बंगाल चुनाव से पहले ममता के करीबी के घर पर छापा; क्या चुनाव के वक्त ही एक्शन में आती है ED?

ED ने मुख्यमंत्री TMC के IT सेल प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर में छापेमारी की, जिसके बाद ये चर्चा तेज हो गई कि चुनाव के पहले ही एजेंसी एक्शन में क्यों आती है

कोलकाता में ईडी की कार्रवाई पर हंगामा (Photo: ITG)
कोलकाता में ईडी की कार्रवाई पर हंगामा (Photo: ITG)

8 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के IT सेल प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने छापेमारी की. यह कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन इसकी खबर मिलते ही सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं.

कुछ देर बाद जब ममता घर से निकलीं तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी. ED का कहना है कि ममता बनर्जी अपने साथ कई फिजिकल डाक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले गईं. वहीं, ममता बनर्जी ने कहा, "BJP वाले ED के जरिए चुनाव से पहले मेरी पार्टी से जुड़ी जानकारी हासिल करना चाहते हैं.”

इस विवाद के साथ ही ED के छापेमारी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. TMC का कहना है कि ED ने 5 साल पुराने मामले में कार्रवाई की है. अब तक एजेंसी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही थी, चुनाव से ठीक पहले ही इनको पश्चिम बंगाल क्यों याद आया है?

काफी हद तक यह बात सही भी है, क्योंकि यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले 9 राज्यों में चुनाव से ठीक पहले इनकम टैक्स (IT), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की रेड पड़ चुकी है.

ऐसे में स्टोरी में जानते हैं कि प्रतीक जैन कौन हैं, इनसे जुड़ा ये मामला क्या है? साथ ही ये भी कि चुनाव से पहले किन-किन राज्यों में और किस-किस मामले में केंद्रीय एजेंसियों ने कार्रवाई की.

कौन हैं प्रतीक राज, जिनके घर ED ने छापा मारा है?

देश की सबसे चर्चित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC में इस वक्त तीन डायरेक्टर हैं, जिनमें से एक प्रतीक जैन हैं. प्रतीक के अलावा विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह भी इस फर्म के डायरेक्टर हैं. प्रशांत किशोर के इस फर्म से अलग होने के बाद इन तीनों को ये जिम्मेदारी मिली है.

प्रतीक ने IIT बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मटीरियल साइंस में इंजीनियरिंग की है. यहां से पढ़ाई के बाद 2012 में जैन ने डेलॉइट में एक एनालिस्ट के तौर पर काम किया, जिसके बाद वे 'सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस' नाम की संस्था के फाउंडिंग मेंबर बने. बाद में इसे ही I-PAC के नाम से जाना गया.

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से उनका क्या संबंध है?

2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से I-PAC, TMC के साथ काम कर रही है. 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की बड़ी जीत का श्रेय I-PAC को दिया जाता है. इसके बाद से ही जैन चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं. यही कारण है कि ममता बनर्जी उन पर विश्वास करती हैं. यही भरोसा है, जिसके कारण उन्हें TMC के IT सेल प्रमुख की जिम्मेदारी भी मिली है.

किस केस में उनके घर और दफ्तर में छापा मारा गया है?

ED ने कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभी छापेमारी की है. यह मामला करीब 5 साल पुराना बताया जाता है. 27 नवंबर 2020 को पहली बार CBI ने कुनुस्तोरिया, कजोरा, आसनसोल के आसपास से कोयला चोरी के मामले में केस दर्ज किया. अनूप माझी (उर्फ लाला) समेत अन्य के खिलाफ अवैध खुदाई और बिक्री के आरोप में केस दर्ज हुए.

बाद में इस केस की जांच I-PAC तक पहुंच गई. आरोप है कि इस कोयला घोटाले से होने वाली कमाई का पैसा I-PAC तक पहुंचा था. ED के मुताबिक, अनूप माझी और उनके साथियों ने कोयला चोरी से मिले काले धन को गोवा भेजा. यह पैसा 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में TMC के प्रचार के लिए I-PAC को दिया गया.

