बातचीत

पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी इन दिनों लगातार विवादों में घिर रहे हैं. गोपालगंज जिले में पड़ने वाली सीट बैकुंठपुर से विधायक तिवारी के कुछ विवाद तो वायरल वीडियोज के कारण हैं. जैसे एक वीडियो के बाद आरोप लगा कि वे झाड़फूंक पर विश्वास करते हैं.
इसके अलावा एक वित्त रहित कॉलेज के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उनके ऊपर गबन का आरोप भी है. इस मामले की जांच निगरानी विभाग कर रहा है. इंडिया टुडे के संवाददाता पुष्यमंत्र ने बिहार के शिक्षा मंत्री से इन सभी मुद्दों पर बात की है. पेश हैं इस बातचीत के संपादित अंश :
आप पहली बार बिहार सरकार के मंत्री बने और पहली बार ही आपको शिक्षा विभाग जैसा महत्वपूर्ण विभाग मिला है. इसका बजट 60 हजार करोड़ से ज्यादा है और इस विभाग के साथ 6.5 लाख से अधिक शिक्षक काम करते हैं. पहली ही बार आपको इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे मिली?
यह पार्टी नेतृत्व का विश्वास है कि उन्होंने मुझे सम्राट चौधरी जी की टीम में इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. जब भी सरकारें बनती हैं, तब नए-पुराने लोगों का समीकरण बनता है. मैं चार बार विधायक और एक बार सांसद का चुनाव लड़ चुका हूं. मैं लगातार संगठन में काम करता रहा हूं. इस बार मुझे सरकार में काम करने का अवसर मिला. पार्टियां इस तरह के फैसले लेती रहती हैं. हमारी पार्टी तो इस मामले में ज्यादा लोकतांत्रिक है.
कहीं ऐसा इस वजह से तो नहीं कि आप शिक्षा के क्षेत्र में पहले से सक्रिय हैं? पहले पटना में एक कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाते थे, बाद में अपने क्षेत्र में एक कॉलेज भी खोला.
मैं राजनीति के क्षेत्र में जरूर हूं लेकिन मन से मैं शिक्षक ही हूं. अपनी पार्टी के प्रशिक्षण शिविरों में बोलते वक्त भी मैं शिक्षक बन जाता हूं. जब मैं इंटरमीडिएट में पढ़ता था तब मैट्रिक के बच्चों को पढ़ाता था. जब ग्रेजुएशन में गया तो इंटरमीडिएट के बच्चों को पढ़ाने लगा. बाद में मैंने और मेरे दो अन्य दोस्तों ने मिलकर एक स्टार्टअप की तरह कोचिंग खोली. हमारी कोचिंग काफी सफल रही. यह मेरे जीवन के शुरुआती दिनों की यात्रा थी. बाद के दिनों में जब मैं विधायक नहीं था तब मैंने अपने आराध्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर अपने क्षेत्र में एक इंटर कॉलेज खोला. इसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी से उसकी आधारशिला रखवाई.
उस कॉलेज में तो गबन का एक बड़ा मामला आया था जिसमें आपका भी नाम शामिल है. मामला अदालत में है और निगरानी उसकी जांच कर रही है. यह क्या मामला है?
यह सब पॉलिटिकल विवाद है. जिन दिनों मैं वहां सक्रिय था, उन दिनों JDU राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग हो गया था. उस समय वहां के विधायक की वक्रदृष्टि हमारे कॉलेज पर पड़ गई. उनको लगा कि कहीं ये अगला चुनाव न लड़ लें. ऐसे में मुझे रोकने के लिए उन्होंने मेरे ऊपर एक फर्जी केस करवा दिया. आप पूरे देश में घूमकर आएंगे, आपको ऐसा केस नहीं मिलेगा. इसमें सारी धाराएं मेरे ऊपर लगा दी गई हैं, जबकि केस सेक्रेटरी और प्रिंसिपल पर होना चाहिए था. चेयरमैन का न तो आर्थिक मामले में कोई दखल होता है और न दिन-प्रतिदिन के कामकाज में. वह किसी चेक पर हस्ताक्षर नहीं करता. वह तो साल में एक या दो बार बैठक की अध्यक्षता करता है.
कहीं ऐसा तो नहीं कि चूंकि कॉलेज आपने खोला, जैसा आपने अभी कहा, तो मान लिया गया कि जो भी हो रहा है, आपके संरक्षण में हो रहा है?
