ASI का QR Code बनेगा घुमक्कड़ों का नया गाइड!
मुंबई सर्कल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के जरिए शुरू किए गए डिजिटल सेल्फ-गाइडेड टूर से भ्रामक इतिहास और तथ्यों को फैलने से रोका जा रहा है

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मुंबई सर्कल के कुछ ऐतिहासिक स्थलों पर डिजिटल सेल्फ-गाइडेड टूर शुरू किए हैं. अगर आप मुंबई या उसके आसपास के इलाकों में ऐतिहासिक स्थलों का टूर प्लान कर रहे हैं, तो यह आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है.
इससे पर्यटकों को उस स्थान से जुड़ी सही, प्रमाणित और आधिकारिक ऐतिहासिक जानकारी आसानी से मिलेगी. साथ ही, गाइडों या स्थानीय लोगों द्वारा फैलाई जा रही झूठी जानकारी और भ्रामक इतिहास को रोकने में भी मदद मिलेगी.
मुंबई सर्कल स्थित ASI के सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट अभिजीत आंबेकर बताते हैं, “हमने डिजिटल हेरिटेज वॉक शुरू की हैं, जिनके जरिए पर्यटक ऐतिहासिक स्थलों पर खुद ही भ्रमण कर सकते हैं. इसकी खासियत यह है कि आपको भ्रमण के दौरान वहां से जुड़ी सभी प्रमाणित जानकारी दी जाएगी.”
अभिजीत के मुताबिक, ये पहल भाजा गुफाओं, शनिवारवाड़ा (पेशवाओं का निवास स्थान), शिवनेरी किला (छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान), पुणे स्थित लोहागढ़ किला, मुंबई में कन्हेरी गुफाएं, खोखरी गुंबद, मुरुद-जंजीरा के अबीसीनियाई सिद्दी शासकों के मकबरे और कुडा गुफाओं (रायगढ़ जिले) जैसे स्थलों पर शुरू की गई हैं. इस प्रणाली को नवंबर 2025 में लोहागढ़ से शुरू किया गया और फिर धीरे-धीरे अन्य स्थलों पर भी लागू किया गया.
पुणे में स्थित आठवीं शताब्दी ईस्वी की राष्ट्रकूट काल की पातालेश्वर गुफाओं में नवंबर 2025 में एक वर्चुअल टूर शुरू किया गया था. इसे बाकी ऐतिहासिक जगहों पर भी 3डी प्रारूप में विस्तार करने की योजना है. पातालेश्वर गुफाओं में जल्द ही ऑडियो-आधारित प्रणाली भी शुरू की जाएगी.
डिजिटल गाइड से लैस स्मारकों पर आने वाले पर्यटक QR Code स्कैन करके ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड में अपना टूर शुरू कर सकते हैं. GPS आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करने पर, पर्यटकों को घूमते-फिरते ही स्थल, उसका महत्व, प्राचीनता और विशेषताओं के बारे में जानकारी मिल जाएगी.
उदाहरण के लिए, उन्हें बताया जाएगा कि मुंबई से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित दूसरी से चौथी शताब्दी ईस्वी के बीच निर्मित कुडा गुफाएं, पहाड़ियों या द्वीपों पर बनी गुफाओं की तुलना में तट पर स्थित देश की गिनी-चुनी गुफाओं में से है. प्रारंभिक बौद्ध शिला-कढ़ाई वास्तुकला का एक उदाहरण, राजपुरी खाड़ी के किनारे स्थित कुडा गुफाओं में तीन स्तरों पर 26 गुफाएं, पांच चैत्य गृह या प्रार्थना कक्ष और 21 विहार हैं.
यह गुफा परिसर मंदाद के पास स्थित है, जो संभवतः यूनानियों के दस्तावेज 'पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी' में वर्णित मंदगोरा रहा होगा. इस प्रकार की गुफाएं आमतौर पर व्यापार मार्गों पर पाई जाती हैं और इनका निर्माण शासकों और व्यापारियों के जरिए कराया गया है.
अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध यह रिसर्च कंटेंट ASI के जरिए ही तैयार किया गया है. वहीं, इसे बनाने में अहम भूमिका तकनीकी कंपनी गुंजइंडिया ने निभाई है.
आंबेकर ने बताया कि ASI ने पहले चरण में मुंबई सर्कल के 25 स्मारकों को शामिल करने की योजना बनाई है, जिसके बाद उन स्थलों को शामिल किया जाएगा जहां अपेक्षाकृत कम पर्यटक आते हैं. अधिकारियों ने बताया कि मुंबई में जोगेश्वरी, कोंडीवते, मंडपेश्वर गुफाएं, रायगढ़ जिले में एलिफेंटा गुफाएं, पुणे जिले में नानेघाट और कोंकण तट पर स्थित कोलाबा, विजयदुर्ग, सुवर्णदुर्ग और जयगढ़ के किले को भी जल्द इस प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा.
साथ ही कोल्हापुर जिले के खिदरापुर में कोपेश्वर मंदिर में भी कुछ समय बाद यह सुविधा उप्लब्ध होगी. बता दें कि ASI का मुंबई सर्कल महाराष्ट्र के लगभग 13 जिलों में फैले 117 स्मारकों की देखरेख करता है. 2023 में ASI ने गुजरात के वड़नगर में अपने पहले डिजिटल हेरिटेज वॉक की शुरुआत की.
आंबेकर ने बताया कि ASI ने एलिफेंटा द्वीप पर खुदाई शुरू कर दी है और इसके बारे में ज्यादा जानकारी मार्च के बाद जारी की जाएगी. एलिफेंटा अपने शिलाखंडों पर उकेरे गए गुफा मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है.
पहले इसे घारापुरी के नाम से जाना जाता था. इस द्वीप पर तीन गांव हैं और यह पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है. यह कोंकण शिलाहार वंश की राजधानी रहा होगा. इस वंश के राजा अनंतदेव की खारेपाटन ताम्रपत्रों में पुरी (घारापुरी) का जिक्र मिलता है. एक किंवदंती के मुताबिक, घारापुरी राक्षस राजा बाणासुर की राजधानी थी, जिसकी बेटी का विवाह भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध से हुआ था.
मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज में इतिहास विभाग के पूर्व प्रमुख एच.एस. ठोसार ने महाराष्ट्र और गोवा की ऐतिहासिक भूगोल पर अपनी पुस्तक में लिखा है कि एलिफेंटा द्वीप और अनिरुद्ध के बीच कुछ ऐतिहासिक संबंध रहा होगा. यह भी संभव है कि त्रैकुटक वंश की राजधानी अनिरुद्धपुरी, जिसका क्षेत्र उत्तरी कोंकण तक फैला हुआ था, एलिफेंटा द्वीप ही था.