भारत के सबसे अमीर नगर निगम की पूरी कमान अब महिलाओं के हाथों में!
IAS अधिकारी अश्विनी भिड़े को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का आयुक्त नियुक्त किया गया है. BMC में भिड़े के अलावा, महापौर और विपक्ष की नेता भी महिलाएं ही हैं

भारत के सबसे अमीर नगर निकाय, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में महिला राज की शुरुआत हो चुकी है. वरिष्ठ IAS अधिकारी अश्विनी भिड़े को नगर आयुक्त नियुक्त किए जाने के साथ ही वे BMC के इस ताकतवर पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बन गई हैं.
उन्होंने 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए भूषण गगरानी का स्थान लिया है. भिड़े अब BJP की महापौर ऋतु तावड़े और विपक्ष की नेता शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की किशोरी पेडणेकर के साथ मिलकर काम करेंगी. इस तरह BMC के तीनों प्रमुख ताकतवर पदों पर महिलाओं का कब्जा हो गया है.
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी, अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर और असीम कुमार गुप्ता जैसे नौकरशाहों के नाम भी इस पद के दावेदारों में थे, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव रही अश्विनी भिड़े को यह जिम्मेदारी मिली है. इस तरह भिड़े 81,000 करोड़ रुपए के बजट वाले देश के सबसे अमीर निगम के काम-काज को संभालेंगी.
महाराष्ट्र कैडर की 1995 बैच की IAS अधिकारी सांगली जिले की रहने वाली हैं. 55 वर्षीय भिडे के पास MBA और अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री है. उन्होंने कोल्हापुर में सहायक जिला कलेक्टर, नागपुर और सिंधुदुर्ग जिला परिषदों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, MMRDA में अतिरिक्त महानगर आयुक्त, 2015-20 तक मुंबई मेट्रो रेल निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक और BMC में अतिरिक्त नगर आयुक्त के रूप में कार्य किया है.
यह भी दिलचस्प संयोग है कि उनके पति डॉ. सतीश भिडे, जो एक चिकित्सक से IAS अधिकारी बने, BMC में संयुक्त आयुक्त रह चुके थे. हालांकि, बाद में निजी क्षेत्र में शामिल होने के लिए उन्होंने सेवा छोड़ दी. भिडे के साथ काम कर चुके अधिकारी उन्हें एक जुझारू और दृढ़ निश्चयी महिला बताते हैं जो परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देती हैं.
मुंबई में कोलाबा से SEEPZ (सांताक्रूज़ इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र) तक चलने वाली मेट्रो-3 या 'एक्वा लाइन' को चलाने का श्रेय व्यापक रूप से भिडे को ही जाता है. 2014-19 तक फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान, आरे मिल्क कॉलोनी में परियोजना के लिए कार शेड के स्थान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इस परियोजना में भी भिड़े अहम भूमिका निभा रही थीं. इस परियोजना के लिए शहर के हरे-भरे क्षेत्र में 2,600 से अधिक पेड़ों की कटाई की आवश्यकता थी. भिडे ने इस निर्णय का दृढ़ता से बचाव किया और सोशल मीडिया पर भी इस कदम के आलोचकों को डटकर जवाब दिया.
विवाद के बाद यह मामला कोर्ट पहुंचा था. अक्टूबर 2019 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कार डिपो के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया. इसके कुछ घंटों बाद ही अधिकारियों ने पेड़ों की कटाई शुरू कर दी. इस फैसले के चलते पर्यावरणविदों और अविभाजित शिवसेना (जो फडणवीस सरकार का हिस्सा थी) ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया.
शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस फैसले का विरोध किया था. पेड़ों की कटाई को ठाकरे परिवार को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा गया. अधिकारियों ने दावा किया था कि आरे का इलाका जंगल की पारंपरिक परिभाषा में नहीं आता है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार के 2019 में गठन के बाद भिडे को दरकिनार कर दिया गया था. हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें BMC में वापस लाया गया था.
नगर निगम प्रमुख के रूप में भिडे के सामने कई चुनौतियां होंगी. इनमें से एक है वार्ड स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार से निपटना, जो जनता को मिलने वाली सेवाओं को प्रभावित करता है. उन्हें शहर भर में फैले अवैध फेरीवालों पर भी लगाम लगानी होगी. विडंबना यह है कि जहां एक ओर शहर ने 337 किलोमीटर लंबे मेट्रो रेलवे नेटवर्क का निर्माण शुरू कर दिया है, वहीं बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन उपक्रम (BEST) के जरिए संचालित नगर निगम बस सेवा की हालत खराब होती जा रही है. इसे कभी भारत की सर्वश्रेष्ठ बस सेवा कहा जाता था.
इससे कामकाजी वर्ग के लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जो मेट्रो जैसे महंगे विकल्पों का खर्च वहन नहीं कर सकते. BEST नगर निगम के जरिए संचालित उपक्रम है और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए इसे बड़ा भारी फंड चाहिए. शहर में बढ़ती शहरी आबादी, खुले और मनोरंजक स्थानों की कमी, पैदल चलने की कठिन सुविधा और विकलांगों के लिए अपर्याप्त पहुंच के कारण गरीबों और मध्यम वर्गों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां बढ़ती जा रही हैं.
BMC की स्थापना 1807 में हुई थी, जब दो मजिस्ट्रेट और एक शांति न्यायाधीश वाली एक छोटी अदालत का गठन किया गया. BMC का गठन 1865 में हुआ और विवादास्पद लेकिन अपने काम में माहिर आर्थर क्रॉफर्ड को पहला आयुक्त नियुक्त किया गया था. 1872 में 64 सदस्यों वाली एक नियमित निगम का गठन किया गया, जिसमें मतदाता करदाता थे.
1922 में करदाताओं के साथ किरायादाताओं को भी मतदान का अधिकार दिया गया और 1948 में पहली बार वयस्क मताधिकार के साथ चुनाव हुए. 1950 से नगर निकाय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार उपनगरों को भी शामिल करने के लिए किया गया. तब तक, बांद्रा जैसे उपनगरों का अपना नगर निकाय था, जबकि गोरेगांव में एक ग्राम पंचायत थी.
एमजी पिंपुटकर, जेबी डिसूजा, बीजी देशमुख, डीएम सुखनकर, जमशेद जी. कांगा और सदाशिवराव तिनाइकर जैसे दिग्गज सिविल सेवा अधिकारी नगर निकाय के शीर्ष पदों पर रहे हैं. 2022 में पिछली निर्वाचित विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद BMC नगर आयुक्त-सह-प्रशासक के नियंत्रण में आ गई थी. इसके बाद इकबाल सिंह चहल और भूषण गगरानी जैसे अधिकारियों ने BMC आयुक्त के तौर पर निगम के काम-काज को संभाला.