सत्ता में आते ही BJP को क्यों सताने लगा 'TMC मॉडल' का डर?
पश्चिम बंगाल में BJP ने अपने नेताओं और जन प्रतिनिधियों को धमकी तथा जबरन वसूली की राजनीति से बचने की सख्त हिदायत दी है

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सीमा सुरक्षा, नागरिकता सत्यापन और प्रशासनिक बदलाव पर केंद्रित अपना एजेंडा तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. वहीं, BJP के राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य पार्टी के अंदर ही एक अलग चुनौती से निपटने की कोशिश कर रहे हैं.
वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि BJP उस रास्ते पर न चले, जिसका वह सालों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर आरोप लगाती रही है. कोलकाता में 7 जून को पार्टी की एक कार्यशाला में समिक भट्टाचार्य ने नेताओं और विधायकों को साफ-साफ चेतावनी दी.
चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने धमकी, जबरन वसूली और सत्ता के दुरुपयोग की संस्कृति से बचने की हिदायत दी. BJP के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उनके इन बयानों से पार्टी में कुछ नेताओं के आचरण को लेकर बढ़ती चिंता साफ झलक रही है. इनमें वे नेता भी शामिल हैं जो दूसरे दलों से BJP में आए हैं और धीरे-धीरे पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में ऊपर तक पहुंच गए हैं.
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद भट्टाचार्य ने ये बात कही है. इस मौके पर BJP विधायक, जन प्रतिनिधि और संगठन के तमाम बड़े नेता मौजूद थे. उन्होंने पार्टी के नेताओं के सामने साफ किया कि चुनावी ताकत वैचारिक प्रतिबद्धता की कीमत पर हासिल नहीं की जा सकती.
भट्टाचार्य ने कहा, “यहां बैठे सभी लोग नेता हैं लेकिन मैं आप सभी को एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं BJP की विचारधारा से कभी समझौता नहीं करूंगा. चाहे इसके लिए हमारे विधायकों की संख्या 208 से घटकर 10 या 20 से भी कम हो जाए, मुझे इस बात की जरा भी परवाह नहीं है.”
बैठक में उपस्थित लोगों ने बताया कि BJP के प्रदेश अध्यक्ष पार्टी के कुछ पदाधिकारियों के व्यवहार से नाराज दिखे. उनके करीबी लोगों ने संकेत दिया कि वे उत्तर 24 परगना के एक विधायक के रवैए से विशेष रूप से नाखुश थे, जो एक अन्य राजनीतिक दल छोड़कर BJP में शामिल हुए हैं.
भट्टाचार्य का दखल ऐसे समय में आया है जब BJP बंगाल में शानदार जीत के साथ सत्ता में आई है और ममता बनर्जी की TMC को मात्र 80 विधानसभा सीटों तक सीमित कर दिया है. पार्टी अब तेज विस्तार और संगठनात्मक अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रही है. उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पहले ही तीन कार्यकर्ताओं को निष्कासित कर दिया है. 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस भेजे जा चुके हैं.
भट्टाचार्य ने अपनी वैचारिक चेतावनी के बाद दलबदल और पर्दे के पीछे की जोड़-तोड़ के जरिए नगर निकायों में राजनीतिक सत्ता हथियाने के प्रयासों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, “मौजूदा नगर निगम बोर्डों को भंग करने की कोशिश न करें और मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि आगामी नगर निगम चुनावों में किसी भी दलबदलू को टिकट नहीं दिया जाएगा. BJP के अपने कार्यकर्ता, जिन्होंने मुश्किल समय में पार्टी का साथ दिया, वही चुनाव लड़ेंगे.”
बंगाल के शहरी स्थानीय निकायों में व्याप्त अस्थिर राजनीतिक स्थिति को देखते हुए ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं. हालांकि TMC औपचारिक रूप से 128 में से 125 नगर निकायों में सत्ता में है लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद से राजनीतिक परिदृश्य में नाटकीय बदलाव आया है.
कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम समेत सौ से अधिक पार्षदों और नगर प्रतिनिधियों ने इस्तीफा दे दिया है, जिसके चलते कई नगर पालिकाएं नगर मामलों के विभाग की सीधी देखरेख में काम कर रही हैं. कई जिलों से ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि BJP नेता कथित तौर पर मौजूदा बोर्डों को अस्थिर करने और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, भट्टाचार्य का संदेश कथित जबरदस्ती और जबरन वसूली से जुड़ी राजनीतिक संस्कृति के उदय को रोकने के उद्देश्य से भी था. इसी का आरोप BJP ममता बनर्जी की TMC पर लगाती रह है.
