क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील से फिर लौट आएगी हीरा उद्योग की चमक?

अमेरिका के भारी टैरिफ से भारतीय रत्न-आभूषण निर्यात में भारी गिरावट आई थी, लेकिन ट्रेड डील की खबर से हीरा व्यापारियों में नई उम्मीद जागी है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की खबर से अगर सबसे ज्यादा किसी को खुशी है, तो वे भारतीय हीरा व्यापारी हैं. खासकर प्राकृतिक हीरा क्षेत्र से जुड़े लोग व्यापार समझौते को लेकर जश्न मना रहे हैं.

2025 में अमेरिका को पॉलिश किए हीरों के निर्यात में 60 फीसद की गिरावट दर्ज हुई थी. 2024 में दोनों देशों के बीच हीरों का व्यापार 363.63 करोड डॉलर था, जो 2025 में घटकर 145 करोड़ डॉलर हो गया.

जेम्स एंड जूलरी यानी भारतीय रत्न और आभूषण सेक्टर को अब उम्मीद है कि ट्रेड डील के बाद उनके प्रोडक्ट पर अमेरिका में शून्य शुल्क लगेगा, जिससे उनके बिजनेस को भारी लाभ होगा. जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली का कहना है, "इससे भारतीय रत्न और आभूषणों का व्यापार बढ़ेगा. दोनों देशों के बीच विश्वास का पुनर्निर्माण होगा और रत्न और आभूषण सेक्टर को मजबूत बढ़ावा मिलेगा."

भारत के रत्नों और आभूषणों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका है. वित्त वर्ष 2024-25 में रत्नों और आभूषणों के कुल निर्यात का करीब 31 फीसद (9.23 अरब डॉलर) अमेरिका को निर्यात किया गया. 2025 में अमेरिका के लगाए गए पारस्परिक शुल्कों ने इस सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया.

पॉलिश किए गए भारतीय हीरों और रंगीन रत्नों पर अमेरिका में शुल्क अप्रैल 2025 में 0 फीसद से बढ़कर 10 फीसद हो गया और फिर अगस्त 2025 तक यह शुल्क 50 फीसद तक पहुंच गया. इसके कारण रत्न और आभूषणों का अमेरिका में निर्यात कम हुआ और इससे जुड़े व्यापारियों के लाभ मार्जिन पर दबाव पड़ा.  

इसी तरह भारत में बनी ज्वेलरी पर अमेरिका में लगने वाला शुल्क 5-7 फीसद से बढ़कर 55-57 फीसद हो गया. इसके कारण अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान अमेरिका को भारत से होने वाले रत्न और आभूषणों के निर्यात में 55.5 फीसद की भारी गिरावट आई, जो 8,69.12 करोड़ डॉलर से घटकर 3,86.20 करोड़ डॉलर हो गया.

इस सेक्टर से जुड़े लोग भारत और अमेरिकी सरकार की ओर डील पर औपचारिक घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं. इस क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यह व्यापार समझौता इस क्षेत्र को लगभग पतन के कगार से उबरने में मदद करेगा. पिछले साल अमेरिका ने ऐसे समय में टैरिफ लगाया, जब हीरा उद्योग बुरी तरह से परेशान था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुर्लभ कीमती पत्थरों की अधिकता के कारण प्राकृतिक हीरों की कीमतों में लगभग 33 फीसद की गिरावट आ गई थी.

इसका कारण यह था कि सस्ते लैब-ग्रोन हीरों (LGD) से बाजार भर गया था. सामान्य और कम आय वाले लोग इन सस्ते हीरों को खूब खरीद रहे थे. कोविड महामारी के बाद चीन और हांगकांग के बाजार पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों ने रूस से आयातित कच्चे हीरों पर प्रतिबंध लगा दिया.

