दिग्विजय सिंह क्यों कर रहे हैं भूख हड़ताल की तैयारी?
कांग्रेस के दिग्गज नेता मध्य प्रदेश में उगने वाले बासमती के लिए 'GI टैग' की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस मुद्दे ने लंबे समय से राज्य के किसानों की कमर तोड़ रखी है

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है कि अगर राज्य में पैदा होने वाले बासमती चावल को 'GI टैग' दिलाने की उनकी मांग केंद्र सरकार ने पूरी नहीं की तो वे भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे.
सिंह ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के बासमती किसानों को GI टैग न मिलने से अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के बासमती किसानों को फायदा हो रहा है, क्योंकि यह कृषि उत्पाद मुख्य रूप से एक्सपोर्ट किया जाता है. उन्होंने कहा कि यह कितनी अजीब बात है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है, जबकि वे करीब दो दशक तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और उनके अपने लोकसभा क्षेत्र विदिशा में बासमती उगाने वाले किसानों की अच्छी-खासी तादाद है.
8 मार्च को कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में उगने वाले बासमती के लिए GI टैग का मुद्दा लंबे समय से लटका हुआ है, जिससे पिछले कई सालों में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में उगने वाले बासमती की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर (600 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल) है. कंपनियां मध्य प्रदेश से बासमती खरीदती हैं और उसे उन राज्यों का बताकर पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट कर देती हैं जिनके पास इस प्रोडक्ट का GI टैग है.
जिन राज्यों के पास बासमती धान के लिए GI टैग है, उनमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली व जम्मू-कश्मीर शामिल हैं.
31 दिसंबर 2013 को GI रजिस्ट्री ने मध्य प्रदेश के बासमती धान के लिए GI टैग को हरी झंडी दे दी थी. लेकिन 'एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी' (APEDA) ने अपीलेट बॉडी में इस फैसले के खिलाफ अपील कर दी, और 2016 में APEDA की दलील को सही मान लिया गया.
यह कानूनी लड़ाई मद्रास हाई कोर्ट गई और जब हाई कोर्ट ने APEDA के पक्ष में फैसला सुनाया, तो मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. फिलहाल यह मामला अदालत में है. राज्य के बासमती को अभी GI टैग मिलना बाकी है, लेकिन इसके एक्सपोर्ट की इजाजत है.
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि दूसरे राज्य मध्य प्रदेश के बासमती धान को GI टैग मिलने का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि इससे वहां की कंपनियों को मध्य प्रदेश से सस्ते दाम पर बासमती खरीदने और उसे महंगे दाम पर बेचने में मदद मिलती है. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने बासमती धान के लिए GI टैग वाले जिलों की संख्या 14 से बढ़ाकर 48 कर दी है और 2030 तक 21 बिलियन डॉलर के बिजनेस का टारगेट रखा है. दूसरी तरफ, श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर और जबलपुर जैसे मध्य प्रदेश के जिलों के बासमती को GI टैग न मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.
मध्य प्रदेश में बासमती धान का कुल उत्पादन करीब 4 लाख टन सालाना आंका गया है. सिंह ने कहा कि वे इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को दो बार खत लिख चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. कांग्रेस नेता ने GI टैग देने के लिए जून तक का अल्टीमेटम तय किया है. इसके बाद वे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री और फिर प्रधानमंत्री के आवास पर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे.