होटल-रेस्टोरेंट LPG संकट का सामना कैसे कर रहे हैं?

होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि गैस आपूर्ति में कमी का असर अब उनके व्यवसायों को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले सकता है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

भारत में कमर्शियल LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की बढ़ती कमी का साफ असर अब होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर दिखने लगा है. इस संकट के कारण कई ढाबे और रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू को कम किया है. इतना ही नहीं ये गैस का इस्तेमाल कम-से-कम करने की कोशिश भी कर रहे हैं.

कुछ रेस्टोरेंट ने तो अस्थाई रूप से कामकाज बंद करने का फैसला भी लिया है. इस क्षेत्र से जुड़े इंडस्ट्री एसोसिएशन (उद्योग संगठन) चेतावनी दे रहे हैं कि अगर गैस की सप्लाई जल्दी स्थिर नहीं हुई, तो यह संकट देश के सबसे बड़े सर्विस सेक्टर में फैल सकता है.

इससे लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी प्रभावित होगी और शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं की रोज़ाना की खाद्य आपूर्ति पर भी सीधा असर पड़ेगा. पिछले एक सप्ताह में मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और कोलकाता के कई रेस्टोरेंट ने व्यावसायिक LPG सिलेंडर मिलने में मुश्किलों की सूचना दी है, जो कमर्शियल रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्राथमिक ईंधन है.

कई बड़े होटल और रेस्टोरेंट ने पहले ही अपनी सेवाएं कम कर दी हैं, जबकि अन्य सीमित गैस भंडार के साथ काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, ये होटल रेस्टोरेंट दैनिक गैस उपयोग की सावधानीपूर्वक निगरानी भी कर रहे हैं.

गैस सप्लाई में होने वाली यह कमी वैश्विक और घरेलू कारकों दोनों से जुड़ी है. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान ने ईंधन की आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित किया है. इसके चलते सरकार ने घरेलू खपत को प्राथमिकता देते हुए घरेलू LPG सिलेंडर की आपूर्ति पर फोकस किया है.

भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है. देश में रेस्टोरेंट, होटल, स्ट्रीट फूड विक्रेता और अन्य रेहड़ी-पटरी पर दैनिक खाना पकाने वाले व्यावसायिक सिलेंडर पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. किसी भी रुकावट का उनके कामकाज पर तत्काल असर पड़ता है.

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से यह मुद्दा उठाया है और चेतावनी दी है कि लंबे समय तक व्यवधान से उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को लिखे एक हालिया पत्र में, एसोसिएशन ने अधिकारियों और तेल विपणन कंपनियों से कमर्शियल LPG सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.

NRAI के अध्यक्ष सागर दरयानी ने कहा, “पूरे भारत में रेस्टोरेंट उद्योग के लिए कमर्शियल LPG आपूर्ति में जारी दिक्कतें एक गंभीर चिंता का विषय है." उनके मुताबिक, रेस्टोरेंट और होटल अपने रसोईघर चलाने के लिए निर्बाध LPG उपलब्धता पर बहुत अधिक निर्भर हैं. ऐसे में गैस सप्लाई में लंबे समय तक होने वाली कमी से दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के रेस्टोरेंट सीमित भंडार के साथ काम करते हैं. अगर आपूर्ति शीघ्र बहाल नहीं की गई तो उन्हें अस्थाई रूप से बंद होने का सामना करना पड़ सकता है.

दरयानी ने इस संकट से पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोविड महामारी के दौरान रेस्टोरेंट क्षेत्र आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है और कई लोग अपने दैनिक भोजन के लिए इस पर निर्भर हैं.

उन्होंने कहा, “रेस्टोरेंट और होटल इंडस्ट्री प्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों की आजीविका का साधन है. साथ ही यह समग्र रूप से गिग इकॉनमी को भी सहारा देता है. हम अधिकारियों और ऑयल डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों से आग्रह करते हैं कि वे कमर्शियल LPG की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं ताकि रेस्तरां बिना किसी रुकावट के ग्राहकों को सेवा प्रदान करना जारी रख सकें.”

हालांकि, शहरों में रेस्टोरेंट संचालक रसोई के कामकाज और मेनू को फिर से तैयार करके अनिश्चितता के अनुकूल ढल रहे हैं. NRAI की चेन्नई शाखा के प्रमुख गंधर्व ढिंगरा ने कहा, "चेन्नई भर के रेस्टोरेंट वर्तमान में LPG की खपत पर कड़ी नजर रख रहे हैं क्योंकि आपूर्ति की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है." उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठानों ने मेनू में बदलाव करना, गैस की अधिक खपत करने वाले व्यंजनों को कम करना और ईंधन बचाने के लिए रसोई संचालन की अधिक सावधानीपूर्वक योजना बनाना शुरू कर दिया है.

इन उपायों से फिलहाल रेस्टोरेंट को अपना कामकाज जारी रखने में मदद मिली है, लेकिन उद्योग जगत के नेता इन्हें अस्थाई समाधान मानते हैं. ढिंगरा ने कहा, "अगर व्यावसायिक LPG की आपूर्ति और कम होती है, तो स्थिति सामान्य होने तक कुछ रेस्टोरेंट को अपने काम-काज को सीमित करना पड़ सकता है."

मुंबई में भी इसी तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं, जहां रेस्टोरेंट कथित तौर पर ईंधन का इस्तेमाल बेहद सावधानी से कर रहे हैं. NRAI के उपाध्यक्ष प्रणव रुंगटा ने कहा, "मुंबई के रेस्तरां पहले से ही बहुत सीमित LPG भंडार के साथ काम कर रहे हैं और कई रसोईघर आपूर्ति को बढ़ाने के लिए अपने दैनिक उपयोग को बारीकी से खर्च कर रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा कि कई आउटलेट्स ने अपने मेनू को सीमित किया है और गैस बचाने के लिए थोक खाना पकाने पर जोर दिया है. इसके अलावा, कुछ रेस्टोरेंट ने भोजन पकाने के लिए बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल शुरू किया है. रुंगटा ने कहा, "स्थिति बहुत अनिश्चित है और हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि कम से कम भविष्य के LPG आवंटन पर स्पष्टता प्रदान करें."

देश के कुछ हिस्सों में गैस की कमी के कारण पैदा होने वाली समस्या स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी हैं. कई रेस्टोरेंट ने काम संचालन के घंटे घटा दिए हैं या खाना पकाने के वैकल्पिक तरीकों, जैसे इंडक्शन स्टोव या पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे का उपयोग करना शुरू कर दिया है. इस संकट के दौरान कालाबाजारी और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इससे विशेष रूप से छोटे भोजनालयों और स्ट्रीट वेंडरों पर असर पड़ रहा है, जिनका मुनाफा बहुत कम होता है.

फिलहाल, रेस्टोरेंट उद्योग को उम्मीद है कि आपूर्ति जल्द ही स्थिर हो जाएगी. NRAI के अंतर्गत 5 लाख से अधिक रेस्टोरेंट हैं और लाखों कर्मचारी हर रोज लाखों लोगों के लिए भोजन तैयार करते हैं. उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है. यह भोजन की उपलब्धता, शहरी आजीविका को भी प्रभावित करता है. इस इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि देशभर के रेस्टोरेंट की रसोई बिना किसी रुकावट के चलती रहे और ग्राहकों को खुशी से सेवा प्रदान करती रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार को तेल कंपनियों और वितरकों के साथ मिलकर तुरंत कोई रास्ता निकालना होगा.

- अमीन अली

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