India-South Africa ODI : ब्लैक में टिकट बिकने के आरोपों पर कैसे गरमाई राजनीति?
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच रांची में चल रहे पहले ODI के पहले सैकड़ों दर्शकों को तब निराश होना पड़ा जब उन्हें मैच के टिकट ही नहीं मिल पाए

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला वनडे मैच रविवार 30 नवंबर को रांची में आयोजित हो रहा है. रांची के झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में तीन साल के बाद कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला हो रहा है. टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा के रांची पहुंचते ही शहर और सोशल मीडिया का माहौल पूरी तरह बदल गया.
तिस पर विराट कोहली का धोनी के घर जाना और फिर धोनी का खुद कार ड्राइव कर उन्हें होटल तक छोड़ना, क्रिकेट जगत की गॉसिप का मुख्य केंद्र बना रहा. लेकिन इन सब के इतर रांची और पूरे झारखंड में इस आयोजन को लेकर अलग आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है.
दरअसल बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमियों को मैच के टिकट खरीदने को नहीं मिले. इनमें सबसे अधिक निराशा बिहार और ओडिशा से आए उन क्रिकेट प्रेमियों को हुई, जो यह मैच देखने के लिए ट्रेन का टिकट लेकर रांची तक पहुंचे थे. ये लोग रात भर टिकट काउंटर के सामने लाइन में खड़े रहे, लेकिन टिकट नहीं मिल पाया. यहां तक कि रांची में रह रहे लोगों को भी घंटों लाइन में लगे रहने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ा.
इन लोगों को ऑनलाइन टिकट खरीदी का समय भी नहीं मिल पाया, क्योंकि झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) ने 21 नवंबर को महज 6500 टिकट ही ऑनलाइन बेचे. ये भी टिकट विंडो खुलने के महज कुछ मिनट में ही खत्म हो गए. दर्शकों को 25 नवंबर से काउंटर से टिकट लेने का ऑप्शन मिला. लेकिन यह भी दो दिन ही खुला. कहा गया कि सारे टिकट बिक चुके हैं. इसके बाद बड़ी संख्या में आम लोगों ने आरोप लगाया कि 1600 रुपए के टिकट 5,000 तक, तो 2200 रुपए के टिकट 7,000 रुपए तक में बिके हैं यानी बड़ी संख्या में ब्लैक में टिकट बिके हैं.
मैच से ठीक पहले यह आयोजन राजनीतिक टकराव का मुद्दा भी बन गया. राज्य के पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने कहा है कि “भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच अंतर्राष्ट्रीय वनडे का आयोजन है. झारखंड में इस तरह का आयोजन होना गर्व का विषय है, लेकिन इस मैच को देखने आने वाले दर्शकों के साथ अन्याय हुआ है. JSCA ने आखिर किस हिसाब से दर्शकों को टिकट उपलब्ध करवाने का काम किया है? ऐसी स्थिति में लोग निराश हैं. सुनने में यह भी आ रहा है कि टिकटों की कालाबाज़ारी हो रही है और उन्हें वास्तविक कीमत से तीन से चार गुना अधिक दाम पर बेचा जा रहा है. यह एक गंभीर मामला है.’’
वहीं स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए रक्षा राज्यमंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने भी हताशा जताई. उन्होंने कहा, “इस आयोजन में दर्शकों को न तो ऑनलाइन टिकट उपलब्ध करवाया जा सका और न ही ऑफलाइन टिकट मिल सका. बाजार में टिकटों के कालाबाजारी की चर्चा है. कई जगह दोगुनी और चार गुनी कीमत पर टिकट बेचने की खबर आई है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि इतने बड़े स्टेडियम में JSCA दर्शकों को टिकट उपलब्ध करवाने में असफल रहा है. हजारों क्रिकेट प्रेमी निराश हैं. यह बहुत गंभीर विषय है.’’
अर्जुन मुंडा की बात सही है. बीते 28 नवंबर को रांची पुलिस ने स्टेडियम के पास ब्लैक में टिकट बेचते तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. पुलिस के सामने उन्होंने माना कि उन लोगों ने बड़ी संख्या में महिला मजदूरों को दिहाड़ी देकर टिकट काउंटर पर खड़ा करवाया और उनसे मिले टिकट को चार गुने से अधिक कीमतों पर बेचा.