वह तो स्वाभाविक है. उस कॉलेज को हम आगे लेकर जाना चाहते थे. मगर मेरे ऊपर सतर्कता विभाग से केस कराया गया. केस ऐसा कराया गया कि कभी भी विजिलेंस का कोई पदाधिकारी हमसे पूछताछ करने नहीं आया और न ही कोई नोटिस आया.
अगर इस केस में आपके खिलाफ कोई फैसला आ गया तो फिर आपको मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा?
माननीय न्यायालय के फैसले पर मुझे बड़ी आस्था है. मैं इस मामले को लेकर खुद पटना उच्च न्यायालय की शरण में गया था. न्यायालय ने प्रथम दृष्टया ही सारे मामले पर रोक लगा दी. अब तक इस मामले में बिना आरोपों के चार्जशीट दायर हुई है. इसे लगभग 12 साल हो गए. मैंने मामले को रद्द करने की अपील की है. मुझे पूरा भरोसा है क्योंकि इसमें कोई आरोप नहीं है.
दरअसल उसमें हुआ यह है कि कॉलेज के दो शिक्षकों, राज हुसैन और कामेश्वर पांडेय के खाते में वेतन मद का पैसा चला गया. वे हमारी और कॉलेज प्रशासन की जानकारी के बिना शिक्षा मित्र और न्याय मित्र का काम भी कर रहे थे. उन्होंने इस बात को छिपाया था. जब मुझे जानकारी मिली तो मैंने दोनों को कॉलेज से हटा दिया. इसके साथ ही जिला प्रशासन से भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा. कार्रवाई हुई भी. फिर ये दोनों अदालत में गए. वहां दोनों को कॉलेज से प्राप्त राशि का आधा हिस्सा वापस करने के लिए कहा गया. फिर मैंने प्रिंसिपल को भी हटा दिया.
इसी मामले में बाद में मेरे ऊपर भी एफआईआर करा दी गई. बताइए, इसमें मेरा कोई दोष कैसे हो सकता है. न मेरे साइन से पैसा गया और न ही यह मेरी जानकारी में था.
मुझे पूरा विश्वास है कि मुझे न्याय मिलेगा ही. अब शिक्षा मंत्री रहते हुए मैं इस पूरी व्यवस्था में भी बदलाव लाने की कोशिश करूंगा. वित्त रहित कॉलेजों में ऐसे हजारों मामले हैं, जिन्हें लोग आज भी झेल रहे हैं. अनुदान के पैसे बांटने को लेकर भी कोई नीति नहीं है. इसके लिए भी हमने अपने विभाग को निर्देशित किया है कि नीति बनाकर सभी कॉलेजों को भेज दें, ताकि वे कोर्ट केसेज से बच जाएं.
जिस विधायक के बारे में आपने कहा कि राजनीतिक विद्वेष के तहत उन्होंने आपको फंसा दिया है, आप उनका नाम नहीं ले रहे. मगर यह सार्वजनिक है कि वे JDU विधायक मंजीत सिंह हैं. उन्होंने विधानसभा में भी आपके खिलाफ बात उठाई थी. अभी BJP और JDU साथ हैं, ऐसे में आप दोनों के आपसी संबंध कैसे हैं?
अच्छे हैं. अभी मेरे पड़ोस की सीट पर वे चुनाव लड़ रहे थे. उस चुनाव में भी मैं उनके लिए अपील करता रहा. यह लड़ाई परिस्थितियों के आधार पर थी. अब वह लड़ाई खत्म हो गई है.
आपने कहा कि आप मूल रूप से शिक्षक ही हैं, तो आप मंत्री रहते हुए राज्य के शिक्षकों के लिए क्या करने वाले हैं?
मैं अभी राज्य में घूम रहा हूं. मुझे शिक्षक भी मिलते हैं, छात्र भी मिलते हैं और अभिभावक भी मिलते हैं. जितनी समस्याएं मेरे सामने आ रही हैं, मैं उनके समाधान का रास्ता तलाश रहा हूं. अभी शिक्षकों की सबसे बड़ी समस्या ट्रांसफर नीति को लेकर है. कई शिक्षकों के ट्रांसफर हुए हैं और कई वेटिंग में हैं. हम जल्दी ही एक अच्छी ट्रांसफर नीति लेकर आ रहे हैं. इसके बाद कोई समस्या नहीं रहेगी. इसमें गंभीर रोग से पीड़ित शिक्षक मरीजों की समस्या का समाधान सबसे पहले होगा.
आप कोचिंग भी चलाते रहे हैं. बिहार में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं. उनको लेकर आपकी क्या राय है?
