रूसी तेल की खरीद पर 500 फीसदी टैरिफ लगाएंगे ट्रंप, क्या वेनेजुएला के बाद निशाने पर है भारत?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसद टैरिफ लगाए जाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

7 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक नए बिल को मंजूरी दी है. इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसद तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है.

दक्षिण कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी सीनेटर से बातचीत के बाद संसद में बिल को पेश करने के लिए हरी झंडी दे दी है. अमेरिका इस बिल की तैयारी कई महीनों से कर रहा था.

क्या ट्रंप की मंजूरी के बाद अमेरिकी संसद में पेश होगा ये बिल? 

हां, सीनेटर लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बिल का नाम 'सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025' है.

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका इस बिल के जरिए उन देशों पर दबाव बनाना चाह रहा है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं. अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को युद्ध लड़ने में मदद मिल रही है.

क्या सिर्फ रिपब्लिकन या डेमोक्रेटिक सीनेटर भी पास कराना चाहते हैं ये बिल?

इस बिल को सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ-साथ डेमोक्रेटिक के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमंथल का भी समर्थन हासिल है. यह उन दोनों सांसदों के सहयोग से पेश किया जा रहा है. यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर जबरदस्त दवाब बनाएगा, जिससे उन्हें रियायती रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा.

लिंडसे के मुताबिक, "रूस से कम कीमतों पर कच्चा तेल खरीदकर ये देश पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं. अमेरिका ने इन देशों को दंडित करने के लिए ये विधेयक प्रस्तावित किया है."

उन्होंने आगे कहा, "यह विधेयक ऐसे समय में पेश किया जा रहा है, जब यूक्रेन शांति के लिए तमाम तरह की रियायतें दे रहा है और पुतिन सिर्फ बातें कर रहे हैं. पुतिन ने यूक्रेन में निर्दोषों को मारना जारी रखे हुए हैं. यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा, जो पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देने वाले सस्ते रूसी तेल खरीदते हैं."

क्या भारत पर दवाब बनाने वाले ट्रंप रूसी ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी निवेश को रोकने वाले हैं?

अमेरिका ने रूसी ऊर्जा क्षेत्र में अपने देश से होने वाले निवेश को रोकने के लिए एक बिल पेश करने की तैयारी जरूर की थी. हालांकि, अब इस बिल को अमेरिकी सीनेटर ने ठंडे बस्ते में डालने का फैसला किया है. 

अमेरिकी सीनेट ने रूस से ही जुड़े इस बिल पर वोटिंग को फिलहाल स्थगित कर दिया है. दरअसल, इस बिल के तहत रूस के ऊर्जा सेक्टर में अमेरिकी निवेश को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है. संभव है कि अमेरिका को होने वाले नुकसान को देखते हुए संभव है ये फैसला लिया गया हो. 

इस बिल को पास कराने के पीछे क्या है मकसद?

ट्रंप का मकसद पहले भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाने की प्राथमिकता देना है. जो चीन के बाद रूसी तेल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है.

पिछले साल, ट्रंप ने अपने टैरिफ अभियान को और तेज करते हुए भारतीय आयात पर 25 फीसद का टैरिफ लगाया. साथ ही रूसी तेल खरीदने पर 25 फीसद का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया था. इससे कुछ उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 फीसद तक पहुंच गया, जिससे दोनों देशों के संबंध भी काफी तनावपूर्ण हो गए.

चीन और अमेरिका के बीच संबंध भी लगातार बढ़ते टैरिफ के बाद बिगड़ गए. अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145 फीसद शुल्क लगाया है. इसके पलटवार में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर 125 फीसद टैरिफ की जवाबी कार्रवाई की है.

 

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