पूरे राज्य में चर्चा इस बात की भी अधिक हो रही है कि इस वक्त झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन यानी JSCA पर सत्ताधारी दलों के लोगों का प्रभाव अधिक है. ऐसे में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के लोगों को अधिक टिकट बांटे या बेचे गए हैं. JSCA के अध्यक्ष अजयनाथ शाहदेव कांग्रेस नेता हैं और विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि वे इस वक्त डेंगू से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है. वहीं सचिव सौरभ तिवारी के बीते विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर से BJP के टिकट पर चुनाव लडऩे की चर्चा थी. उन्होंने पार्टी ज्वाइन भी कर ली थी. हालांकि बाद में उन्हें टिकट नहीं मिला.
वैसे झारखंड में क्रिकेट मैच की ब्लैट टिकटों का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले साल 2005 में जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में हुए भारत-पाकिस्तान मुकाबले में छात्रों को 50 रुपए में टिकट उलब्ध कराने की बात कही गई थी. लेकिन पैसे लेने के बाद भी उन्हें अधिक दामों में टिकट बेचे गए थे. हंगामा होने के बाद विधानसभा ने जांच कमेटी बनाई थी. कमेटी ने जांच के बाद बड़ी संख्या में पीड़ितों के पैसे लौटाए थे.
क्या है सीट और टिकट का गणित
वरिष्ठ खेल पत्रकार और JSCA की गतिविधियों को बीते 15 साल से कवर कर रहे सुशील सिंह मंटू बताते हैं, “दरअसल JSCA में लगभग 45 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है. नियमों के मुताबिक 10 फीसदी यानी 4500 टिकट एसोसिएशन पास के रूप में बांट सकती है. ऐसे में कुल 35 हजार टिकट बेचने के लिए बचते हैं. जिसमें इस बार के मैच के लिए 6500 टिकट ऑनलाइन बेचे गए. यानी 11 हजार टिकट का ये हिसाब रहा. अब बचे 34 हजार टिकट. झारखंड में 23 जिला क्रिकेट एसोसिएशन राज्य से संबंद्ध हैं. सभी को 100 टिकट दिए जाते हैं. साथ ही बड़े जिले जैसे रांची, धनबाद और बोकारो को 200 से 500 तक टिकट दिए जाते हैं.”
औसतन अगर 150 टिकट प्रति सदस्य जिला मान लेते हैं तो 3500 टिकट यहां बेचे गए. JSCA के कुल 750 मेंबर हैं. सभी मेंबर को 2-2 पास दिया जाते हैं. इसके अतिरिक्त प्रत्येक मेंबर को 5 टिकट खरीदने की छूट होती है. इस हिसाब से कुल 1500 पास दिए गए और इन सदस्यों ने 3,750 टिकट खरीदे भी. इसके अलावा जमशेदपुर के 25 क्लब और 30 स्कूलों को 50-50 टिकट खरीदने की छूट है. इन सब को मिलाकर देखें तो यह आंकड़ा 22,250 का हो जाता है. यानी टिकट काउंटर से आम लोगों के लिए अभी भी 22,750 टिकट बचे थे.
अब इन 22,750 टिकट, जो काउंटर से बिकने थे, उसका हिसाब देखते हैं. काउंटर सुबह के 9 बजे से शाम 3 बजे तक मात्र दो दिन खुले. जबकि इनके तीन दिन खुलने की घोषणा JSCA ने ही की थी. लेकिन दूसरे दिन ही सभी टिकट सोल्ड आउट घोषित कर दिए गए. उसमें भी बनाए गए कुल 6 काउंटर में से 4 ही खुले. यानी चारों काउंटर से दोनों दिन 6 घंटे के लिए काउंटर खुला. यानी चार काउंटर से दो दिन और छह घंटों को मिलाकर कुल 48 घंटों तक लगातार टिकट बेचे गए हैं. यानी प्रति मिनट 8 टिकट बेचे गए. मतलब प्रति 7.5 सेकेंड पर एक टिकट बेचा गया है. जो कि असंभव-सा दिखता है. वह भी तब जब यह तय कर दिया गया था कि एक आधार नंबर पर दो ही टिकट दिए जाएंगे. यह सब चेक करते हुए इन टिकटों की बिक्री हुई है.
अब तक आंकड़ों की जो कहानी हमने समझी, उसके हिसाब से ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ी हुई है या की गई है. हालांकि यह बात तब और पुख्ता तरीके से कही जा सकती है जब JSCA की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान आ जाए. अभी बस इतनी ही बात साफ है कि आम लोग जो सालों तक स्टेडियम में मैच देखने का इंतजार करते हैं, इस गड़बड़झाले ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है.