'कुत्ते इंसानी डर पहचानते हैं, इसलिए काटते हैं', सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रीट डॉग पर और क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की बेंच में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई

8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई. यह सुनवाई आवारा पशुओं, उससे होने वाले खतरों और उन्हें नियंत्रित करने में नगर निगम की भूमिका पर केंद्रित थी.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुत्तों के व्यवहार पर भी चर्चा हुई. इस दौरान जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं. कुत्तों की ओर से पक्ष रखने वाले वकील ने उनके इस बयान का विरोध किया.
उनके विरोध पर जस्टिस नाथ ने कहा कि ये बात मैं अपने निजी अनुभव से कह रहा हूं, इसलिए अपना सिर मत हिलाइए. न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने 7 जनवरी को दिन की कार्यवाही समाप्त होने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि अदालत 8 जनवरी को मामले की सुनवाई फिर से शुरू करेगी. साथ ही सभी वकीलों से 29 दिसंबर को "टाइम्स ऑफ इंडिया" में छपी कुत्तों से जुड़ी एक खबर पर तैयारी के साथ आने के लिए कहा है.
अब पढ़िए स्ट्रीट डॉग पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पक्ष-विपक्ष ने क्या तर्क दिए-
कुत्तों को शेल्टर होम भेजने की मांग करने वाले वकीलों का पक्ष
अलग-अलग राज्यों की सरकार ने जो आंकड़े दिए हैं, उनमें से किसी ने उनके यहां चलाए जाने वाले शेल्टर होम की संख्या नहीं बताई है. देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं और ये सिर्फ बीमार और घायल कुत्तों के लिए हैं. इन शेल्टर में 100 से ज्यादा कुत्ते नहीं रह सकते. इनका कहना है कि कोर्ट ने शेल्टर होम के लिए जो निर्देश जारी किए हैं, उसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर ही मौजूद नहीं है.
कुत्तों को शेल्टर होम भेजे जाने के खिलाफ पक्ष रखने वाले वकील का पक्ष
एडवोकेट सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर होम भेजने पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि कुत्ते हटाने से चूहों की आबादी बढ़ेगी. इस पर कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा- तो क्या बिल्लियां ले आएं?
सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों से जुड़े मुद्दे पर क्या कहा-
1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्ते इंसानों में डर को भांप लेते हैं और ऐसा महसूस होने पर हमला करने की अधिक संभावना रखते हैं. अदालत ने कहा, "कुत्ता हमेशा उस इंसान को पहचान लेता है जो कुत्तों से डरता है. जब उसे यह महसूस होता है तो वह हमला कर देता है. हम यह बात अपने निजी अनुभव के आधार पर कह रहे हैं."
2. एक वकील नकुल दीवान ने सुप्रीम कोर्ट में कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए ट्रैप, न्यूटर और रिलीज मॉडल का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि कुत्तों के स्वभाव को देखते हुए यह जरूरी है कि उन्हें उसी जगह वापस छोड़ा जाए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था. दीवान ने यह भी कहा कि बेंगलुरु में कुत्तों की माइक्रो-चिपिंग शुरू हो गई है और यह महंगा नहीं है.
3. आवारा कुत्तों को हटाने की याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि संस्थागत क्षेत्रों से कुत्तों को स्थायी रूप से हटाने के मौजूदा आदेश रिहायशी इलाकों पर भी लागू किया जाना चाहिए. वकील ने साफ कहा कि कुत्ते को समझाना संभव नहीं है, लेकिन कुत्ते की देखभाल करने वाले या मालिक को समझाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि कुत्तों की संख्या धीरे-धीरे कम हो.
4. वरिष्ठ अधिवक्ता नकुल दीवान ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन की वकालत की. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सामुदायिक कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाना आवश्यक है. दीवान ने कहा, "यह ऐसी समस्या नहीं है जो एक दिन में हल हो जाए. हमें सामुदायिक कुत्तों की बढ़ती संख्या को धीमा करना होगा. हम ऐसी स्थिति भी नहीं चाहते जहां कानून तो हो, लेकिन उसके क्रियान्वयन में कमी के कारण हमें कठोर कदम उठाने पड़ें."
5. वरिष्ठ अधिवक्ता विनय नवारे ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को चुनौती नहीं दी जा रही है, बल्कि असली समस्या उनके कार्यान्वयन में है. उन्होंने कहा, "लखनऊ मॉडल की सराहना की गई है. यह मॉडल सभी राज्यों में लागू होना चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण एजेंसी स्थानीय निकाय है, जैसे - ग्राम पंचायत, नगर परिषद आदि. इन्हें शामिल किया जा सकता है. बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना होगा.