महज 11 मिनट में निपटा बिहार का बजट भाषण; कोई भी बड़ी घोषणा क्यों नहीं हुई?
बिहार विधानसभा में पेश वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कई अहम विभागों के खर्च में कटौतियां हुई हैं जो एक पिछड़े राज्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है

बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जब 3 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया तो सबसे ज्यादा चर्चा बजट भाषण की अवधि को लेकर हुई. उनका बजट भाषण सिर्फ 11 मिनट 35 सेकेंड का था. अमूमन बजट भाषण काफी लंबे होते हैं और उनमें कई तरह की घोषणाओं का जिक्र होता है. बिहार में इससे पहले के वित्त मंत्री खासकर सुशील मोदी (2024 में निधन हो चुका है) अक्सर सवा से डेढ़ घंटे लंबे बजट भाषण दिया करते थे. पिछले साल सम्राट चौधरी ने भी बजट पेश करते हुए लगभग 38 मिनट का भाषण दिया था. ऐसे में महज साढ़े ग्यारह मिनट में वित्त मंत्री का बजट को निपटा देना पत्रकारों और जन प्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय रहा.
लोगों की अमूमन यह राय रही कि उम्र अधिक होने की वजह से 79 साल के बिजेंद्र प्रसाद यादव ने छोटा-सा भाषण देकर अपने पूरे बजट भाषण को सदन पटल पर रख दिया है. मगर जब इंडिया टुडे ने उनसे इस बारे में पूछा तो उनका कहना था, “लंबा भाषण देकर क्या करना है. सब कुछ तो पहले हो ही गया है.” शायद उनका मतलब बजट घोषणाओं से था, क्योंकि उनके छोटे से भाषण में आय-व्यय का हिसाब तो था, मगर कोई नई घोषणा नहीं थी.
बाद में जब उनके बजट भाषण की प्रतियां पत्रकारों के बीच वितरित हुईं तो पता चला कि अलग-अलग विभागों के लिए जो भी घोषणाएं की गई हैं, उनमें से अधिकतर पहले से घोषित हैं और कई पर काम भी चल रहा है. इनमें से कई घोषणाएं पिछले साल चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘प्रगति यात्रा’ में कर चुके थे. कुछ चुनाव के दौरान हुईं और इनमें बड़ी संख्या में ऐसी घोषणाएं थीं, जो सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में घोषित की गई थीं. इसलिए वित्त मंत्री के पास घोषित करने के लिए नई योजनाएं नहीं के बराबर थीं. मुमकिन है, इसी वजह से उन्होंने बजट भाषण छोटा रखा होगा.
दरअसल अब घोषणाएं साल में कभी-भी हो जाती हैं. जब मुख्यमंत्री चाहते हैं तब घोषणाएं हो जाती हैं. फिर बजट में उन्हें शामिल कर लिया जाता है. एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट, पटना के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर इस चलन को चिंताजनक बताते हुए कहते हैं, “इससे केंद्रीकरण बढ़ रहा है और न सिर्फ वित्त मंत्री बल्कि विधायिका का भी महत्व घट रहा है. पहले जब बजट में घोषणाएं होती थीं, तो सदन में उस पर बहस भी होती थी. अब इस बहस की जरूरत खत्म होती जा रही है. सत्ता अपनी मर्जी से जब जी चाहे सारे फैसले ले रही है.”
सामाजिक विकास से जुड़ी योजनाओं का फंड घटा
इस बार बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, जल संसाधन, कृषि और पीएचईडी जैसे सामाजिक विकास से जुड़े विभागों के योजना मद में काफी कटौती हुई है. शिक्षा विभाग की योजना मद में तो पिछले साल के मुकाबले लगभग 4,400 करोड़ रुपए की कटौती की गई है. जल संसाधन विभाग के योजना मद में 1,200 करोड़, कृषि विभाग और पीएचईडी विभाग में से प्रत्येक में तकरीबन 250 करोड़ रुपए की कटौती की गई है. मनरेगा (वीबी-जी राम जी) के बजट में भी 310 करोड़ रुपए की कटौती की गई है.