भट्टाचार्य ने वैचारिक शुद्धता और पार्टी अनुशासन की बात की. वहीं, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने उसी प्रशिक्षण कार्यक्रम का उपयोग BJP सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं को बताने के लिए किया. उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासियों की पहचान उनकी सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में से एक बन गई है.
अधिकारी ने खुलासा किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता के लिए अयोग्य पाए गए 4,800 व्यक्तियों को निर्वासित कर दिया गया है, जबकि अन्य 836 वर्तमान में बंगाल के सीमावर्ती जिलों में स्थापित हिरासत केंद्रों में रखे गए हैं. इन लोगों को भी जल्द उनके देश भेज दिया जाएगा.
अधिकारी ने कहा, “सीमा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसीलिए हमने लगभग 100 किलोमीटर भूमि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को बाड़ लगाने के लिए सौंप दी है. यह उस 556 किलोमीटर भूमि का हिस्सा है, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के लिए यह मुद्दा बेहद अहम है. यही कारण है कि सरकार ने सबसे पहले इस मुद्दे पर फैसला लेकर सीमा बाड़बंदी के बुनियादी ढांचे को पूरा करने के लिए आवश्यक भूमि केंद्र सरकार को सौंपने का काम किया. इस तरह घुसपैठियों की समस्या को BJP के दीर्घकालिक रुख से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है.
अधिकारी ने आगे कहा, “हमने कानून का सख्ती से पालन किया है. घुसपैठियों को जेलों में बंद करके अनिश्चित काल तक यहां रहने देने के बजाय, हमने उन्हें BSF के हवाले कर दिया है. पहले उनके साथ मेहमानों जैसा व्यवहार किया जाता था, करदाताओं के पैसे से उन्हें भोजन और सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाती थीं. वह दौर अब समाप्त हो गया है.”
उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के डर से बांग्लादेशियों के समूह उत्तर 24 परगना के हकीमपुर सीमा के पास इकट्ठा हो गए हैं, ताकि वे स्वेच्छा से भारत छोड़ सकें. मुख्यमंत्री ने TMC शासनकाल के दौरान राजनीतिक हिंसा में कथित तौर पर मारे गए BJP कार्यकर्ताओं के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की.
उन्होंने कहा, “पीड़ित 315 परिवारों में से प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को इस महीने सरकारी नौकरी मिलेगी. इसके अलावा, प्रत्येक परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपए दिए जाएंगे.” प्रशासनिक सुधारों की बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि लंबे समय से लंबित जनगणना आखिरकार पूरी हो जाएगी. उन्होंने कहा, “सर्वेक्षण का चरण 12 से 15 अगस्त के बीच चलेगा जबकि घरों की गणना 16 से 14 सितंबर तक की जाएगी. हमारा लक्ष्य अगले फरवरी तक जनगणना पूरी करना है. इसके बाद, जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाएगा.”
परिसीमन की संभावना ने बंगाल में पहले ही एक राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें कई लोगों का मानना है कि निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण राज्य के चुनावी मानचित्र को काफी हद तक नया रूप दे सकता है. अधिकारी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि उनकी सरकार की कार्रवाई BJP के जरिए चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है. उन्होंने कहा, “मैं अपनी पार्टी के जरिए किए गए हर वादे को पूरा करना अपना दायित्व मानता हूं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों का, जिन्होंने बंगाल को एक नए भविष्य का मार्ग दिखाया.”
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार की प्रमुख लक्ष्मी भंडार योजना पर भी निशाना साधा और लाभार्थियों के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर गडबड़ी का आरोप लगाया. अधिकारी ने दावा किया, “पिछली सरकार ने 2.2 करोड़ लोगों को लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ देने का दावा किया था. हमारी जांच में 27 लाख ऐसे लाभार्थी मिले जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं. इनमें वे लोग शामिल नहीं हैं जिन्होंने CAA के तहत आवेदन किया है. हमने यह भी पाया कि लगभग 3 लाख पुरुष एक ऐसी योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रहे हैं जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए है.”
भट्टाचार्य और अधिकारी के बयानों से बंगाल में BJP की तात्कालिक प्राथमिकताएं स्पष्ट हो गईं. मुख्यमंत्री ने अवैध घुसपैठ, सीमा प्रबंधन और प्रशासनिक सुधार से जुड़े अपने वादों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया. वहीं, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन के भीतर स्पष्ट वैचारिक सीमाएं खींचने की कोशिश की और नेताओं को चेतावनी दी कि अगर BJP आखिरकार उसी राजनीतिक संस्कृति को अपना लेती है जिसे बदलने का उसने वादा किया है तो चुनाव से हासिल जीत का कोई महत्व नहीं रह जाएगा.