एक और सांसद के इस्तीफे से BJD का संकट गहराया; पांडियन फैक्टर पड़ रहा भारी?
बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने 25 मई को पार्टी से इस्तीफा देते हुए नवीन पटनायक के करीबी रहे वीके पांडियन पर आरोप लगाए हैं

बीजू जनता दल (BJD) और मुश्किल, ये दोनों फिलहाल साथ चल रहे हैं. सत्ता ने BJD का साथ छोड़ा तो मुश्किल ने हाथ थाम लिया. नई मुश्किल के तौर पर एक और सांसद का इस्तीफा सामने आया है. 25 मई को BJD को एक और झटका लगा. पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. पार्टी के राज्यसभा में कुल छह सांसद थे जो अब घटकर पांच रह गए हैं.
इस इस्तीफे की वजह के तौर पर एक बार फिर नवीन पटनायक के सबसे करीबी वीके पांडियन का नाम सामने आया है. इस्तीफे के बाद सामंतराय ने कहा कि वीके पांडियन के सक्रिय राजनीति से दूर होने की घोषणा के बाद भी पर्दे के पीछे से वही पार्टी चला रहे हैं.
इससे पहले नवंबर, 2025 में समंतराय ने BJD वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था. उस समय भी उन्होंने पार्टी के कामकाज पर असंतोष जताया था. बता दें इससे पहले दो अन्य राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार और ममता महंता भी BJD से इस्तीफा दे चुके हैं और बाद में BJP ने दोनों को राज्यसभा का सांसद बना दिया. सामंतराय को लेकर भी यही चर्चा है कि वे BJP जाएंगे.
उन्हें नवीन पटनायक का करीबी माना जाता था. अपना इस्तीफा पत्र भेजते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें सुनियोजित रूप से अपमानित महसूस कराया गया और पार्टी को अब उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं रही. इस्तीफा देने के बाद समंतराय ने कहा, “आज सुबह मैंने BJD से अपना इस्तीफा दे दिया. मैंने BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक को पत्र लिखकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है. मैंने राज्यसभा के सभापति और उपसभापति से मुलाकात कर राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा सौंप दिया है.” साथ ही उन्होंने राज्यसभा भेजने और अविभाजित कटक जिले तथा ओडिशा के लोगों की राष्ट्रीय स्तर पर सेवा करने का अवसर देने के लिए नवीन पटनायक का आभार भी जताया
ऐसे में अहम सवाल यह है कि BJD के सत्ता से दूर रहने के विभिन्न कारणों में से एक वीके पांडियन का होना भी रहा और उन्हीं की वजह से अब एक-एक कर सांसद व अन्य कार्यकर्ता पार्टी छोड़ रहे हैं. फिर भी नवीन पटनायक अब भी उन्हीं पर सबसे अधिक विश्वास क्यों कर रहे हैं? वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रवि दास कहते हैं, “पार्टी के लगातार टूटने की वजह पांडियन हो सकते हैं लेकिन सामंतराय के मामले में वे पूरी तरह जिम्मेदार नहीं दिखते. क्योंकि साल 2019 में समंतराय के विधानसभा चुनाव हारने के बाद पांडियन ने तय किया था कि 2024 में उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं देना है बल्कि राज्यसभा भेजना है. यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई. दूसरी बात, राज्यसभा में वक्फ बिल पर उन्होंने उपस्थित होने के बजाय विरोध में वोट कर दिया था.”
वे आगे कहते हैं, “यह बात सौ फीसदी सही है कि BJD पर अब भी वास्तविक नियंत्रण पांडियन का ही है. नवीन पटनायक को पांडियन के इतर अपने उत्तराधिकारी के बारे में सोचना होगा. साथ ही समय रहते उसका ढांचा तैयार करना होगा. वरना BJP इसी ताक में है कि राज्य के लोगों के लिए असली BJD वही बन जाए. ताकि आम जन विकल्प के तौर पर BJD के बारे में विचार न करे.”
BJD ने किया कड़ा पलटवार, बताया नशेड़ी
BJD सांसद देबाशीष सामंतराय के इस्तीफे पर BJP सांसद रबिंद्र नारायण बेहरा ने कहा, “इस समय ओडिशा में BJD एक-एक कर अपने विकेट खो रही है. BJD शासन के दौरान अच्छा प्रशासन नहीं था. पार्टी के भीतर हर कोई घुटन महसूस कर रहा था. अब जब BJP की ‘डबल इंजन’ सरकार सत्ता में आई है तो ओडिशा में सुशासन कायम हो रहा है. उम्मीद है कि वे BJP में शामिल होंगे. अगर वे पार्टी में आते हैं तो पार्टी उनके बारे में जो भी फैसला लेगी हम उसका दिल से स्वागत करेंगे.”
इस संभावित स्वागत से पहले BJD ने सामंतराय को पार्टी में सम्मान को याद दिलाया साथ ही कई गंभीर आरोप भी लगाए. पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने कहा, “नवीन पटनायक ने उन्हें विधायक बनाया, फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया, कटक जिला BJD अध्यक्ष बनाया और बाद में राज्यसभा भेजा. इतने अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया.”
उन्होंने कहा, “BJP की एक ‘वॉशिंग मशीन’ है, शायद उन्हें लगता है कि वह उनके सारे गड़बड़झाले साफ कर देगी. वे ज्यादातर समय नशे की हालत में रहते हैं. पार्टी ने उन्हें कई बार नशीले पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी थी. संभव है कि उन्होंने कुछ गैरकानूनी काम किए हों और अब अपने मामलों को साफ करवाने के लिए BJP की ओर जा रहे हों. यह भी हो सकता है कि उन्होंने अपने कारोबार को फायदा पहुंचाने के लिए BJD छोड़ी हो.”
प्रमिला मलिक कहती हैं, “ऐसे लोगों के पार्टी छोड़ने से संगठन बेहतर तरीके से काम करता है. वे पार्टी का फायदा उठाते हैं और फिर छोड़ देते हैं. ऐसे लोग सच्चे राजनेता नहीं होते और उन्हें राजनीति से दूर रहना चाहिए. चुनाव हारने के बाद उन्होंने अपना असली रंग दिखाया और BJP की ‘वॉशिंग मशीन’ से खुद को साफ करवाने चले गए.”
वहीं BJD के प्रवक्ता लेनिन मोहंती कहते हैं, “कटक जिला BJD अध्यक्ष रहने के बावजूद वे अपनी ही वजहों से दो बार चुनाव हार गए. हमें हैरानी है कि पार्टी से सारे लाभ लेने के बाद शायद अपने कारोबारी हितों के लिए समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से अब वे BJP में शामिल होने जा रहे हैं. पिछले चार वर्षों में पार्टी के लिए उनका योगदान सीमित रहा. उन्होंने हमारे साथ रहते हुए कई महत्वपूर्ण पद संभाले, लेकिन अगर उन्होंने अपने कंस्ट्रक्शन से संबंधित व्यवसाय के लिए पार्टी छोड़ने का फैसला किया है तो यह उनका निर्णय है. इससे पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.”
वजह जो भी रही हो, सच्चाई यह है कि BJD का कुनबा स्थानीय स्तर पर थोड़ा-बहुत बन रहा है तो ऊपरी स्तर पर एक अंतराल पर बिखर भी रहा है.