राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बंगाल यात्रा मोदी और ममता सरकार के बीच टकराव का मुद्दा कैसे बनी?
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्य सरकार के बीच संघीय अधिकार और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर टकराव तेज हो गया है

7 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग जिले) में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं. यह एक सामान्य राष्ट्रपति यात्रा होनी चाहिए थी, लेकिन बाद में यह केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच जारी टकराव की एक नई वजह बन गई.
दरअसल, राष्ट्रपति की उत्तरी बंगाल यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल (शिष्टाचार नियमों) को लेकर शिकायतें शुरू हुईं, जो जल्द ही बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गईं. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. केंद्र सरकार और उसके समर्थक इसे राष्ट्रपति पद का अपमान और संवैधानिक पदों का अपमान बताते हैं.
वहीं, राज्य सरकार और उसके समर्थक इसे संवैधानिक पदों का राजनीतिकरण और चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हैं. जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां जैसे कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी इसमें शामिल हो गईं. इसके कारण यह मामला सिर्फ केंद्र बनाम पश्चिम बंगाल का नहीं रहकर पूरे देश में राजनीतिक बहस का एक बड़ा मुद्दा बन गया.
नौवां अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन आदिवासी संगठनों के जरिए आयोजित एक कार्यक्रम था, जिसका उद्देश्य संथाल आदिवासी समुदाय की संस्कृति, इतिहास और चिंताओं पर चर्चा करना था. इस कार्यक्रम में संबोधन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी यात्रा की व्यवस्था में हुई कमियों पर खुलकर नाराजगी जताई.
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य का दौरा करती हैं, तो आमतौर पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों की उपस्थिति अपेक्षित होती है. उनका इशारा स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके किसी भी मंत्री के कार्यक्रम में न आने (या रिसीव न करने) की ओर था.
राष्ट्रपति मुर्मू ने सम्मेलन के आयोजन स्थल में हुए अंतिम समय के बदलाव और वहां कम लोगों की उपस्थिति का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि स्थान बदलने के कारण समुदाय के कई सदस्य सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके. संबोधन के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए ममता बनर्जी को अपनी "छोटी बहन" बताया और पूछा कि क्या बंगाल की मुख्यमंत्री उनसे नाराज हैं?
राष्ट्रपति मुर्मू की इन टिप्पणियों ने तुरंत सियासी बवाल खड़ा कर दिया. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से ब्लू बुक (राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल दिशानिर्देशों वाली गोपनीय किताब) में निर्धारित नियमों के उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा.
केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल प्रशासन से राष्ट्रपति के आगमन पर प्रोटोकॉल के तहत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के मौका पर नहीं होने को लेकर सवाल पूछा है. हवाई अड्डे पर केवल सिलीगुड़ी के मेयर ही मौजूद थे, जिसे केंद्र ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र में कार्यक्रम स्थल में अंतिम समय में हुए बदलाव, राष्ट्रपति के काफिले के मार्ग की व्यवस्था और यात्रा के दौरान अन्य रसद संबंधी मुद्दों पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है.
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि राष्ट्रपति के काफिले के जरिए तय किए गए मार्ग के कुछ हिस्सों में कचरा पड़ा था. उनके लिए व्यवस्थित किए गए शौचालय में पानी की सुविधा नहीं थी. इन आरोपों ने राजनीतिक टकराव को और भड़का दिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना के बाद राजनीतिक माहौल में खासा उबाल आ गया. पीएम मोदी ने TMC प्रशासन पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया और कहा कि देश की जनता, विशेषकर आदिवासी समुदाय के लोग, इस कथित अपमान को माफ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा राजनीति से ऊपर रहनी चाहिए.
BJP नेताओं ने भी तुरंत इस मुद्दे पर ममता सरकार की आलोचना शुरू कर दी है. पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस घटनाक्रम को न केवल राष्ट्रपति बल्कि आदिवासी समुदायों और संविधान का भी अपमान बताया. BJP नेताओं ने तर्क दिया कि यह विवाद तृणमूल कांग्रेस सरकार की संवैधानिक मानदंडों के प्रति अवहेलना को दर्शाता है.
हालांकि, ममता सरकार ने इसपर पलटवार किया है. मतदाता सूची में बदलाव के विरोध में कोलकाता में धरना दे रही ममता ने विरोध मंच से बोलते हुए कहा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले कार्यक्रम के आयोजन के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं थी. उनके अनुसार, यह कार्यक्रम संथाल समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली एक निजी संस्था के जरिए आयोजित किया गया था और प्रशासन ने केवल सुरक्षा और जरूरी रसद सामानों से जुड़ी सहायता प्रदान की थी.
ममता ने यह भी कहा कि वह अपने चल रहे विरोध प्रदर्शन को छोड़कर कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकती थीं. उन्होंने तर्क दिया कि कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी आयोजकों और कार्यक्रम स्थल का प्रबंधन करने वाली एजेंसियों की है. उन्होंने BJP पर विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रपति कार्यालय को राजनीतिक खींचतान में घसीटने का आरोप लगाया.
राजनीतिक बहस का सबसे नाटकीय क्षण तब आया जब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने BJP पर लगे अपमान के आरोप पर पलटवार करने की कोशिश की. अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने 2024 के एक समारोह की तस्वीर दिखाई, जिसमें BJP के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. तस्वीर में मोदी बैठे हुए हैं, जबकि मुर्मू उनके पास खड़ी हैं. ममता ने इस तस्वीर का इस्तेमाल BJP के इस दावे पर सवाल उठाने के लिए किया कि उनकी सरकार ने राष्ट्रपति का अपमान किया है.
उन्होंने कहा, “इस तस्वीर को देखिए. प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति उनके बगल में खड़ी हैं. हम पर आरोप लगाने वालों को पहले अपने आचरण की जांच करनी चाहिए.”अभिषेक ने सार्वजनिक भाषणों में भी उस तस्वीर का जिक्र किया और BJP पर पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाया.
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस ने BJP और TMC दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि यह विवाद सहकारी संघवाद की गहरी दरार को दर्शाता है. हालांकि, कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं ने तर्क दिया कि संवैधानिक पदों को राजनीतिक टकराव में नहीं घसीटा जाना चाहिए और BJP पर चुनावी कारणों से विवाद को हवा देने का आरोप लगाया.
DMK ने BJP की प्रतिक्रिया की आलोचना की. पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रपति के बयान का राजनीतिकरण कर रही है और इस विवाद का इस्तेमाल विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों पर हमला करने के लिए कर रही है. BSP प्रमुख मायावती ने अधिक सतर्क रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन राजनीतिक दलों को इस मुद्दे को पक्षपातपूर्ण लड़ाई में बदलने से बचना चाहिए.
हालांकि, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) से जुड़े कई दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर BJP का समर्थन किया. कुछ का तर्क था कि बंगाल सरकार का रवैया बेहद चिंताजनक हैं क्योंकि मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं और उनके प्रति किसी भी प्रकार का अनादर गंभीर राजनीतिक और प्रतीकात्मक परिणाम ला सकता है.
कई राजनीतिक एक्सपर्ट के मुताबिक, इस टकराव की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल चुनाव है. विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही, BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और TMC प्रशासन के बीच शासन, संघीय अधिकार और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर विवादों के कारण एक बार फिर से टकराव बढ़ते ही जा रहा है.