गुजरात के SIR में सबसे ज्यादा नाम काटे गए; निकाय चुनाव पर इसका क्या असर होगा?

गुजरात में स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाताओं की संख्या में 13.4 फीसद की कमी आई है, जो SIR प्रक्रिया वाले कई दूसरे राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

कई महीनों तक घर-घर जाकर जांच, फॉर्म भरवाने और दावे-आपत्ति की सुनवाई के बाद गुजरात में स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है. इस प्रक्रिया के दौरान करीब 68.13 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, क्योंकि वे राज्य में नहीं रहते, कहीं और स्थानांतरित हो गए हैं या उनकी मौत हो चुकी है.

SIR शुरू होने से पहले गुजरात में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 5 करोड़ 8 लाख (5,08,43,436) थी, जो अब अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची में घटकर लगभग 4 करोड़ 40 लाख (4,40,30,725) रह गई है. इसका मतलब है कि मतदाता सूची में  करीब 13.4 फीसद की भारी कमी आई है.

गुजरात में यह प्रक्रिया 2025 के अंत में राष्ट्रव्यापी मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान (SIR) के तहत शुरू हुई थी. चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर नाम नियमों के तहत हटाए गए हैं. सूची से मुख्य रूप से उन्हीं लोगों के नाम हटाए गए हैं जिनके नाम दोहराव में थे, मृत्यु हो चुकी थी, या जो स्थाई रूप से दूसरे राज्य/देश में स्थानांतरित हो गए थे.

इस संशोधन के दौरान, सत्यापन के लिए करीब 10.69 लाख नामों की असंगति सूची (ASD) में चिह्नित की गई थीं, जिनकी जांच पूरी कर ली गई और कई मामलों को सुलझाया गया. ASD का मतलब अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत है. इस श्रेणी में शामिल नामों को SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया जाता है.

आम लोग चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (eci.gov.in) या राज्य पोर्टल पर सूची देखकर दावा-आपत्ति कर सकती है. इसके बाद संबंधित अधिकारी जांच के बाद योग्य नामों को दोबारा सूची में शामिल कर देते हैं. इस प्रक्रिया के बाद गुजरात की मतदाता सूची में 13.4 फीसद की कमी आई है, जो SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाले प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है.

इसके विपरीत, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में यह कमी तुलनात्मक रूप से कम रही. मध्य प्रदेश में करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए (लगभग 5.97-6 फीसद की गिरावट), जबकि राजस्थान में करीब 31-42 लाख (लगभग 5.74 फीसद) मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो आनुपातिक रूप से काफी कम है.

चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों का दावा है कि यह संशोधन हाल के वर्षों में गुजरात की मतदाता सूची की सबसे व्यापक शुद्धिकरण प्रक्रियाओं में से एक है. उनका तर्क है कि फर्जी/दोहराव वाले नामों, मृतकों और स्थाई स्थानांतरण से रोकने के लिए समय-समय पर ऐसे संशोधन आवश्यक हैं ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें.

शहरी क्षेत्रों में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा. अहमदाबाद से लगभग दस लाख, सूरत से 500,000-600,000 और वडोदरा से 300,000-400,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. अहमदाबाद के शहरी विधानसभा क्षेत्रों जैसे घाटलोडिया, एलिसब्रिज, नरोडा और जमालपुर-खाड़िया में बड़ी संख्या में प्रवासी और डुप्लिकेट पंजीकरण वाले नाम हटाए गए.

सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्ष का तर्क है कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि कुछ नगर निगमों द्वारा घनी आबादी वाली बस्तियों/झुग्गी-झोपड़ियों को खाली कराने के तुरंत बाद SIR शुरू की गई, जिससे प्रभावित लोगों (खासकर प्रवासियों) के नाम हटाने में असर पड़ा हो सकता है.

लोकतांत्रिक सुधार संघ से जुड़ी RTI कार्यकर्ता पंक्ति जोग ने कहा, “लोगों के घर ध्वस्त कर दिए गए और उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज खो गए. साथ ही, उन्हें उनके लंबे समय से चले आ रहे निवास स्थान से विस्थापित कर दिया गया. ऐसे में उन्हें अहमदाबाद में ASD श्रेणी में डाल दिया जाएगा. दस्तावेजों के अभाव में वे नए निवास स्थान पर पंजीकरण नहीं करा पाएंगे और इस तरह मताधिकार से वंचित हो जाएंगे.”

जोग ने द्वारका के ASD डेटा का हवाला दिया, जहां तटीय शहर में बड़े पैमाने पर झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने के कारण लगभग 44,000 लोग मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं. हालांकि, अंतिम मतदाता सूचियां अब प्रभावी हो चुकी हैं, जिन व्यक्तियों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, वे निर्धारित प्रपत्रों (जैसे Form 6/7) और अपील प्रक्रिया के माध्यम से अपना नाम वापस दर्ज कराने का अधिकार रखते हैं.

मतदाता सूची से नाम हटाने की इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने कड़ी आलोचना की है. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और Form-7 के माध्यम से दर्ज आपत्तियों को बड़ी संख्या में खारिज किया गया. गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मांग की, “SIR के मसौदा सूची में 74 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे. अंतिम सूची में 9.56 लाख नए मतदाता जोड़े गए और 3.95 लाख नाम हटाए गए. चुनाव आयोग को इन नामों के जुड़ने और हटने का बूथ-वार विवरण सार्वजनिक करना चाहिए.”

सत्ताधारी BJP के प्रवक्ता अनिल पटेल ने विपक्ष पर प्रशासनिक प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक मतदाताओं के लिए दोबारा पंजीकरण कराने के रास्ते खुले हैं. अंतिम मतदाता सूची तैयार हो जाने के बाद, गुजरात मार्च में होने वाले महत्वपूर्ण शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की ओर बढ़ रहा है, जिसके लिए राजनीतिक दलों ने बूथ स्तर पर अपनी रणनीतियों को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद निकाय चुनाव पर इसका असर पड़ सकता है.

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