2022 के गोवा चुनाव में I-PAC ने ही TMC के लिए चुनावी कैंपेन किया था. अनूप माझी की ओर से यह भुगतान TMC के चुनावी काम के लिए किया गया था. ED की टीम ने I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे. अब एक बार फिर चुनाव से पहले इस मामले में पूछताछ के लिए ED ने छापेमारी की है.

पुराना मामला होने के बावजूद अभी छापेमारी की क्या वजह हो सकती है?

कुछ लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई चुनाव से ठीक पहले TMC को कमजोर करने की रणनीति हो सकती है, क्योंकि I-PAC ममता बनर्जी की IT सेल और चुनावी स्ट्रैटेजी हैंडल करती है. ममता बनर्जी ने भी इस कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह अमित शाह की साजिश है. ED हमारी पार्टी से जुड़े इंटरनल डेटा और कैंडिडेट लिस्ट को चुराने की कोशिश कर रही थी."

वहीं, कार्रवाई करने वाली एजेंसी ED ने तमाम आरोपों पर जवाब देते हुए कहा है कि जांच के दौरान हाल ही में बेहद खास एविडेंस मिले हैं. इससे साफ होता है कि कोयला तस्करी सिंडिकेट (अनूप माझी उर्फ लाला के नेतृत्व में) की कमाई को हवाला ऑपरेटर्स के जरिए I-PAC तक पहुंचाया जा रहा था. यही कारण है कि इस मामले में अभी एक्शन लिया गया है.

ED को सरकार अपने टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रही, इस दावे में कितना दम है?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर ED पर इस तरह के आरोप लग क्यों रहे हैं. इसकी प्रमुख वजह ED की ताकत है. दरअसल, दिल्ली पुलिस स्पेशल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1946 के तहत बनी CBI को किसी भी राज्य में घुसने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है. वहीं NIA Act 2008 के तहत नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी यानी NIA पूरे देश में काम कर सकती है, लेकिन उसका दायरा केवल आतंक से जुड़े मामलों तक ही है.

इन दोनों सरकारी एजेंसियों से उलट ED केंद्र सरकार की इकलौती जांच एजेंसी है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में नेताओं और अफसरों को तलब करने या उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं है. यही कारण है कि जब ED किसी राज्य में छापेमारी करती है, तो विपक्षी दल उसपर सवाल उठाते हैं.

राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 1 अप्रैल 2015 से 28 फरवरी 2025 के बीच वर्तमान और पूर्व सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों (MLC) और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ कुल 193 मामले ED ने दर्ज किए हैं. हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया कि उनके पास इससे जुड़ा डेटा राज्य या पार्टी के आधार पर नहीं है.

इससे पहले 2022 में छपी इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि ED ने पिछले 18 साल में 147 प्रमुख राजनेताओं की जांच की, जिनमें 85 फीसद विपक्षी नेता थे.

वहीं, 2014 के बाद 2022 तक NDA शासन के 8 सालों में नेताओं के खिलाफ ED के इस्तेमाल में 4 गुना बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान 121 राजनेता जांच के दायरे में आए जिनमें 115 विपक्षी नेता हैं. यानी इस दौरान 95 फीसद विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई हुई.

अब अगर UPA शासन की बात करें तो 2004 से 2014 के बीच ED ने सिर्फ 26 राजनेताओं की जांच की. इनमें विपक्ष के 14 यानी करीब 54 फीसद नेता शामिल थे. मतलब साफ है कि UPA की तुलना में NDA सरकार के वक्त ED ने विपक्षी नेताओं पर 41 फीसद ज्यादा कार्रवाई की. इन्हीं सब कारणों से सरकार पर ED को पॉलिटिकल टूल की तौर पर इस्तेमाल करने के आरोप लगते हैं.

इससे पहले किन राज्यों में चुनाव से पहले ED ने छापेमारी की?

