राजनीतिक नियुक्तियों ने राजस्थान लोकसेवा आयोग की साख पर कैसे लगाया बट्टा?
राजस्थान लोकसेवा आयोग (RPSC) भर्ती घोटाले के आरोपी बाबूलाल कटारा के कबूलनामे ने साफ कर दिया है कि कैसे राजनीतिक जोड़-जुगाड़ से इस संस्था में सदस्य नियुक्त होते हैं

राजस्थान लोकसेवा आयोग (RPSC) भर्ती घोटाले के सबसे बड़े आरोपियों में से एक और इसके पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा का कुबूलनामा आखिर सामने आ गया है. इस कबूलनामे में क्या कहा गया है और इसका क्या मतलब है, यह जानने से पहले कटारा के इस मामले में फंसने की कहानी जानते हैं.
18 अप्रैल 2023 को राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बाबूलाल कटारा को वरिष्ठ अध्यापक भर्ती 2021 के सामान्य ज्ञान विषय के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया था. 24 दिसंबर 2022 को उदयपुर में चलती बस में 49 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पेपर हल करवाने के मामले में कटारा की यह गिरफ्तार हुई थी. जांच में पता चला कि कटारा ने परीक्षा से 60 दिन पहले ही 60 लाख रुपए में सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा का पेपर बेच दिया था.
इसके बाद सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती 2021 और REET भर्ती 2021 के पेपर लीक मामले में भी कटारा का नाम जुड़ा तो पांच माह बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई. 15 सितंबर 2023 को ED ने बाबूलाल कटारा को अपनी गिरफ्त में लिया.
गिरफ्तारी के 2 साल और 8 माह बाद अब बाबूलाल कटारा का कबूलनामा सामने आया है. कटारा ने ED के सामने यह स्वीकार किया है कि उसने RPSC सदस्य बनने के लिए डूंगरपुर के पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश खोड़निया से एक करोड़ 20 लाख रुपए में सौदा किया था. इसके तहत खोड़निया को छह साल तक हर साल 20 लाख रुपए मिलने थे. कटारा ने गिरफ्तारी से पहले दो साल तक खोड़निया को 40 लाख रुपए दिए. कटारा ने SI, REET और वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा के पेपर बेचकर जो पैसे कमाए थे उसमें से ये 40 लाख रुपए खोड़निया को दिए गए.
RPSC की साख को तार-तार करने का बाबूलाल कटारा का यह कबूलनाम कोई पहला और आखिरी मामला नहीं है. इस फेहरिस्त में कटारा के अलावा रामूराम राइका, हबीब खान गौराण, राजकुमारी गुर्जर, मंजू शर्मा, संगीता आर्य जैसे कई नाम चर्चा में आए हैं. पिछले कुछ अरसे में RPSC सदस्यों की कार्यप्रणाली ने इस संस्था की साख पर कई सवाल खड़े किए हैं.
एक सितंबर 2024 को RPSC के पूर्व सदस्य रामू राम राइका की गिरफ्तारी हुई. राइका ने अपने बेटे और बेटी के लिए बाबूलाल कटारा से SI भर्ती का पेपर हासिल किया था. राइका के बेटे और बेटी को इंटरव्यू में भी अच्छे नंबर दिलाने के लिए भी कटारा ने पैरवी की.
भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे अभिषेक कहते हैं, ''जिस संस्थान का निर्माण सत्ता और भर्तियों के बीच एक मजबूत दीवार के तौर पर किया गया. सियासी आधार पर हुई नियुक्तियों ने उसी संस्थान की दीवारों में गहरी दरारें बना दीं. सियासी समीकरण साधने के नाम पर आयोग में की गईं इन नियुक्तियों ने न केवल उसकी स्वायत्तता को खोखला किया, बल्कि निर्णय प्रक्रिया को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है. RPSC में अब मेरिट से ज्यादा अहमियत राजनीतिक नजदीकियों को मिल रही है.''
राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली BJP सरकार आने के बाद हालांकि, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के मामलों में कमी आई है मगर इंटरव्यू में पक्षपात और भेदभाव की शिकायतें अब भी बदस्तूर जारी हैं.
इंटरव्यू में पक्षपात के सबसे ज्यादा आरोप पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार द्वारा RPSC के सदस्य नियुक्त किए गए कर्नल केसरी सिंह पर लग रहे हैं. 9 अक्टूबर 2023 को राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सिफारिश पर कर्नल केसरी सिंह को RPSC सदस्य बनाया गया. 2023 के बाद से केसरी सिंह को RPSC में इंटरव्यू बोर्ड का अध्यक्ष बनने का सबसे ज्यादा मौका मिला. उनकी अध्यक्षता में RAS और सहायक आचार्य (कॉलेज शिक्षा) जैसी भर्तियों के इंटरव्यू हुए जिनमें भेदभाव और पक्षपात के आरोप लगे.
