जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत का बड़ा बाजार, दोनों के लिए फायदे का सौदा : जितिन प्रसाद
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने India Today Indo-Japan Conclave में बताया कि किन वजहों से भारत-जापान सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 22 मई को भारत-जापान संबंधों को वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले दो प्रमुख विषयों- प्रौद्योगिकी और व्यापार- के संगम पर बताया.
नई दिल्ली में आयोजित India Today Indo-Japan Conclave में 'Trade & Commerce: CEPA—The New Focus Sectors of Growth' सत्र के अपने मुख्य संबोधन में प्रसाद ने कहा कि भारत-जापान संबंध अब उभरती प्रौद्योगिकियों, विनिर्माण और निवेश के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग से संचालित हो रहे हैं.
मंत्री ने 2011 में हस्ताक्षरित ‘इंडिया-जापान कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ यानी CEPA को ऐसा समझौता बताया जिसमें बदलती वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर नए सिरे से बदलाव की जरूरत है. उन्होंने कहा कि समझौते के लागू होने के एक दशक से अधिक समय बाद अब ध्यान केवल कागजी प्रक्रियाओं और टैरिफ में कटौती से आगे बढ़कर व्यावहारिक कारोबारी अवसरों और गहरे औद्योगिक सहयोग पर होना चाहिए.
प्रसाद ने कई बार इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत में बड़ा बदलाव आया है. उनके मुताबिक 2014 के बाद भारत की वैश्विक छवि, आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और घरेलू उपभोग के पैटर्न में बड़ा परिवर्तन हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी, जिसे कभी बोझ माना जाता था, अब उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन गई है. खासकर इसलिए क्योंकि बढ़ती आकांक्षाएं महानगरों से निकलकर ग्रामीण भारत तक पहुंच चुकी हैं.
प्रसाद ने भारत के उपभोक्ता बाजार के बढ़ते आकार का जिक्र करते हुए कहा कि गांवों और कस्बों के परिवार अब गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और आधुनिक उपकरणों की मांग कर रहे हैं. उनके अनुसार, इस बदलाव ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक बाजारों में शामिल कर दिया है और वह वैश्विक व्यापारिक साझेदारियों तथा मुक्त व्यापार समझौतों के लिए पसंदीदा गंतव्य बन गया है.
इसके साथ ही जितिन प्रसाद का कहना था कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए केवल उपभोक्ता बाजार बनकर नहीं रहना चाहता. इसके बजाय उन्होंने सह-उत्पादन, विनिर्माण साझेदारियों और दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग की वकालत की. उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन से सीधे जुड़े होने के कारण मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में विनिर्माण को केंद्रीय महत्व दिया गया है.
मंत्री ने कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए सरकार की पहल का भी उल्लेख किया. संसद में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नौकरशाही बाधाओं को कम करने और निवेशकों के लिए बेहतर माहौल बनाने के उद्देश्य से 1,000 से अधिक अनुपालन संबंधी प्रावधानों और आपराधिक धाराओं को हटाया गया है. उन्होंने सरकार की नीति को ‘रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट’ वाला दृष्टिकोण बताया, जिसके तहत अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है और सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए निवेश को आसान और तेज करने का प्रयास किया गया है.
भारत-जापान व्यापार के बारे में प्रसाद ने स्वीकार किया कि CEPA के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के कई कारोबारी अब भी एक-दूसरे के बाजारों में उपलब्ध अवसरों और नियामकीय व्यवस्थाओं से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. जापानी कंपनियों को भारतीय बाजार को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत है, वहीं भारतीय कंपनियों को भी जापानी व्यवस्था और आवश्यकताओं को अधिक गहराई से समझना होगा.
मंत्री ने जापान को होने वाले भारतीय निर्यात पर असर डालने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को लेकर चिंता जताई. उन्होंने खासतौर पर कृषि, समुद्री उत्पाद, वस्त्र और खाद्य उत्पाद क्षेत्रों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक मानकों और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन अत्यधिक प्रतिबंधों के जरिए भारतीय उत्पादों को रोका नहीं जाना चाहिए. उनके मुताबिक, भारत अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में सक्षम विश्वस्तरीय परीक्षण अवसंरचना और प्रयोगशालाएं विकसित कर रहा है.
मंत्री ने कहा कि व्यापार समझौतों के बढ़ते नेटवर्क का सबसे बड़ा लाभ अब MSMEs को मिल सकता है. उनके अनुसार, यदि छोटे भारतीय उद्यम बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध करा सकें तो उनके सामने वैश्विक बाजारों तक पहुंचने के ‘असीमित अवसर’ हैं.
प्रसाद ने भविष्य की तकनीति साझेदारियों को भी भारत-जापान संबंधों में विकास का बड़ा क्षेत्र बताया. उन्होंने सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत विनिर्माण को ऐसे क्षेत्र बताया जहां जापान की तकनीकी विशेषज्ञता भारत के विशाल पैमाने और स्किल्ड वर्कफोर्स के साथ मिलकर काम कर सकती है.
जापान की बढ़ती उम्र वाली आबादी और भारत के युवा कार्यबल का जिक्र करते हुए प्रसाद ने इसे स्वाभाविक तालमेल बताया. उन्होंने कहा कि भारत तेजी से भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता विकसित कर रहा है. AI, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़ी शिक्षा अब जमीनी स्तर के संस्थानों और गांवों तक पहुंच रही है.
भारत को ‘दुनिया की स्किल कैपिटल’ बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि आवाजाही से जुड़ी बाधाएं कम होती हैं तो सरकार जापान में कुशल भारतीय कामगारों की अधिक भागीदारी का समर्थन करने के लिए तैयार है. उन्होंने इसे भविष्य में भारत-जापान सहयोग के सबसे संभावनाशील क्षेत्रों में से एक बताया.
अपने भाषण में प्रसाद ने भारत को एक स्थिर और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि भारत केवल व्यापार समझौतों के माध्यम से नहीं, बल्कि साझा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी साझेदारियों, कार्यबल सहयोग और आपूर्ति शृंखला की मजबूती के जरिए भी जापान के साथ गहरे एकीकरण का इच्छुक है.
जितिन प्रसाद के भाषण की खास बातें :
- "हम नहीं चाहते कि भारत को केवल एक बाजार के रूप में देखा जाए. हम सह-उत्पादन चाहते हैं, हम साझेदारी चाहते हैं."
- "हम चाहते हैं कि रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट बिछाया जाए."
- "जापान के पास सटीकता और तकनीकी विशेषज्ञता है, जबकि भारत के पास विशाल पैमाना और बड़ा बाजार है. यह दोनों के लिए फायदे की साझेदारी है."
- "एक समय हमारी आबादी को बोझ माना जाता था. आज यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है."
- "यह सरकार फुर्तीली है. यह सुनती है, हितधारकों से परामर्श करती है और उसी के अनुसार नियमों में बदलाव करती है. हम अगला चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि अगले 20-30 वर्षों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रहे हैं."