वर्दी से वैराग्य और फिर सियासत की भेंट : कौन थे सुवेंदु के 'एक्शन मैन' चंद्रनाथ?
सुवेंदु अधिकारी के खास सिपहसालार रहे चंद्रनाथ रथ की 6 मई की रात कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा की खबरें नई नहीं हैं लेकिन कुछ हत्याएं सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं रहतीं. वे सत्ता, वैचारिक बदलाव, निजी रिश्तों और राजनीतिक टकराव की ऐसी परतें खोलती हैं जो किसी थ्रिलर फिल्म जैसी लगती हैं. BJP नेता सुवेंदु अधिकारी के खास सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या भी कुछ ऐसी ही कहानी है.
चंद्रनाथ रथ कोई सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे. वे सुवेंदु के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे. बंगाल BJP के भीतर उन्हें एक शांत लेकिन बेहद प्रभावी रणनीतिकार माना जाता था. पार्टी के अंदर कई लोग उन्हें 'एक्शन मैन' कहते थे. वजह बताई जाती है कि चंद्रनाथ बोलने से अधिक काम करने में भरोसा करते थे.
इसकी एक वजह ये भी थी कि बंगाल BJP के सबसे प्रभावी नेता के सबसे ख़ास लोगों में गिने जाने वाले चंद्रनाथ ने हमेशा कैमरे से दूर रहकर संगठन और राजनीतिक समन्वय संभालने का काम किया.
वायु सेना से रामकृष्ण मिशन तक
41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ जीवन के शुरूआती दिनों से राजनीति में नहीं थे. उनका जन्म पूर्व मेदिनीपुर के चांदीपुर इलाके में हुआ था. ये वही इलाका है जिसने सुवेंदु अधिकारी की राजनीति को भी आकार दिया. रथ ने रहड़ा रामकृष्ण मिशन से पढ़ाई की और फिर भारतीय वायुसेना में भर्ती हो गए. करीब दो दशक तक उन्होंने एयरफोर्स में सेवा दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रथ बेहद अनुशासित और कम बोलने वाले व्यक्ति माने जाते थे.
एयरफोर्स की नौकरी के दौरान ही उन पर अध्यात्म का प्रभाव गहरा हुआ. रामकृष्ण मिशन से उनका जुड़ाव सिर्फ छात्र जीवन तक सीमित नहीं रहा. बताया जाता है कि उन्होंने एक समय वैराग्य का रास्ता भी चुन लिया था और संन्यास जैसी जीवनशैली अपनाई थी. यही बात उनकी प्रोफाइल को बाकी राजनीतिक चेहरों से अलग बनाती है. लेकिन जिंदगी ने फिर मोड़ लिया.
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया. बाद में रथ धीरे-धीरे राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ने लगे. यहीं पर उनकी नजदीकी सुवेंदु से बढ़ी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के आसपास वे आधिकारिक तौर पर सुवेंदु की टीम का हिस्सा बने और जल्द ही उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने लगे.
परिवार का तृणमूल से नाता
चंद्रनाथ का पारिवारिक राजनीतिक इतिहास भी दिलचस्प है. सुवेंदु अधिकारी की तरह उनका परिवार भी पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ था. उनकी मां हासी रथ स्थानीय पंचायत और निकाय राजनीति में सक्रिय रही थीं. बाद में 2020 में जब सुवेंदु अधिकारी ने TMC छोड़कर BJP जॉइन की, तब चंद्रनाथ रथ का परिवार भी BJP में आ गया.
इसके बाद बंगाल BJP में चंद्रनाथ रथ की प्रोफाइल और जिम्मेदारियों का दायरा तेजी से बढ़ने लगा. रथ सिर्फ निजी सहायक नहीं थे. वे चुनावी रणनीति, स्थानीय संगठन, नेताओं के बीच समन्वय और राजनीतिक प्रबंधन जैसे काम भी संभालते थे. खास तौर पर भवानीपुर सीट पर BJP की रणनीति में उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, रथ भवानीपुर में BJP के आक्रामक कैंपेन मैनेजमेंट के प्रमुख चेहरों में शामिल थे. यहीं से उनकी कहानी बंगाल की सबसे चर्चित राजनीतिक भिड़ंतों में से एक से जुड़ जाती है.
भिड़ंत ममता के काफ़िले से
2026 के हालिया चुनावों के दौरान मतगणना से पहले जब ममता बनर्जी स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा करने पहुंचीं तब वहां BJP और TMC कार्यकर्ताओं के बीच जबरदस्त तनाव पैदा हो गया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रनाथ रथ उस समय BJP की ओर से मोर्चा संभाल रहे थे. मामला इतना बढ़ा कि CRPF को दखल देना पड़ा. उसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई थी. उसके बाद दोनों तरफ से राजनैतिक बयान भी जारी किए गए थे.
अब उनकी हत्या के बाद उस पुराने टकराव को फिर से याद किया जा रहा है. सुवेंदु अधिकारी ने हत्या के बाद दिए अपने बयान में कहा है कि ममता बनर्जी को हराने की वजह से उनके सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या की गई और इसके दोषियों को BJP किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगी.
6 मई की रात उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम इलाके में बाइक सवार हमलावरों ने चंद्रनाथ की कार रोक कर बेहद नजदीक से गोलियां चलाईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके सीने में कई गोलियां लगीं और अत्यधिक खून बहने के कारण उनकी मौत हो गई. BJP ने इसे बदले के लिए की गई हत्या बताया है. खुद सुवेंदु अधिकारी ने इसे 'कोल्ड ब्लडेड और प्री-प्लान करके किया गया मर्डर' कहा और आरोप लगाया कि रथ की कई दिनों से रेकी की जा रही थी.
घटना के बाद बंगाल पुलिस ने SIT गठित की है और CID जांच भी शुरू हो चुकी है. दूसरी तरफ, TMC ने हत्या की निंदा करते हुए आरोपों को खारिज किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
लेकिन इन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच सबसे अलग चीज है चंद्रनाथ रथ का जीवन. एक ऐसा आदमी जो पहले सैनिक था, फिर अध्यात्म की तरफ गया, फिर राजनीति में आया और अंत में बंगाल की हिंसक राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गया.
रथ मर्डर केस बंगाल की हालिया राजनीति का एक प्रतीक बन गया है. तृणमूल कांग्रेस की तरफ से दिए जा रहे बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स में चंद्रनाथ रथ पर भी हिंसा से चुनाव मैनेजमेंट करने के आरोप लग रहे हैं. बंगाल पुलिस ने अब तक इस मामले की जांच में हमलावरों की मोटर साइकिल बरामद की है लेकिन रिपोर्ट्स हैं कि उसके नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ की गई थी. दोनों ही पक्ष मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं लेकिन बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन के बीच इस हत्या की जांच रिपोर्ट कब तक आ सकेगी यह देखने वाली बात होगी.