ओडिशा में BJP के खिलाफ BJD-कांग्रेस का 'गठबंधन' कितना स्थाई?
ओडिशा में राज्यसभा की चौथी सीट के लिए BJD को समर्थन देकर सत्ताधारी BJP के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है

मार्च की 16 तारीख को देशभर के दस राज्यों की कुल 37 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं. इसमें चार सीटें ओडिशा से हैं. राज्य में सत्तारूढ़ BJP के पास दो सीटें और मुख्य विपक्षी BJD के पास एक सीट जीतने लायक पूरी संख्या है.
पेंच फंस रहा था चौथी सीट को लेकर, लेकिन नवीन पटनायक ने 28 फरवरी को अपने राजनीतिक सचिव संतृप्त मिश्रा को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार बनाने के साथ एक साझा उम्मीदवार की भी घोषणा कर दी.
राज्य के प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को उन्होंने साझा उम्मीदवार के तौर पर पेश किया है. पटनायक ने कहा, “डॉ. दत्तेश्वर होता ओडिशा के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं. वे ओडिशा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के पहले कुलपति रहे हैं और कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य भी रह चुके हैं. चूंकि वे साझा उम्मीदवार हैं, इसलिए मैं सभी दलों से अपील करता हूं कि उनका समर्थन करें और उन्हें राज्यसभा भेजें.” जब उनसे पूछा गया कि क्या सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी कांग्रेस डॉ. होता की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे, तो पटनायक ने कहा कि उन्हें इसकी उम्मीद है.
उनकी उम्मीद के अनुरूप, कांग्रेस ने डॉ. होता की उम्मीदवारी का तत्काल समर्थन कर दिया. ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, “मैं बीते 1 मार्च को नवीन पटनायक से साझा उम्मीदवार पर चर्चा के लिए मिला था. चूंकि चौथी सीट के लिए किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, इसलिए मैंने उनसे कहा था कि अगर BJD और कांग्रेस के समर्थन से साझा उम्मीदवार उतारा जाए, तो सीट सुरक्षित की जा सकती है. हमने कहा था कि अगर किसी गैर-राजनीतिक और अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति को साझा उम्मीदवार बनाया जाता है, तो हम समर्थन देंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “नवीन पटनायक ने डॉ. होता को उम्मीदवार बनाकर सही फैसला लिया है. वे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त यूरोलॉजिस्ट हैं और राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर लाखों गरीब लोगों की मदद कर चुके हैं. इस संबंध में मैंने कांग्रेस आलाकमान से भी परामर्श किया है.”
BJD-कांग्रेस गठबंधन की शुरुआत?
बीते 24 सालों तक सत्ता में रहने के बाद पहली बार विपक्ष में बैठी BJD के संदर्भ में ओडिशा में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं. वर्षों से BJD को नरेंद्र मोदी सरकार का भले ही अनौपचारिक, लेकिन भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है. संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों से लेकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव तक कई मौकों पर उसने NDA सरकार का समर्थन किया है.
हालांकि, कांग्रेस के समर्थन से साझा उम्मीदवार उतारने के बाद BJD के विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की ओर झुकाव की अटकलें लग रही हैं. पार्टी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती इसे सिरे से खारिज करते हैं. वे कहते हैं, “यह सहयोग केवल राज्यसभा चुनाव की एक सीट के लिए है. इसे इससे ज्यादा नहीं समझा जाना चाहिए. हम दोनों विपक्षी दल हैं, सत्ता पक्ष के साथ तो नहीं जा सकते न!” वहीं, कांग्रेस नेता फिलहाल इस गठबंधन की उम्र पर किसी भी तरह का बयान देने से बच रहे हैं.
दत्तेश्वर को लाना क्या सॉफ्ट इमेज या नैतिकता वाला राजनीतिक प्रतीकवाद?
