भारतीय सेना में टॉप पोस्ट पर होने वाले हैं बड़े बदलाव, डिफेंस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?

केंद्र सरकार जल्द ही नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, DRDO प्रमुख और सेना एवं नौसेना प्रमुखों की नियुक्ति करेगी. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इसका डिफेंस सेक्टर में हो रहे बदलाव पर क्या असर पड़ेगा?

CDS जनरल अनिल चौहान  (File photo)
CDS जनरल अनिल चौहान (File photo)

भारतीय सेना के उच्च पदों पर होने वाले बदलावों के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रही है. नरेंद्र मोदी सरकार के लिए यह साल राजनीतिक रूप से काफी व्यस्त है, जिसमें कई राज्यों के विधानसभा चुनाव भी शामिल हैं.

इन सबके बावजूद, बदलते भू-राजनीतिक हालात में सैन्य सुधारों की गति को बनाए रखना सबसे बड़ी जरूरत है. पश्चिम एशिया में चल रही जंग से लेकर घरेलू सुरक्षा संबंधी उभरती चिंताओं तक, इन नियुक्तियों की अहमियत सामान्य उत्तराधिकार से कहीं अधिक है.

इन अधिकारियों का चयन महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि ये सीधे तौर पर इस बात को प्रभावित करेंगे कि भारत भविष्य के संघर्षों के लिए कैसे तैयारी करता है. साथ ही ये नियुक्तियां यह भी तय करेंगी कि भारत लंबे समय से लंबित डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों को कैसे आगे बढ़ाएगा?

सबसे पहले, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. उन्हें पिछले सितंबर में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के जरिए आठ महीने का विस्तार दिया गया था. जनरल चौहान मई 2026 में 65 वर्ष के हो जाएंगे, जो इस पद के लिए अधिकतम आयु सीमा है.

उनके मूल कार्यकाल को चल रहे सैन्य सुधारों और एकीकृत थिएटर कमांड्स के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए बढ़ाया गया था. जनरल चौहान ने सितंबर 2022 में भारत के दूसरे CDS के रूप में पदभार संभाला था. वे दिवंगत जनरल बिपिन रावत के बाद इस पद पर आए थे. उन्हें तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और थिएटर कमांड्स के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

जनरल चौहान ने तीनों सशस्त्र बलों के बीच मतभेदों को दूर करने और थिएटर कमांड को लागू करने के लिए उन्हें एकमत करने के प्रयास किए गए हैं. तीनों सेनाओं के बीच अधिकांश मुद्दे सुलझ गए हैं. हालांकि, थिएटर कमांड प्रस्ताव को अभी भी सरकार से मंजूरी मिलनी बाकी है.

CDS के बाद इस क्रम में डॉ. समीर वी. कामत का नाम आता है. कामत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख हैं. DRDO के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव के रूप में कामत का कार्यकाल 31 मई तक बढ़ा दिया गया है.

यह उनका दूसरा विस्तार था, जिसे ACC ने मंजूरी दी थी. कामत के नेतृत्व में DRDO ऐसे समय में आया, जब यह संगठन खुद को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश कर रही थी. इस संगठन को सुस्त और परियोजना-प्रधान प्रणाली से हटकर एक इनोवेशन आधारित संस्था में बदलना था. इसका उद्देश्य DRDO को एक ऐसी संस्था बनाना था, जो स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे.

साथ ही एक कुशल और हल्के ढांचे वाले अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थान के तौर पर काम-काज शुरू करे. ताकि पिछली अक्षमताओं, देरी से होने वाले कामकाज और लागत में वृद्धि की समस्या से निपटा जा सके. यह पहल मुख्य तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के जरिए प्रेरित है.

जनरल चौहान और कामत दोनों को एक साथ कार्यकाल विस्तार दिया गया था. यह इस बात को दिखाता है कि सरकार सुधारों में निरंतरता बनाए रखने और तेजी से अनिश्चित होते सुरक्षा माहौल में बदलावों की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है.

मई में सेवानिवृत्त होने वाले सेना अधिकारियों की लिस्ट में एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी शामिल हैं. त्रिपाठी भारतीय नौसेना के प्रमुख हैं. पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को इस पद के लिए नौसेना के भीतर प्रमुख दावेदार माना जा रहा है. वे एडमिरल त्रिपाठी के बाद सबसे वरिष्ठ नौसेना अधिकारी हैं, जो उन्हें इस पद के लिए एक खास बढ़त देता है.

एडमिरल त्रिपाठी के नेतृत्व में भारतीय नौसेना ने तेजी से अपने बेड़े का आधुनिकीकरण किया है. इसमें हाल ही में 12 नए जहाज शामिल किए गए हैं. इसके अलावा, 2035 तक 200 से अधिक जहाजों के बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है.

अगला बड़ा परिवर्तन भारतीय सेना में होगा, क्योंकि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जुलाई में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जो बख्तरबंद कोर के अधिकारी हैं. पिछले महीने भारतीय सेना के उप-प्रमुख नियुक्त किए गए थे, अपनी वरिष्ठता के कारण शीर्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

अगर उनका चयन होता है, तो यह बेहद खास मौका होगा, जब बख्तरबंद कोर का कोई अधिकारी लंबे अंतराल के बाद 13 लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना (आर्मी) की कमान संभालेगा. इससे पहले ऐसा उदाहरण 20 लांसर्स के जनरल शंकर रॉय चौधरी का था, जिन्होंने नवंबर 1994 से सितंबर 1997 तक सेना प्रमुख के रूप में कार्य किया और बाद में राज्यसभा के सदस्य बने.

2016 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब पूर्वी कमान के प्रमुख और बख्तरबंद कोर से संबंधित लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी को भारतीय सेना प्रमुख बनने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. हालांकि, उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को इस पद पर नियुक्त कर दिया था.

कुल मिलाकर, यह साल भारत के रक्षा प्रतिष्ठान के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष होगा. सरकार के जरिए विभिन्न पदों के लिए किए गए चयन से यह तय होगा कि डिफेंस क्षेत्र में चल रहे सुधारों को कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा. लंबे समय से लंबित थिएटर कमांडों को आगे बढ़ाने से लेकर स्वदेशी रक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन को गति देने तक, नई नेतृत्व के लिए दूरदर्शिता में निरंतरता महत्वपूर्ण होगी.

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