सूरत के हीरा व्यापारियों के जरिए आयात किए जाने वाले हीरों का सबसे बड़ा हिस्सा रूस से आता है. साइज में छोटे रूसी कच्चे हीरे को काटकर और पॉलिश करके दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है. युद्ध शुरू होने पर कच्चे माल के रूप में रूसी हीरों के आयात पर भारी असर पड़ा.

भारतीय हीरा उद्योग में 8 लाख से अधिक कारीगर कार्यरत हैं. इन कारीगरों का बड़ा हिस्सा सूरत में रहता है. इसके अलावा मुंबई, अहमदाबाद और मध्य गुजरात तथा सौराष्ट्र के शहरों में भी हीरा कारीगर हैं. उद्योग जगत के बड़े व्यापारियों ने काम कम होने के बावजूद छंटनी से इनकार किया है. हालांकि, गुजरात हीरा श्रमिक संघ का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में लाखों श्रमिकों के काम के घंटे और कार्यदिवस बहुत कम हो गए हैं.

इसके परिणामस्वरूप उनकी आय में भी काफी कमी आई है. डायमंड इंडस्ट्री के जो हालात हैं, उसके चलते एक गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है. इस उद्योग में व्याप्त तनाव के कारण आत्महत्या से लगभग 100 मौतें हुई हैं. बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं और बड़े पैमाने पर लोग खेतों में मजदूर के रूप में काम करने के लिए गांवों की ओर वापस पलायन कर रहे हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से रोजगार की स्थिति में कुछ सुधार आने की उम्मीद है. श्रमिकों को तुरंत सामान्य कामकाज शुरू होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि निर्यातकों के पास बड़ी मात्रा में बिना बिका हुआ माल पड़ा है. इन सबके बावजूद निराशा के बजाय, धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखने लगे हैं.

केंद्रीय बजट 2026 ने उद्योग जगत के लोगों को जश्न मनाने का एक और कारण दिया है. GJEPC का कहना है कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों (जैसे SEEPZ, मुंबई) से घरेलू टैरिफ क्षेत्र में रियायती शुल्क पर सीमित बिक्री की अनुमति से इस क्षेत्र में व्यापार को मजबूत करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, कूरियर निर्यात पर लगी ₹10 लाख की सीमा को हटाना ई-कॉमर्स के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है, जिससे MSMEs, कारीगरों और छोटे आभूषण ब्रांडों को वैश्विक खरीदारों तक सीधे पहुंचने में मदद मिलेगी.

इतना ही नहीं, विश्वसनीय आयातकों के लिए बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने से माल के आगमन पर तत्काल पैसों की निकासी हो सकेगी. इस क्षेत्र से जुड़े अधिकृत आर्थिक ऑपरेटरों (AEO) के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 से बढ़ाकर 30 दिन करने का फैसला लिया गया है. बजट 2026 में लिए गए इन फैसलों पर रत्न और आभूषण क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि इन नियमों से डायमंड इंडस्ट्री को काफी फायदा होने वाला है.

उनका मानना है कि हीरा उद्योग का 80 फीसद हिस्सा MSMEs से बना है, जिन्हें इन पहलों से बहुत लाभ होगा. इसके अलावा, बजट में LGD हीरा के बीजों और कटे हुए हीरों के शुल्क-मुक्त आयात को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है, जिससे इस बढ़ते उद्योग को बढ़ावा मिलेगा.

इस क्षेत्र में भारत पहले से ही बाकी देशों से आगे है. हालांकि LGD प्राकृतिक हीरा उद्योग को प्रभावित करता है, लेकिन हीरा काटने और पॉलिश करने वाले उद्योग और LGD निर्यातक बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं. ऐसे में सरकार इसे काफी अहम क्षेत्र मानती है. LGD का इस्तेमाल अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में भी होता है, जो इसे इसकी अहमियत को और ज्यादा बढ़ाता है.  

GJEPC का कहना है, "LGD क्षेत्र को दिया गया प्रोत्साहन एक व्यावहारिक कदम है. यह इनपुट लागत को कम करेगा, जिससे उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा."

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