कोचिंग को लेकर एक पॉलिसी पहले से है. उसे हम और प्रभावी बनाने जा रहे हैं. दूसरी बात यह है कि जिस समय स्कूल चलते हैं, उसी समय कोचिंग चलने के कारण बहुत सारे छात्र स्कूल में न होकर कोचिंग सेंटर चले जाते हैं. इसके समाधान का भी रास्ता हम तलाश रहे हैं, हालांकि अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचे हैं.
आप बच्चों के लिए कोचिंग को कितना जरूरी मानते हैं?
मेरा मानना यह है कि अगर स्कूल में अच्छी पढ़ाई हो तो इसकी जरूरत ही न पड़े. मगर आज जबरदस्त कॉम्पिटिशन का दौर है. उसके लिए छात्र को जहां भी बेहतर माहौल मिलता है, वह चला जाता है. ऐसे में हम अपने मंत्रालय के योग्य और विद्वान शिक्षकों द्वारा स्कूल की पढ़ाई खत्म होने पर एक्स्ट्रा क्लासेज चलाना चाहते हैं. इसके लिए शिक्षकों को इंसेंटिव भी मिलेगा.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में कहा था कि उनकी सरकार ऐसे सरकारी स्कूल बनाना चाहती है कि राज्य के अधिकारी भी बेहिचक अपने बच्चों को वहां पढ़ाएं. इसके लिए आप क्या कर रहे हैं?
उन्होंने जो इच्छा व्यक्त की है, उसे धरातल पर पहुंचाने का काम शिक्षा मंत्रालय का है. अभी उन्होंने प्राइवेट स्कूलों को लेकर जो चिंता व्यक्त की थी, उसको लेकर हमारा मंत्रालय सक्रिय हो गया है. हमने प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के साथ बैठक भी की है. राज्य के बड़े नेता और अफसरों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें, इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री ने मॉडल स्कूलों की परिकल्पना की है. हम क्वालिटी एजुकेशन और बेहतर माहौल वाले मॉडल स्कूल तैयार करेंगे. इन स्कूलों में पढ़ने के लिए बच्चे कॉम्पिटिटिव एग्जाम देंगे. माहौल बदल जाएगा तो स्वतः बड़े नेताओं और अफसरों के बच्चे वहां पढ़ना चाहेंगे.
बिहार में सरकारी स्कूलों में भवन बन गए, अच्छी सैलरी पर स्थाई शिक्षक नियुक्त हो गए मगर पढ़ाई की क्वालिटी बेहतर क्यों नहीं हो पा रही है?
हम इसमें लगे हैं. शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के व्यवहार में परिवर्तन हो और शिक्षकों को पठन-पाठन के लिए ज्यादा समय मिले, जो अभी अन्य कामों में लगे रहते हैं. इसको लेकर हम एक अभियान चलाने जा रहे हैं, जिसका नाम है- ‘हमारा विद्यालय-हमारा स्वाभिमान’. इसमें गांव के लोग शामिल होंगे और इसकी चिंता करने लगेंगे. विद्यालय प्रबंधन समिति का चुनाव होगा और वहां के लोगों की भागीदारी होगी, तो स्थितियां खुद ही सुधर जाएंगी.
टीआरई-4 (टीचर रिक्रूटमेंट एग्जाम-4) को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं, उसको लेकर सरकार क्या करने जा रही है?
टीआरई-4 को लेकर हम काफी आगे बढ़ चुके हैं. उसमें अभी 10-15 दिन और लगेंगे. हमलोग उसकी सारी पेचीदगियों का समाधान करके अभ्यर्थियों के लिए जल्द ही अच्छी खबर लेकर आ रहे हैं.
अब एक पॉलिटिकल सवाल. मिथिलेश तिवारी के कई राजनीतिक दुश्मन हैं, विपक्षियों से ज्यादा अपनी पार्टी में. मंजीत सिंह का आपने जिक्र किया ही, बक्सर लोकसभा चुनाव में कहा जाता है कि आपकी अपनी पार्टी के ही एक बड़े नेता की वजह से आप हार गए. इसकी क्या वजह है?
