'अतिथि देवो भव' को नई पहचान दे रहा पूर्वोत्तर भारत
पूर्वोत्तर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ स्थानीय रीति-रिवाजों और जनजातीय परंपराओं के बारे में आगंतुकों को जागरूक करना भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के पर्यटन मंत्रियों ने कहा कि पर्यटन बढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है.
पिछले सप्ताह गोवा में आयोजित ‘इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवॉर्ड्स 2026’ में 'परफेक्टिंग द आर्ट ऑफ अतिथि देवो भव' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में मंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों की खासियतों को सामने रखा. साथ ही तेजी से बढ़ती पर्यटकों की संख्या से पैदा हो रही चुनौतियों पर भी चर्चा की.
मेघालय के पर्यटन मंत्री पॉल लिंगदोह शिरा ने कहा कि 2018 के बाद राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है, जबकि यहां दशकों से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मौजूद हैं. उन्होंने कहा, "मेघालय खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों और जीवित जड़ों से बने पुलों (लिविंग रूट ब्रिज) तथा दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान जैसी अनूठी जगहों से समृद्ध है. लेकिन संचार की कमी और अन्य कारणों से यह पूर्वोत्तर के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल नहीं हो पाया था."
शिरा के मुताबिक, इसके बाद राज्य सरकार ने पर्यटन ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश किया. इसमें दो फाइव स्टार होटल बनाए गए और 120 पर्यटन स्थलों का विकास किया गया. उन्होंने कहा कि चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल, वांगला फेस्टिवल और मे'गोंग फेस्टिवल जैसे आयोजनों ने देश और विदेश से पर्यटकों को आकर्षित किया है. साथ ही स्थानीय कलाकारों और संगीतकारों के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं.
अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पसांग दोरजी सोना ने पर्यटकों की संख्या सीमित करने की मांग को बहुत सरल समाधान मानने से आगाह किया. उन्होंने इसे ‘दोधारी तलवार’ बताया. सोना ने कहा, "जब आप पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की बात करते हैं तो यह दोधारी तलवार है. बात सिर्फ संख्या नियंत्रित करने की नहीं है बल्कि पर्यटकों को जागरूक बनाने की भी है. अगर हम केवल प्रतिबंधों पर ध्यान देंगे तो पर्यटन से होने वाली आय और इस क्षेत्र पर निर्भर लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है."
उन्होंने कहा कि असली चुनौती पर्यटकों को स्थानीय रीति-रिवाजों और जनजातीय परंपराओं के बारे में शिक्षित करने की है. उन्होंने माना कि कभी-कभी कुछ पर्यटक असंवेदनशील व्यवहार करते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग स्थानीय संस्कृति को समझने की ईमानदार कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा, "हम जनजातीय लोग बाहर से आने वाले मेहमानों का खुले दिल से स्वागत करते हैं. उनकी मेहमाननवाजी के लिए हम हर संभव प्रयास करते हैं. यही बात राज्य में पर्यटन को बढ़ाने में मदद कर रही है."
सिक्किम के पर्यटन मंत्री छेरिंग थेंदुप भूटिया ने भी समुदाय आधारित पर्यटन के महत्व पर जोर दिया. खासकर राज्य के व्यापक होमस्टे नेटवर्क के जरिए. उन्होंने कहा, "अतिथि देवो भव की शुरुआत ग्रामीण पर्यटन से होती है. मेहमाननवाजी हमारे स्वभाव का हिस्सा है." उन्होंने कहा कि पर्यटन में सिक्किम की सफलता स्थानीय लोगों की मजबूत भागीदारी पर आधारित है.
भूटिया ने कहा कि सिक्किम में पर्यटकों और स्थानीय समुदायों के बीच बड़े विवाद नहीं हुए हैं. फिर भी राज्य ने 'सिक्किम इंस्पायर्स' कार्यक्रम के जरिए जागरूकता अभियान शुरू किया है. इस पहल के तहत प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक पर्यटकों को ठहरने की जगह पर पहुंचने से पहले स्थानीय परंपराओं, सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं और उचित व्यवहार के बारे में जानकारी देते हैं.
मंत्रियों का मानना था कि पूर्वोत्तर में पर्यटन के विकास के साथ यात्रियों को स्थानीय परंपराओं और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के बारे में भी अधिक जागरूक करना होगा. उनका कहना था कि कड़े प्रतिबंध लगाने के बजाय जागरूक पर्यटन ही इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत को सुरक्षित रखते हुए स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाने का सबसे बेहतर तरीका होगा.
शिरा ने इस मंच का इस्तेमाल मेघालय के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में चेरापूंजी को बढ़ावा देने के लिए भी किया. उन्होंने यहां के झरनों, गुफाओं और 250 करोड़ रुपए की लागत वाली आगामी पर्यटन परियोजनाओं का जिक्र किया. वहीं सोना ने अरुणाचल प्रदेश के दूरस्थ जिले अनीनी को राज्य की अनछुई पर्यटन क्षमता का उदाहरण बताया. भूटिया ने जोंगरी-गोएचा ला ट्रेक और सिक्किम के हाई एल्टीट्यूड स्काईवॉक को पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बताया.
खास बातें :
- मेघालय ने अपने पर्यटन विस्तार कार्यक्रम के तहत दो फाइव स्टार होटल बनाए हैं और 120 पर्यटन स्थलों का विकास किया है.
- अरुणाचल प्रदेश के लिए पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करना दोधारी तलवार है. जितना जरूरी संख्या का प्रबंधन है, उतना ही जरूरी पर्यटकों को जागरूक बनाना भी है.
- सिक्किम के अनुसार अतिथि देवो भव की शुरुआत ग्रामीण पर्यटन से होती है और मेहमाननवाजी वहां की सबसे बड़ी स्वाभाविक ताकत है.