गुजरात सरकार ने शहरों के लिए खजाना खोला, क्या निगम चुनाव से पहले BJP को मिलेगी बढ़त?

गुजरात के 16 नगर निगमों के चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले भूपेंद्र पटेल सरकार ने शहरों के विकास के लिए 33.5 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट आवंटित किया है, लेकिन क्या इससे BJP को आगामी निगम चुनावों में फायदा मिलेगा?

गुजरात BJP के अध्यक्ष जगदीश ईश्वरभाई विश्वकर्मा  (फाइल फोटो)
गुजरात BJP के अध्यक्ष जगदीश ईश्वरभाई विश्वकर्मा (फाइल फोटो)

18 फरवरी को गुजरात सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया. इस बार भूपेंद्र पटेल सरकार ने शहरों में रहने वाले BJP के सबसे वफादार मतदाताओं के लिए खजाना खोल दिया. बजट में शहरों के विकास के लिए करीब 33,504 करोड़ रुपए देने की बात कही गई है.

आगामी नगर निगम चुनाव से पहले गुजरात सरकार के इस फैसले को शहरी मतदाताओं को रिझाने के लिए फेंकी गई सियासी गूगली के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार ने शहरों की साफ-सफाई और कूड़े की समस्या से निपटने के लिए करीब 330 करोड़ रुपए खर्च करेगी.  

इतना ही नहीं, गुजरात के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बजट में 200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा, बजट में सरकार ने अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों को पास के छोटे शहरों (सैटेलाइट टाउन्स) से जोड़ने पर जोर दिया है.

पटेल सरकार ने 'जीवन धारा' मिशन के तहत 32 शहरी स्थानीय निकायों में जल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. बजट में शहरों के खेल बुनियादी ढांचे के विकास पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है. सरकार चाहती है कि 2030 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाएं. पूरे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाए.

राज्य सरकार अहमदाबाद को ओलंपिक के लिए मेजबान शहर के रूप में तैयार करना चाहती है. यही कारण है कि अहमदाबाद में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए सरकार ने 1,278 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट आवंटित किया है. साथ ही, अहमदाबाद में 90 करोड़ रुपए खर्च कर विश्व स्तरीय हॉकी स्टेडियम बनाने की घोषणा की गई है.

इन शहरों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण के अलावा फ्लाईओवरों के नीचे भी नई और बेहतर खेल व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है. शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए गुजरात हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिसके लिए सरकार 800 करोड़ रुपए खर्च करेगी.

जलवायु-अनुकूल और नई प्रौद्योगिकी वाली सड़कों के लिए आगामी वित्त वर्ष में 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. 'गुजरात वायर-फ्री मिशन' के तहत ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत केबलों में बदलने के लिए सरकार 500 करोड़ रुपए खर्च करेगी.

बजट के प्रमुख बिंदुओं में से एक 50,000 करोड़ रुपए का 'विकसित गुजरात कोष' का बनाया जाना है. इसमें राज्य सरकार ने 2026-27 के लिए 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. इस मद के तहत, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के लिए समर्पित राज्य एक्सप्रेस-वे के विकास हेतु 3,000 करोड़ रुपए दिए जाने की बात कही गई है.

वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने लगातार पांचवीं बार राज्य का बजट पेश करते हुए कहा, “राज्य की 48 फीसद से ज्यादा आबादी शहरों में रहती है. उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्रों के विस्तार के कारण शहरों में तीव्र विकास हो रहा है. स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत बजटीय प्रावधान में 17 फीसद की वृद्धि की गई है.”

बजट में खुलासा हुआ कि अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा के पास आधुनिक सुविधाओं से लैस पांच नए सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे. अहमदाबाद के पास कलोल और सानंद, वडोदरा के पास सावली, सूरत के पास बरदोली और राजकोट के पास हीरासर को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के जरिए जोड़ा जाएगा.
 
वित्त मंत्री देसाई ने कहा, "भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में गुजरात का योगदान 2000-2001 में 5.1 फीसद से बढ़कर 2025-26 में 8.3 फीसद हो गया है. वर्तमान बजट 4.08 लाख करोड़ रुपए का है, जो पिछले बजट की तुलना में 10.2 फीसद ज्यादा है. राज्य में पूंजीगत व्यय का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जो 2021-22 में 25.1 फीसद से बढ़कर 2026-27 में 39 फीसद हो गया. यह सरकार के लंबे समय के विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाता है."

कुल बजट का आकार 2021-22 में 2.27 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 1.8 गुना हो गया है. गुजरात की प्रति व्यक्ति आय लगभग 3 लाख रुपए है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 1.6 गुना अधिक है.इस साल के बजट के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अमेरिका के जरिए लगाए गए भारी टैरिफ के बावजूद, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 10.35 फीसद की वृद्धि हुई है, जो 2024-25 में 27.04 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 29.84 लाख करोड़ रुपए हो गया है.

नगरपालिका चुनाव पहले शहरी बुनियादी ढांचे के लिए सरकार का खजाना खोलना, BJP के स्पष्ट इरादे को दिखाता है. देखने वाली बात यह है कि क्या इन घोषणाओं के बाद जर्जर हो रहे बुनियादी ढांचे और सत्ता विरोधी लहर के बावजूद BJP शहरी स्थानीय निकायों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रख पाएगी?

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