ऐसा नहीं है, यह सिर्फ एक परसेप्शन बनाया गया है. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हमसे बहुत प्रेम करते हैं. ऐसा नहीं होता तो मुझे मंत्री पद कैसे मिलता. हां, जहां तक बक्सर वाली बात है, यह मैंने भी कई बार कही है. तब जिन लोगों ने मेरे साथ ऐसा किया था, वे अब पश्चाताप कर रहे होंगे. कई बार लोग परिस्थितियों में गलत फैसले ले लेते हैं. मगर मेरा मानना है कि जब सब ठीक हो तो सबको साथ मिलकर चलना चाहिए. मेरा लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है. 36 वर्षों तक मैंने संगठन में काम किया है. सच पूछिए तो अधिकांश समय मुझे मुख्यधारा में रहने का मौका नहीं मिला मगर पार्टी का विश्वास मेरे ऊपर बना रहा. कई बार व्यक्ति की कुंडली साथ नहीं देती. ऐसे में जो आपको पहले मिल जाना चाहिए था, वह अब जाकर मिला है.
आप कुंडली पर भरोसा करते हैं? अभी आपका एक वीडियो भी वायरल है कि आप एक मंदिर में झाड़फूंक करा रहे हैं?
भारत की सभ्यता और संस्कृति अनेकता में एकता की मिसाल है. बनारस में बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन से पहले कालभैरव के मंदिर में जाना पड़ता है. मंत्री बनने के बाद मैं सबसे पहले वहीं गया था. वहां श्रद्धालुओं को इसी तरह आशीर्वाद दिया जाता है. इसे तेजस्वी यादव ने कह दिया कि मैं झाड़-फूंक करा रहा हूं.
पिछली सरकार में माना जाता था कि बिहार में सारण प्रमंडल और ब्राह्मण नेताओं के प्रतिनिधि मंगल पांडेय हैं. इस बार उनका नाम मंत्रिमंडल में नहीं है और आप आ गए हैं. तो क्या उनको हटाकर आपको मंत्रिमंडल में जगह मिली है?
BJP कभी जातिवादी राजनीति नहीं करती लेकिन लोग इसका परसेप्शन बनाते हैं. मंगल जी भी मेरे भाई हैं. वे मुझसे उम्र में थोड़े छोटे हैं मगर राजनीति में समकक्ष हैं. वे आठ साल तक मंत्री रहे, मेरी पूरी शुभकामनाएं उनके साथ रहीं. आज शायद संगठन के क्षेत्र में काम करने के लिए पार्टी उनको आगे बढ़ा रही है. चूंकि वे सीवान के हैं और मैं गोपालगंज का हूं, इसलिए लोगों को ऐसा लगता होगा.
कहीं इसलिए तो नहीं आपके मुंह से निकल जाता है कि मैं स्वास्थ्य मंत्री हूं, क्योंकि मंगल पांडेय स्वास्थ्य मंत्री थे?
हमने कभी स्वास्थ्य मंत्री नहीं कहा. वह एडिटेड वीडियो है. बाद में मैंने ओरिजिनल वीडियो भी जारी किया था. मेरे बारे में कई ऐसे एडिटेड वीडियो चल रहे हैं. ऐसे 50 लोगों को मेरी टीम ने चिह्नित किया है और मेरी लीगल टीम ने उन पर साइबर थाने में आवेदन भी दे रखा है.
एक और वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें आप कहते दिख रहे हैं कि बेटियों को बाहर जाने की जरूरत क्या है?
यह भी हमने नहीं कहा. जिस रोज मैं कार्यभार संभाल रहा था, तब किसी पत्रकार ने पूछा था कि बिहार की बेटियां भी सड़क पर हैं और पुलिस उन पर लाठी चला रही है. हमने कहा कि जब आपकी सरकार और आपका शिक्षा मंत्री यहां बैठा है, तो आपको प्रदर्शन यानी एजिटेशन पर जाने की क्या जरूरत है. हमने 'एजिटेशन' कहा था और तेजस्वी यादव ने उसे 'एजुकेशन' में बदल दिया. फिर हमने कहा था, ‘तेजस्वी जी, यह आपका दोष नहीं है. यह आपकी कम शिक्षा-दीक्षा का दोष है. इसलिए आप हमारे सरकारी विद्यालय में आइए. हम एक साल आपको ठीक से पढ़ा लेंगे तो आप मैट्रिक भी पास कर जाएंगे और आपको एजिटेशन और एजुकेशन में फर्क भी समझ आने लगेगा.’
आखिर में आप कुछ कहना चाहेंगे?
शिक्षा विभाग ऐसा विभाग है जिससे बिहार के 14 करोड़ लोग किसी न किसी तरह से जुड़े हैं. हम इनोवेशन के साथ शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं. इसमें थोड़ा और समय लग सकता है. ऐसे में हमें आपका धैर्य और आशीर्वाद चाहिए.