हालांकि, केसरी सिंह की नियुक्ति शुरू से ही विवादों में घिरी रही. नियुक्ति आदेश जारी होने के साथ ही केसरी सिंह के कुछ समाजों के लिए की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के वीडियो वायरल होने लगे. केसरी सिंह ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को अपना आदर्श बताते हुए कुछ समाजों के लिए आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं. 13 अक्टूबर को अशोक गहलोत ने केसरी सिंह की नियुक्ति पर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए कहा, ''मैंने सेना का बैकग्राउंड देखकर केसरी सिंह को RPSC का सदस्य बनाए जाने की सिफारिश की थी मगर कुछ जातियों के प्रति जातिगत द्वेषता और नफरत देखकर मुझे लगता है कि मुझसे बड़ी गलती हो गई.’’
राजस्थान के पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के पुत्र, पुत्रवधू और अन्य रिश्तेदारों के RAS परीक्षा में चयन के पीछे भी आरोप लगते रहे हैं कि उन्हें इंटरव्यू में ज्यादा नंबर दिए गए, जिसके कारण उनका चयन हो पाया.
क्या थी दो सदस्यों के इस्तीफे की वजहॽ
पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में नियुक्त हुई RPSC की दो सदस्यों मंजू शर्मा और संगीता आर्य के इस्तीफों ने भी कई सवाल खड़े किए हैं. कवि कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा ने RPSC की विवादास्पद SI भर्ती परीक्षा और संगीता आर्य ने EO (कार्यकारी अधिकारी) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में नाम सामने आने के बाद राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया. 15 अक्टूबर 2025 को राज्यपाल को भेजे गए इस्तीफे में मंजू शर्मा ने लिखा है, '' मेरे लिए सार्वजनिक जीवन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और आयोग की गरिमा सर्वोपरि है. भर्ती प्रक्रियाओं के विवादों के कारण मेरी और आयोग की गरिमा प्रभावित हो रही थी. मेरे खिलाफ कोई भी जांच लंबित नहीं है तथा मुझे न किसी मामले में अभियुक्त माना गया है.'' पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सिफारिश पर मंजू शर्मा को 15 अक्टूबर 2020 को RPSC का सदस्य बनाया गया था. मंजू शर्मा की नियुक्ति को लेकर उस वक्त कांग्रेस सरकार पर खूब निशाने साधे गए. BJP ने भी इस नियुक्ति का विरोध किया था.
राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य ने 28 नवंबर 2025 को राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजा था मगर अभी तक वह मंजूर नहीं हुआ है. EO भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में 10 नवंबर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने संगीता आर्य को पूछताछ के लिए बुलाया था मगर उन्होंने इंटरव्यू में व्यस्तता का कारण बताते हुए 15 दिन समय मांगा और बिना आयोग के समक्ष उपस्थित हुए 28 नवंबर को अपना इस्तीफा दे दिया.
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन ने SI भर्ती रद्द करने के दौरान संगीता आर्य और मंजू शर्मा सहित आयोग के कई सदस्यों पर गंभीर टिप्पणी की थी. जस्टिस समीर ने कहा था कि रामूराम राईका ने अपनी बेटी को इंटरव्यू में अच्छे अंक दिलाने के लिए आयोग के कई सदस्यों को बेटी की फोटो दिखाई, जिसमें डॉ. मंजू शर्मा का नाम भी शामिल था. इस विवाद के बाद आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे. 30 जुलाई 2024 को ACB ने घुमंतू जाति कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे गोपाल केसावत सहित 4 लोगों को RPSC की EO भर्ती परीक्षाओं में पास कराने की एवज में 18 लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था. इस मामले में भी आयोग की सदस्य संगीता आर्य और मंजू शर्मा का नाम भी सामने आया था.
जानकारों के मुताबिक RPSC सदस्य बनाने के पीछे जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश इन तमाम गड़बड़झालों के पीछे की एक बड़ी वजह है. समाजशास्त्री डॉ. राजीव गुप्ता कहते हैं, ''पिछले चार-पांच दशक से सरकारों ने कथित सोशल इंजीनियरिंग साधने के लिए आयोग में जाति और सियासी आधार पर सदस्यों की जो नियुक्तियां की हैं उसका सबसे बड़ा खमियाजा पेपर लीक के तौर पर चुकाना पड़ा है. जब तक सियासी आधार पर नियुक्तियां बंद नहीं होंगी तब तक RPSC की पुरान साख लौटना मुश्किल है.''