ओडिशा में राज्यसभा की चौथी सीट की पहेली; नवीन पटनायक कांग्रेस का साथ देंगे या BJP का?

ओडिशा में बड़े सियासी उलटफेर के बीच राज्यसभा की 'एक सीट' के लिए साथ आ सकते हैं धुर विरोधी BJD और कांग्रेस

नवीन पटनायक (फाइल)
नवीन पटनायक (फाइल)

ओडिशा की सियासत में बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस, दोनों ही विपक्ष में हैं लेकिन उनकी राहें अक्सर जुदा रही हैं. सदन में दोनों एक तरफ बैठते जरूर हैं लेकिन सुर एक नहीं होते. विपक्ष के इस बिखराव का सीधा फायदा अब तक बीजेपी को मिलता रहा है. लेकिन आगामी राज्यसभा चुनाव में यह तस्वीर बदल सकती है.

राज्य में राज्यसभा की 4 सीटों के लिए चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. चुनाव आयोग ने प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं. लेकिन पेंच ‘चौथी सीट’ पर फंस गया है, जिसके लिए धुर विरोधी मानी जाने वाली कांग्रेस और बीजेडी के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है.

आगामी 2 अप्रैल को ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटें खाली हो रही हैं. इनमें बीजेडी कोटे से निरंजन बिशी और मुजिबुल्ला खान (मुन्ना खान) तो वहीं बीजेपी कोटे से सुजीत कुमार और ममता मोहंता का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इन्हीं सीटों को भरने के लिए सियासी बिसात बिछाई जा रही है.

कांग्रेस की पहल: क्या पिघलेगी बर्फ?

ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने फरवरी के पहले हफ्ते में नेता प्रतिपक्ष और बीजेडी सुप्रीमो नवीन पटनायक से मिलने का समय मांगा है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस का प्रस्ताव है कि बीजेपी के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए एक ‘संयुक्त उम्मीदवार’ उतारा जाए. यह कोई प्रतिष्ठित हस्ती हो सकती है.

भक्त चरण दास का कहना है, “हम और बीजेडी दोनों विपक्षी दल हैं. अगर हम एकजुट होते हैं तो एक उम्मीदवार जीत सकता है. हालांकि हमें यह नहीं पता कि वे हमारे साथ हाथ मिलाएंगे या नहीं, लेकिन मैंने नवीन पटनायक से चर्चा के लिए समय मांगा है.”

BJD का रुख: 'वेट एंड वॉच'

नवीन पटनायक अपनी कांग्रेस विरोधी राजनीति और बीजेपी के प्रति 'सॉफ्ट कॉर्नर' के लिए जाने जाते हैं. यही वजह है कि बीजेडी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. पार्टी प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, “पीसीसी अध्यक्ष क्या कहना चाहते हैं, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है. समाज के हर तबके के लोग और सभी राजनीतिक दलों के नेता नवीन बाबू से मिलते रहते हैं. बीजेडी अध्यक्ष राज्यसभा चुनाव को लेकर अपना रुख उचित समय पर स्पष्ट करेंगे.”

नंबर गेम: 30 का जादू और अधूरी गणित

आखिर गठबंधन की नौबत क्यों आई? इसे समझने के लिए विधानसभा का नंबर गेम देखना होगा. राज्यसभा जीतने के लिए एक उम्मीदवार को 30 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है.

BJP की स्थिति: 147 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास 79 विधायक हैं (+3 निर्दलीय). यानी कुल 82 वोट. दो सीटें जीतने (30+30=60) के बाद बीजेपी के पास 22 अतिरिक्त वोट बचेंगे.

BJD की स्थिति: बीजेडी के पास 48 विधायक हैं (2 निलंबित). कुल मिलाकर करीब 50 वोट. एक सीट जीतने (30 वोट) के बाद बीजेडी के पास 20 अतिरिक्त वोट बचेंगे.

Congress की स्थिति: कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं (+1 सीपीएम). कुल 15 वोट.

संकट चौथी सीट का है क्योंकि इसे जीतने के लिए किसी के पास भी पूरे 30 वोट नहीं हैं.

बीजेपी के पास 22 हैं (8 कम).

बीजेडी के पास 20 हैं (10 कम).

कांग्रेस के पास 15 हैं (15 कम).

ऐसे में, अगर बीजेडी (20 सरप्लस) और कांग्रेस (15 वोट) मिल जाएं, तो उनके पास कुल 35 वोट हो जाएंगे और वे आसानी से चौथी सीट जीत सकते हैं. यही वो गणित है जिसने बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है.

BJP का दावा: खेल अभी बाकी है

नंबर कम होने के बावजूद सत्तारूढ़ बीजेपी ने हथियार नहीं डाले हैं. राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने दावा किया है, "हम एक और सीट जीतेंगे, यह कैसे होगा, मैं अभी नहीं बता सकता." राज्य के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री केसी पात्रा ने कहा, "कोई नहीं जानता आगे क्या होने वाला है. राजनीति में बड़े दांव-पेंच और चालों का अनुमान लगाना मुश्किल होता है, इसलिए इंतजार करना होगा. राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है."

वहीं, मंत्री सुरेश पुजारी ने तो यहां तक संकेत दे दिया कि जरूरत पड़ी तो वे बीजेडी से भी समर्थन मांग सकते हैं.

अब सबकी निगाहें नवीन पटनायक पर टिकी हैं. क्या वे अपने पुराने 'सॉफ्ट कॉर्नर' के तहत बीजेपी की मदद करेंगे या विपक्ष को मजबूत करने के लिए कांग्रेस का हाथ थामेंगे? फैसला इसी पर निर्भर करेगा.

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