जापानी कंपनियों के लिए भारत क्यों है निवेश का आकर्षक ठिकाना?
जापान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के इंडिया चेयरमैन ताकेशी सेओ ने India Today Indo-Japan Conclave में कहा कि भारत की विकास क्षमता और डिजिटल क्षमताएं, जापान की गुणवत्ता और विनिर्माण विशेषज्ञता के साथ मिलकर एक मजबूत साझेदारी बना सकती हैं

पिछले लगातार तीन वर्षों से भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे आकर्षक निवेश स्थलों में शामिल रहा है. यह बात जापान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (JCCI) के इंडिया चेयरमैन ताकेशी सेओ ने 22 मई को नई दिल्ली में आयोजित India Today Indo-Japan Conclave के तीसरे संस्करण में कही.
उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब विदेशों में विस्तार करने की इच्छुक कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबारी माहौल लगातार अधिक अनिश्चित होता जा रहा है. सेओ ने कहा, "जापानी कंपनियों का विदेशों में उत्पादन और बिक्री अनुपात अभी भी ऊंचा है लेकिन विदेशों में और अधिक विस्तार करने की उनकी इच्छा में कमी आने लगी है." उनके मुताबिक, कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक सतर्क और चयनात्मक हो गई हैं लेकिन इसी माहौल में भारत अलग नजर आता है.
सेओ के अनुसार, भारत में जापानी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी JCCI की सदस्यता में हुए इजाफे से भी झलकती है. 2020 में जहां इसके 450 सदस्य थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 680 हो गई है. पिछले एक वर्ष में JCCI से 120 नई कंपनियां जुड़ी हैं. सेओ ने कहा, "यह साफ तौर पर दिखाता है कि जापानी कंपनियों की भारत से कितनी बड़ी उम्मीदें हैं."
'Make in India Meets Monozukuri: The Winning Formula' विषय पर अपने मुख्य संबोधन में सेओ ने कहा, "जब हम Make in India और Monozukuri के मेल पर आधारित भारत-जापान संबंधों को देखते हैं तो दोनों देश एक ऐसी पहेली के टुकड़ों की तरह दिखाई देते हैं जो एक-दूसरे को पूरा करते हैं." उन्होंने कहा कि भारत जहां विशाल विकास क्षमता और मजबूत डिजिटल क्षमताएं लेकर आता है, वहीं जापान गुणवत्ता प्रबंधन, परिचालन उत्कृष्टता और दशकों का विनिर्माण अनुभव लेकर आता है.
एक कंपनी Baker Tillys ASA India LLP के जापान प्रैक्टिस प्रमुख हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि Monozukuri सृजन की कला को पूर्णता तक पहुंचाने का जापानी दर्शन है, जिसमें उत्पादन प्रक्रिया भी शामिल है. उन्होंने कहा, "यह कोई अंतिम परिणाम नहीं है. यह एक निरंतर प्रक्रिया है जो जापानी कंपनियों के पूरे जीवन चक्र और उत्पादन शृंखला में चलती रहती है."
हालांकि भारत जापानी कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य है फिर भी 2024 में जापान के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिहाज से उसका स्थान आठवां था. इसका मतलब है कि अभी भी काफी संभावनाएं बाकी हैं. सेओ ने कहा, "जापानी कंपनियों ने जिन प्रमुख चुनौतियों की पहचान की है,+ उनमें नियामकीय पारदर्शिता की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और कर प्रणाली की जटिलता शामिल हैं. भारत में कारोबार शुरू करने की इच्छुक कंपनियों के लिए इन क्षेत्रों में सुधार बेहद जरूरी है."
FedEx में सेल्स के प्रबंध निदेशक हेमंत पिंपलिकर के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवा और उन्नत विनिर्माण ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं जहां तेजी देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में शुरू की गई सरकारी नीतियों ने भी इस गति को समर्थन दिया है. उनके अनुसार, भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में कनेक्टिविटी और प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका होगी.
सेओ ने भारत और जापान के पूरक संबंधों को और मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया. इनमें एकतरफा तकनीक हस्तांतरण से आगे बढ़कर सह-निर्माण (Co-Creation) का मॉडल अपनाना, स्थानीयकरण को बढ़ावा देना और अल्पकालिक लेनदेन के बजाय दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान देना शामिल है. इसमें प्रतिभा विकास और भारत के भीतर क्षमताओं का निर्माण भी शामिल है.
उन्होंने कहा, "भारत दुनिया के सबसे बड़े घरेलू बाजारों में से एक है. इसके अलावा, पश्चिम की ओर स्थित क्षेत्रों, खासकर मध्य पूर्व और अफ्रीका के लिए भारत एक मजबूत निर्यात केंद्र बनने की क्षमता भी रखता है. ऐसे में जापान की तकनीक और कार्य संस्कृति को भारत के कार्यबल और लागत प्रतिस्पर्धा के साथ जोड़कर ऐसे उच्च मूल्य वाले उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिनकी बराबरी दूसरे देशों के लिए आसान नहीं होगी."
विशेषज्ञों की खास बातें :
ताकेशी सेओ, इंडिया चेयरमैन, जापान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
- "जापान की तकनीक और कार्य संस्कृति को भारत के कार्यबल और लागत प्रतिस्पर्धा के साथ जोड़कर ऐसे उच्च मूल्य वाले उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिनकी बराबरी दूसरे देशों के लिए आसान नहीं होगी."
- "जब हम Make in India और Monozukuri के मेल पर आधारित भारत-जापान संबंधों को देखते हैं, तो दोनों देश एक ऐसी पहेली के टुकड़ों की तरह दिखाई देते हैं जो एक-दूसरे को पूरा करते हैं."
- "पिछले लगातार तीन वर्षों से जापान में भारत को सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में चुना गया है."
हिमांशु श्रीवास्तव, प्रमुख, जापान प्रैक्टिस, Baker Tillys ASA India LLP
- "भारत एक भूखा बाघ है और जापान एक बहुत अनुभवी बाघ. इसलिए हमें साथ चलने की जरूरत है. आज इसके कई उदाहरण मौजूद हैं कि भारत किस तरह जापानी कंपनियों को नई दिशा दे रहा है."
- "Monozukuri एक सतत प्रक्रिया है, जो जापानी कंपनियों के पूरे जीवन चक्र और उत्पादन शृंखला में चलती है. आप देखेंगे कि वे लगातार सबसे बेहतर, सबसे प्रासंगिक और सबसे टिकाऊ उत्पाद बनाने का प्रयास करते रहते हैं."
हेमंत पिंपलिकर, प्रबंध निदेशक, सेल्स, FedEx
- "भारत तेजी से दुनिया के सबसे संभावनाशील विनिर्माण केंद्रों में से एक बन रहा है. यदि हम मौजूदा रफ्तार को देखें तो इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवा और उन्नत विनिर्माण प्रमुख क्षेत्र हैं. इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, तकनीकी साझेदारियों और औद्योगिक निवेश के माध्यम से जापान ने इस पूरी विकास यात्रा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है."
- "भारत निश्चित रूप से एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन रहा है. लॉजिस्टिक्स के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम वैश्विक स्तर पर व्यापार को कैसे आगे बढ़ाते हैं. इस पूरे तंत्र का एक बेहद अहम हिस्सा देश के भीतर और बाहर मजबूत कनेक्टिविटी है."