माओवादियों के गुप्त ठिकानों से क्या-क्या बरामद हो रहा?

छत्तीसगढ़ में सरेंडर कर चुके माओवादियों से ही जंगल के भीतर बने उनके गुप्त ठिकानों की जानकारी मिल रही है

West Singhbhum Naxal encounter
सांकेतिक फोटो

छत्तीसगढ़ में लगभग सभी माओवादियों ने सरेंडर कर दिया है. अब सरेंडर कर चुके माओवादियों ने पुलिस को अपने ठिकानों और वहां रखे पैसे, सोने, हथियार आदि की जानकारी देनी शुरू की है. माओवादियों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस हर दिन उनके गुप्त ठिकानों पर जाकर सामान बरामद कर रही है.

बीते 12 मई को अबूझमाड़ इलाके के नारायणपुर जिले में चलाए जा रहे 'माड़ बचाओ अभियान' के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी और निर्णायक सफलता मिली. सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने जंगल में छिपाकर रखे गए नक्सलियों के अड्डे से 1 करोड़ 1 लाख 64 हजार की नकद राशि बरामद की.

इसके अलावा मौके से AK-47, SLR, 303 और 315 राइफल, 12 बोर बंदूक, देसी कट्टा सहित कई हथियार और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस मिले हैं. 31 मार्च 2026 के बाद की यह सबसे बड़ी बरामदगी है. पुलिस अधीक्षक (SP) रोबिनसन गुड़िया ने बताते हैं, "इस कार्रवाई के बाद वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 270 हथियारों की रिकवरी हो चुकी है. यह आंकड़ा बताता है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों के प्रति ग्रामीणों का विश्वास बढ़ा है और नक्सल उन्मूलन अभियान लगातार प्रभावी साबित हो रहा है."

वहीं बीजापुर जिले में भी अब तक 65.52 लाख कैश बरामद किया गया है. सुरक्षा बलों ने अब तक कुल 7.2852 करोड़ नकद और 8.20 किलोग्राम सोना (मूल्य 12.80 करोड़) सहित कुल 20 करोड़ 08 लाख 52 हजार की संपत्ति बरामद की गई है. बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बीजापुर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा एवं केरिपु बल की संयुक्त कार्रवाई में पूर्व माओवादी ठिकानों/डंपों से LMG, SLR, कार्बाइन राइफल सहित 32 हथियार एवं नक्सल संबंधी सामग्री बरामद की गई है. वहीं साल 2024 से अब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कुल 517 हथियार बरामद किए जा चुके हैं.

बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया है, "हाल के दिनों में चलाए गए तलाशी अभियानों में करीब 6.75 करोड़ रुपए नकद और 8 किलो सोना बरामद किया गया है." केंद्र सरकार ने माओवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की थी.  अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है. जांच में सामने आया है कि नोटबंदी के बाद नक्सलियों ने लेवी और जबरन वसूली से इकट्ठा किए गए कैश को सोने में बदलना शुरू कर दिया था, जिसे बाद में जमीन के नीचे ड्रमों और गुप्त गड्ढों में छिपा दिया गया.

खुफिया विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि नक्सली मुख्य रूप से तेंदूपत्ता व्यापारियों, ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों से वसूली कर अपना फंड जुटाते थे. पुलिस को इन गुप्त ठिकानों का पता लगाने में उन आत्मसमर्पित नक्सलियों से बड़ी मदद मिल रही है जो अब मुख्यधारा में लौटकर पुनर्वास नीति का फायदा उठा रहे हैं.  हालांकि बहुत से बड़े नक्सली नेताओं के मुठभेड़ में मारे जाने के कारण कई ठिकानों की जानकारी उनके साथ ही दफन हो गई है.

पुलिस से ही लूटे गए थे हथियार

सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक साल 2001 से 2024 के बीच माओवादी प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों से कुल 516 स्वचालित हथियार लूटे गए थे. इनमें से सुरक्षा बल केवल 111 स्वचालित हथियार ही बरामद कर सके जो कुल लूटे गए हथियारों का लगभग 21.5 फीसद है. इस दौरान कम से कम 184 AK-47 राइफलें लूटी गईं, जिनमें से केवल 23 ही बरामद हो सकीं.

इसी अवध में सुरक्षा बलों से 159 सेल्फ-लोडिंग राइफलें (SLR) लूटी गईं जिनमें से पुलिस केवल 40 ही वापस पा सकी है. इसके अलावा लूटी गईं कुल 168 INSAS राइफलों में से 2001 से 2024 के बीच सुरक्षा बल सिर्फ 37 ही बरामद कर पाए.

हालांकि, सुरक्षा बल 9 मिमी और 4 मिमी की लूटी गई पिस्तौलों में लगभग 80 फीसदी बरामद करने में सफल रहे. इन पिस्तौलों की संख्या क्रमशः आठ और छह थी. आंकड़ों के अनुसार पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों ने चार लाइट मशीन गन, 17 BGL लॉन्चर और कुल 1,947 देसी हथियार भी बरामद किए.

बस्तर में हथियार लूट की सबसे बड़ी घटना 15 मार्च 2007 को हुई थी, जब बीजापुर के रानी बोडली में माओवादियों ने कथित तौर पर 55 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद 145 हथियार लूट लिए थे. इनमें 125 स्वचालित राइफलें थीं. वहीं पिछले दो दशकों में किसी एक वर्ष में सबसे कम हथियार लूटे जाने की संख्या 2001 में तीन रही.

आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक हथियार 2017 में सुकमा के बुर्कापाल हमले के दौरान लूटे गए थे जिसमें 25 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. इस घटना में माओवादियों ने कुल 35 हथियार लूटे, जिनमें 21 AK-47 राइफलें थीं. वहीं, 2020 में माओवादियों ने दो अभियानों में 32 हथियार लूटे थे.

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