पश्चिम बंगाल की तरह ही 6 दूसरे राज्यों में भी ED ने चुनाव से ठीक पहले छापेमारी की थी. ED के अलावा IT और CBI ने भी 3 राज्यों में चुनाव से पहले इसी तरह की कार्रवाई की थी. यही कारण है कि पश्चिम बंगाल चुनाव से करीब 2 महीने पहले हुए इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अब एक-एक कर उन राज्यों के बारे में जानते हैं-

राजस्थान : अशोक गहलोत के भाई के खिलाफ कार्रवाई

2018 में विधानसभा चुनाव से पहले ED की छापेमारी हुई. ED ने खाद घोटाले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के परिसरों की तलाशी ली थी. गहलोत के करीबी राजीव अरोड़ा और धर्मेंद्र राठौर के आवासों और व्यावसायिक परिसरों पर IT और ED ने छापेमारी की थी. राजीव उस समय प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी थे.

महाराष्ट्र : शरद पवार के खिलाफ कार्रवाई

2019 में विधानसभा चुनाव हुए थे. सितंबर 2019 में चुनाव के ठीक पहले ED ने छापे मारे. NCP प्रमुख शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार पर ED ने शिकंजा कसा था. उनके खिलाफ महाराष्ट्र राज्य कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े घपले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया था.

अगस्त 2019 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे से भी मनी लॉन्ड्रिग मामले में पूछताछ की गई थी. राज ठाकरे से कोहिनूर कंपनी में 850 करोड़ रुपए निवेश को लेकर पूछताछ हुई थी. वह 2009 तक कोहिनूर कंपनी के पार्टनर थे.

आंध्र प्रदेश : TDP सांसद वाईएस चौधरी के खिलाफ कार्रवाई

आंध्र प्रदेश में 2019 में विधानसभा चुनाव से पहले नवंबर 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तेलुगू देशम के सांसद वाईएस चौधरी से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे. चुनाव के बाद 2019 में वाईएस चौधरी ने BJP जॉइन कर ली.

तमिलनाडु : स्‍टालिन के दामाद के खिलाफ कार्रवाई

2021 में विधानसभा चुनाव से पहले DMK नेता स्टालिन की बेटी के घर इनकम टैक्स ने छापा मारा था. DMK प्रमुख एमके स्‍टालिन के दामाद सबरीसन और उनके सहयोगियों के चेन्‍नई स्थित ठिकानों पर तलाशी ली गई थी.

पिछले सितंबर में डीएमके के कार्यकर्ता पुंजोलाइ श्रीनिवासन पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ. यह मामला 2019 के चुनावों से पहले वेल्लोर में 11 करोड़ की रकम मिलने को लेकर था.

केरल : मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के खिलाफ कार्रवाई

2021 में विधानसभा चुनाव हुए, जिससे ठीक पहले जुलाई 2020 में मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम शिवशंकर से सोने की तस्करी के मामले में पूछताछ की. अक्टूबर में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया.

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कस्टम विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया कि सोने की तस्करी के मामले के मुख्य अभियुक्त स्वप्न सुरेश ने कहा है कि यह काम मुख्यमंत्री विजयन के इशारे पर हो रहा था. अगस्त 2020 में माकपा के कोदियरी बालाकृष्णन के बेटे को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे. बालाकृष्णन ने इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

पश्चिम बंगाल : अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई

2021 में विधानसभा चुनाव हुए थे. तब भी फरवरी 2021 में IT ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक की पत्नी रुजिरा बनर्जी से कोयला घोटाले में पूछताछ की थी. अभिषेक के ही दो रिश्तेदारों अंकुश अरोड़ा और पवन अरोड़ा को भी IT का सामना करना पड़ा था.

इसके बाद मार्च में ED ने ममता के करीबी पार्थ चटर्जी और मदन मित्रा को चिटफंड से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में तलब किया. तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता से शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर पूछताछ की गई थी. तृणमूल नेता कुणाल घोष और शताब्दी राय की सम्पत्ति ED ने कुर्क कर ली थी. हालांकि, चुनाव के कुछ समय बाद ये मामला शांत हो गया.

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