लेनिन मोहंती एक बार फिर कहते हैं, “वोटों का जो गणित है, वह चौथी सीट के लिए किसी के पक्ष में नहीं था. ऐसे में हम एक साझा उम्मीदवार की तलाश में थे. ठीक उसी वक्त डॉ. दत्तेश्वर का नाम सामने आया. उनका काम और कद इसके लिए मुफीद दिखा. बतौर विपक्षी दल, BJD और कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है. वे किसी पार्टी विशेष के उम्मीदवार नहीं हैं.”
वोटों का समीकरण और BJP के लिए मौका
इधर BJP ने तीन मार्च की दोपहर दो सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को प्रत्याशी बनाया गया है. इसके इतर, तीसरी सीट की उम्मीद लगाए बैठी BJP को भरोसा था कि क्रॉस वोटिंग होगी और उसे लाभ मिल सकता है. लेकिन पटनायक द्वारा साझा उम्मीदवार की घोषणा और उसे कांग्रेस के समर्थन मिलने के बाद उसकी उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं. केवल एक सुनिश्चित सीट पर उम्मीदवार उतारने के बजाय दो नाम घोषित कर पटनायक ने BJP को असमंजस में डाल दिया है. BJP चार में से तीन सीटों पर नजर लगाए हुए थी और एक सीट BJD को मिलने की संभावना मानी जा रही थी.
ओडिशा में पिछली बार फरवरी 2014 में राज्यसभा का मुकाबला रोचक हुआ था, जब कांग्रेस उम्मीदवार रंजीब बिस्वाल ने चौथी सीट पर BJD के प्रस्तावित और BJP समर्थित प्रसिद्ध मूर्तिकार रघुनाथ महापात्र को हरा दिया था.
हालांकि, लड़ाई की रोचकता अभी बनी हुई है. BJP ने कुल 16 पर्चे खरीदे हैं. पार्टी नेता नामांकन रद्द होने की संभावनाओं के मद्देनजर पर्चे के अधिक सेट खरीदने का तर्क देते हुए इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, लेकिन राज्य के राजनीतिक विश्लेषक किसी बड़े उलटफेर की तरफ इशारा कर रहे हैं. इन संकेतों पर ध्यान देना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि BJP नेता बालभद्र ने बयान दिया है कि चौथी सीट के लिए दोनों पार्टियों को BJP का समर्थन करना चाहिए.
राज्य की 147 सदस्यीय विधानसभा में BJP के 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. BJD के दो विधायकों को हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किए जाने के बाद उसकी संख्या घटकर 48 रह गई है. कांग्रेस के 14 विधायक हैं, जबकि सीपीआई(एम) का एक विधायक है. ओडिशा से राज्यसभा सांसद चुनने के फॉर्मूले के अनुसार, किसी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 30 प्रथम वरीयता के वैध मतों की आवश्यकता होती है.
कौन हैं BJD के उम्मीदवार?
डॉ. होता बीते 40 सालों से अधिक समय से चिकित्सा सेवा में हैं. सन 1994 में उन्होंने चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर से यूरोलॉजी में एम.एस. की डिग्री प्राप्त की और देशभर में एक प्रमुख यूरोलॉजिस्ट के रूप में पहचान बनाई. एससीबी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और बाद में ओडिशा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में सेवा देने के अलावा, वे पूर्ववर्ती BJD सरकारों की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं.
वहीं, संतृप्त मिश्रा आदित्य बिड़ला ग्रुप में मानव संसाधन निदेशक रह चुके हैं. उन्होंने 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कॉर्पोरेट सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर BJD जॉइन की थी. उन्होंने कटक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफल नहीं हुए. इसके बाद साल 2024 में ही उन्हें पटनायक का पहला राजनीतिक सचिव नियुक्त किया गया.
BJP के प्रत्याशी सुजीत कुमार पूर्व में भी राज्यसभा के सदस्य रहे हैं. उन्होंने हाल ही में बीजू जनता दल छोड़कर BJP का दामन थामा है. वे BJD से ही राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. दूसरे प्रत्याशी मनमोहन सामल साल 2023 से BJP की ओडिशा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष हैं और वे भी पहले राज्यसभा सांसद रह चुके हैं.