हालांकि दूसरी तरफ ग्रामीण विकास विभाग के साथ नगर विकास एवं आवास विभाग के बजट में ठीक-ठाक बढ़ोतरी हुई है. ग्रामीण विकास विभाग के योजना मद में लगभग सात हजार करोड़ की बढ़ोतरी है. माना जा रहा है कि यह राशि महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अगले चरण में खर्च होगी. नगर विकास एवं आवास विभाग की योजना का आकार डेढ़ गुना हो गया है और इसमें लगभग 3000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो गई है.
लगातार बढ़ रहा है गैर-योजना मद का खर्च
गैर-योजनागत खर्च के तहत सरकार के वे खर्च आते हैं जो स्थाई हैं, जैसे- विभागों का संचालन, स्थापना, वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, रक्षा सेवाओं और सब्सिडी के लिए जरूरी खर्च. यह पैसा सीधे-सीधे किसी विकास से जुड़ी योजना पर खर्च नहीं हो रहा होता. ताजा बजट बताता है कि बिहार में ऐसा खर्च लगातार बढ़ रहा है.
वर्ष 2020-21 तक राज्य में योजना मद (योजनाओं पर खर्च) और गैर योजना मद का खर्च लगभग बराबर हुआ करता था. मगर वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में गैर योजना मद का खर्च योजना मद के खर्च का लगभग दोगुना हो गया है. इस साल योजना मद में जहां 1.22 लाख करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं, वहीं गैर योजना मद में 2.25 करोड़ रुपए.
खास तौर पर सरकारी कर्मियों के वेतन का खर्च तो महज दो साल में दो गुना हो गया है. 2024-25 में यह 37,286 करोड़ था और इस साल 70,220 करोड़ हो गया है. पेंशन और कर्ज तथा ब्याज की अदायगी में भी ठीक-ठाक वृद्धि हो गई है.
इसी का नतीजा है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल जो 30 हजार करोड़ की बजट राशि बढ़ी उसमें 25 हजार करोड़ वेतन, पेंशन, लोन आदि के भुगतान के लिए बढ़ी. आम लोगों की योजना की राशि में सिर्फ 5000 करोड़ ही बढ़ी, ऐसे में कई विभागों का योजना मद का खर्च घटाना पड़ा. वर्ष 2026-27 के बजट का कुल आकार 3,47,589.76 करोड़ का रहा. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के पूर्व प्राध्यापक पुष्पेंद्र कहते हैं, “सरकारी नौकरियां बढ़ी हैं, तो गैर योजना मद का खर्च बढ़ना ही था. लेकिन गैर योजना खर्च का बढ़ना और योजना खर्च का नहीं बढ़ना अच्छा संकेत नहीं है. खासकर तब जब केंद्र लगातार अपनी हिस्सेदारी कम कर रहा है. अगर ऐसे में सोशल सेक्टर का बजट कम होगा तो सेवाओं में कटौती होगी. बिहार जैसे राज्य को तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, ग्रामीण रोजगार, खेती और पेयजल जैसे सेक्टर में ज्यादा खर्च करने की जरूरत है. इसी के लिए तो हमें स्पेशल दर्जे की जरूरत थी. ऐसे में यह कदम ठीक नहीं लग रहा.”
बजट की कुछ खास घोषणाएं
• किसानों के लिए ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ की घोषणा. इसके जरिए केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त बिहार सरकार किसानों को 3000 रुपये अपनी तरफ से देगी.
• राज्य सरकार अपनी सभी सिंगल सड़कों को डबल रोड में बदलेगी.
• परिवहन निगम की सारी डीजल बसों को EV में बदला जाएगा. 2000 से अधिक EV चार्जिंग स्टेशन बनेंगे, 500 से अधिक ग्रीन बस स्टॉप.
• पूर्वी चंपारण, जमुई और पूर्णिया में तारा मंडल बनेगा.
• 11 शहरों में 19 सीटर विमानों वाले हवाई अड्डे बनेंगे.
• बिहार को पूर्वी भारत का टेक हब बनाया जाएगा, मेगा टेक सिटी और ग्लोबल वर्क प्लेस बनाने की तैयारी होगी.
• नई एजुकेशन सिटी बनेगी.