क्या केरल में कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता साबित होंगे वाम दलों के बागी नेता?

कांग्रेस की उम्मीदवारों की सूची में कई प्रभावशाली, असंतुष्ट या पूर्व वामपंथी नेता शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें LDF गठबंधन को करारा झटका देने में सक्षम माना जा रहा है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

आगामी केरल विधानसभा चुनाव में CPI(M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के खिलाफ कांग्रेस आक्रमक तरीके से चुनाव लड़ रही है. चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रभावशाली, असंतुष्ट और पूर्व वामपंथी नेताओं की एक सूची तैयार की है, जिन्हें LDF के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है.

राजनीतिक रणनीतिकार सुनील कनुगोलु ने आंतरिक सर्वे के आधार पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की भारी जीत की भविष्यवाणी की है. हालांकि, केरल में कांग्रेस की सक्रियता को देखकर ऐसा लगता है कि राज्य नेतृत्व इस दावे से ज्यादा मेहनत में भरोसा कर रहा है.
 
कांग्रेस पार्टी इस बार मजबूत रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. इसी योजना के तहत कांग्रेस ने पूर्व कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन के पूर्व निजी सहायक ए. सुरेश को अपनी पार्टी में शामिल कराने की कोशिश की. ए. सुरेश का ध्यान मलम्पूझा विधानसभा सीट पर है, जिसका प्रतिनिधित्व अच्युतानंदन ने 2001 से 2021 तक किया था.

कांग्रेस का मानना ​​है कि सुरेश अच्युतानंदन के वफादारों के वोट हासिल करके LDF के इस गढ़ में बदलाव लाया जा सकता है. हालांकि, सुरेश अपने रुख पर अडिग हैं. उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, “कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुझसे संपर्क किया और सीट की पेशकश की है, लेकिन मैं वामपंथी था और वामपंथी ही रहूंगा.” मलाम्पुझा में उठाए गए कदम के बारे में पूछे जाने पर विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने मीडिया को बताया कि वे बातचीत का खुलासा नहीं कर सकते.

1967 में विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से ही मलम्पूझा वामपंथी दलों का गढ़ रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ई.के. नयनार भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. विधायक अच्युतानंदन के कार्यकाल के दौरान सुरेश ही उनके लिए इस क्षेत्र से संपर्क का मुख्य जरिया थे. कांग्रेस सुरेश को उम्मीदवार बनाकर इसका फायदा उठाना चाहती है.

सुरेश को हराना मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन अब देखना ये है कि उन्हें वाम दलों से टिकट मिलता है या नहीं. उनके खिलाफ कांग्रेस के पास भी आयशा पोट्टी हैं, जो CPI(M) की पूर्व विधायक हैं. आयशा 2006 से 2021 तक कोट्टारक्कारा सीट से सांसद रहीं. आयशा पिछले महीने ही पार्टी में शामिल हुई हैं और ए. सुरेश के पार्टी में नहीं शामिल होने की स्थिति में उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र से उन्हें उम्मीदवार बनाया जा सकता है.

कांग्रेस, CPI(M) से निष्कासित नेता वी. कुन्हीकृष्णन को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है. कुन्हीकृष्णन ने कुछ ही दिन पहले एक किताब जारी की है, जिसमें उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी के नेताओं के जरिए धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.

कांग्रेस कुन्हीकृष्णन को पय्यानूर सीट से मैदान में उतारना चाहती है, जहां उनका अच्छा खासा जनसमर्थन है. पय्यानूर सीट हमेशा से ही वामपंथी दलों का गढ़ रही है. कांग्रेस ने पूर्व CPI(M) सांसद और विधायक के. सुरेश कुरुप को अपने पाले में लाने के प्रयास किए, जो विफल रहे. कुरुप 1984, 1998, 1999 और 2004 में कोट्टायम से लोकसभा सांसद रहे थे. वे 2011 से 2021 तक एट्टुमानूर से विधायक रहे. कुरुप ने कहा, "मैं एक विनम्र पार्टी कार्यकर्ता हूं और विधानसभा चुनाव लड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है."

पलक्कड़ से कांग्रेस सांसद वीके श्रीकंदन ने कहा कि यह रणनीति 2021 में वडाकारा सीट के लिए अपनाई गई रणनीति के समान है. पार्टी ने दिवंगत CPI (M) नेता टीपी चंद्रशेखरन की विधवा केके रेमा को UDF उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारकर CPI(M) के गढ़ में सेंध लगाई थी. उन्होंने कहा, "CPI(M) के बागी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की हमारी रणनीति से हमें भरपूर लाभ मिलना चाहिए क्योंकि जिन सीटों को हम लक्षित कर रहे हैं वे CPI(M)के पारंपरिक गढ़ हैं."

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