राजस्थान में SIR के बाद फर्जी आपत्तियों ने कैसे खड़ा किया सियासी बखेड़ा?
SIR के तहत BJP व कांग्रेस की ओर से मिली आपत्तियों पर नजर डालें तो यह साफ हो जाता है कि सत्तारूढ़ BJP ने नाम कटवाने के लिए विपक्षी पार्टी से ज्यादा दावे पेश किए हैं

राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान अब महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी रणभूमि बन चुका है. मतदाता सूची की साफ-सफाई के नाम पर कई इलाकों में सियासी आधार पर नाम कटने की खबरों ने इस पूरी प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में ला दिया है. SIR प्रक्रिया से जुड़ा एक ऐसा ही एक वाकया 17 जनवरी की शाम जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र में सामने आया.
जयसिंहपुरा खोर के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) कीर्ति कुमार शर्मा और BJP के पार्षद सुरेश सैनी के बीच बातचीत का एक वीडियो वायरल होने लगा जिसमें BLO को डराकर SIR अभियान में दायर की गई आपत्तियों के आधार पर 470 मतदाताओं के नाम काटने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. कीर्ति कुमार ने बताया कि उन्होंने सभी आपत्तियों की जांच के बाद यह पाया कि जिन 470 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, उनके सभी दस्तावेज सही मिले थे और ऐसे में वे उनके नाम कैसे काट सकते हैं.
हवामहल के ही एक अन्य BLO के यहां 158 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां आई थीं. हालांकि, जांच में यह सामने आया कि ये सभी मतदाता इसी इलाके में रहते हैं और SIR के तहत उनका सत्यापन पहले ही हो चुका है. ऐसे में BLO ने उन सभी आपत्तियों को दरकिनार कर दिया.
काबिलेगौर है कि हवामहल विधानसभा क्षेत्र से BJP के बालमुकुंदाचार्य विधायक हैं जो पिछले चुनाव में 974 वोटों के मामूली अंतर से जीते थे. बालमुकुंदाचार्य मुसलमानों के खिलाफ बयानों और कार्रवाई को लेकर कई बार विवादों में घिर चुके हैं. उनके खिलाफ लग रहे इन आरोपों पर बालमुकुंदाचार्य ने कहा, ''लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस ऐसे अनर्गल आरोप लगा रही है. निर्वाचन आयोग जैसी निष्पक्ष ऐजेंसी पर आरोप लगाना कांग्रेस की ओछी मानसिकता का परिचायक है.''
अलवर के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ऊंटवाल गांव में SIR अभियान के तहत अल्पसंख्यक वर्ग के 1397 मतदाताओं के नाम काटने को लेकर आपत्तियां दर्ज होने के मामले ने तूल पकड़ लिया. ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से फर्जी आपत्तियां दर्ज कर उनके नाम काटने की साजिश चल रही है. इसी गांव के नवाब नाम के व्यक्ति के नाम से 106 आपत्तियां डाली गई थीं मगर नवाब ने कहा कि उसने ऐसा कोई आवेदन जमा नहीं कराया.
यह सिर्फ हवामहल और रामगढ़ का मसला नहीं है. SIR अभियान में पूरे राजस्थान में फर्जी आपत्तियां के आधार पर लोगों के नाम कटवाने की शिकायतें मिल रही हैं.
कोटा की कंसुआ अफोर्डेबल हाउसिंग सोसायटी में भी फर्जी आपत्तियां डालकर सैकड़ों लोगों के नाम काटे जाने की शिकायतें मिली हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सैकड़ों की तादाद में ऐसे लोग हैं जिनका ड्राफ्ट सूची और SIR में नाम था मगर अब जो नई लिस्ट आई है उसमें उनके नाम काट दिए गए हैं. कंसुआ के ही नन्हे खान ने बताया कि वह फैक्ट्री में काम करते है. उनका ड्राफ्ट सूची में नाम है. साल 1980 से वोट दे रहे हैं. SIR फॉर्म भी भरा और BLO आकर वेरिफाई किया. इसके बाद भी किसी ने उनका नाम काटने का फर्जी फॉर्म भर दिया गया.
चूरू जिले के सरदारशहर, साहवा व तारानगर में SIR में फर्जी आपत्तियां देकर 500 से ज्यादा लोगों के नाम काटने का मामला सामने आया है. साहवा में कई पीढियों से रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के 244 लोगों के नाम काटे जाने को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई. राजस्थान के प्रतापगढ़, जोधपुर, बाड़मेर, सीकर, श्रीगंगानगर सहित कई जिलों से नाम काटे जाने की इसी तरह की शिकायतें मिली हैं.
SIR अभियान के तहत BJP और कांग्रेस की ओर से मिली आपत्तियों में भारी अंतर ने भी इस अभियान को लेकर संदेह खड़ा किया है. 16 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूचियों के जारी होने के बाद SIR के तहत BJP व कांग्रेस की ओर से मिली आपत्तियों पर नजर डालें तो यह साफ हो जाता है कि BJP ने नाम कटवाने के लिए कांग्रेस से ज्यादा दावे पेश किए हैं.
राजस्थान में 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक नाम जुड़वाने और हटाने के लिए दावे और आपत्तियां स्वीकार किए जा रहे थे. 9 जनवरी तक BJP की ओर से नाम कटवाने के 4 और नाम जुड़वाने के 201 दावे पेश किए गए थे मगर 16 जनवरी को BJP के नाम कटवाने के दावों की संख्या 18 हजार 896 और नाम जुड़वाने के दावों की संख्या 291 तक पहुंच गई. वहीं कांग्रसे ने 9 जनवरी तक नाम जुड़वाने के 185 और नाम कटवाने के 2 दावे किए थे. 16 जनवरी तक कांग्रेस के दावों की संख्या वही रही जो 9 जनवरी को थी. इसी बीच निर्वाचन आयोग ने आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख 19 जनवरी तक के लिए बढ़ा दी. इन्हीं दोनों मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग और BJP पर निशाना साधा.
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने BJP की ओर से दर्ज कराई जा रही आपत्तियों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. गहलोत ने कहा, '' BJP एक वर्ग विशेष के लोगों के नाम हटाने के लिए जिस तरह से झूठी शिकायतों का सहारा ले रही है वह लोकतंत्र का अपमान है. कुछ BLO ने BJP नेताओं की बात मानने से इंकार कर दिया उनके तबादले करने की धमकी दी जा रही है. SIR को BJP ने मजाक बनाकर रख दिया है.'' वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा कहते हैं, ''SIR की अवधि 19 जनवरी तक बढ़ाना कांग्रेस से जुड़े मतदाताओं के नाम काटने की साजिश है. निर्वाचन आयोग भी BJP के इशारे पर काम कर रहा है, कांग्रेस अब इस मामले में कोर्ट जाएगी.''
जयपुर के आदर्श नगर से विधायक रफीक खान ने SIR मैपिंग के बाद अल्पसंख्यक और दलित वर्ग के 8 हजार मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोप लगाए हैं. कांग्रेस पार्षद अकबर खान का नाम कटवाने के लिए भी आवेदन किया गया है. नईमुद्दीन और साबिर अली नामक दो बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने बताया कि उनके नाम, पत्ते व फर्जी हस्ताक्षर के जरिए कई नाम काटने की फर्जी आपत्तियां BLO को भेजी गई हैं जबकि उन्होंने किसी का नाम काटने के लिए एक भी आवेदन नहीं भरा.
रफीक खान का कहना है - ''BJP अपने विरोधियों का नाम कटवाने का अभियान चला रही है. योजनाबद्ध तरीके से BLA या अन्य नामों से फर्जी आपत्तियां दी गई हैं. एक-एक BLA से 500-600 तक नाम कटवाने के लिए फार्म भरवाए गए हैं.''
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि नाम काटने की आपत्ति मिलने और नाम काटे जाने में फर्क है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन का कहना है, ''चुनाव आयोग किसी भी पार्टी या व्यक्ति के दबाव में नहीं बल्कि नियमों के तहत अपना काम कर रहा है. अभी किसी का भी नाम नहीं काटा जा रहा है. नाम काटने से पहले संबंधित वोटर को नोटिस देकर उनका पक्ष जाना जाएगा. किसी भी फर्जी शिकायत के आधार पर किसी का नाम नहीं कटेगा.''